500 करोड़ मांगेगी राज्य सरकार

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कोलकाता: राज्य में पिछले दिनों हुई भारी बारिश व उसके बाद दामोदर घाटी निगम (डीवीसी) के विभिन्न बांधों से छोड़े गये पानी से बाढ़ की स्थिति पैदा हो गयी थी. इस कारण पांच जिले पूर्व मेदिनीपुर, पश्चिम मेदिनीपुर, हावड़ा, हुगली व बर्दवान में हजारों हेक्टेयर जमीनजलमग्‍नहो गयी थी. वहां की फसलें नष्ट हो गयी थीं. […]

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कोलकाता: राज्य में पिछले दिनों हुई भारी बारिश व उसके बाद दामोदर घाटी निगम (डीवीसी) के विभिन्न बांधों से छोड़े गये पानी से बाढ़ की स्थिति पैदा हो गयी थी.

इस कारण पांच जिले पूर्व मेदिनीपुर, पश्चिम मेदिनीपुर, हावड़ा, हुगली व बर्दवान में हजारों हेक्टेयर जमीनजलमग्‍नहो गयी थी. वहां की फसलें नष्ट हो गयी थीं. अब राज्य सरकार ने इसके लिए केंद्र से मुआवजे की मांग की है.

राज्य के आपदा प्रबंधन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, बाढ़ से 500 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है और जल्द ही इस राशि के भुगतान के लिए केंद्र सरकार के पास प्रस्ताव भेजा जायेगा. राज्य सरकार की ओर से केंद्र सरकार से राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन फंड के तहत इस राशि की मांग की जायेगी. गौरतलब है कि पिछले दिनों आयी बाढ़ के कारण राज्य में सब्जियों की कीमत दोगुनी से भी अधिक हो गयी है.

विपक्ष ने राज्य के लिए मांगे 5.5 लाख करोड़कोलकाता. प्रदेश वाम मोरचा ने 14वें वित्त आयोग से 2015-20 अवधि के लिए 5.5 लाख करोड़ रुपये की मांग की है, जो सत्तारुढ़ तृणमूल कांग्रेस द्वारा मांगी गयी राशि के मुकाबले दोगुनी से अधिक है.

राज्य के पूर्व वित्त मंत्री असीम दासगुप्ता ने शनिवार को वित्त आयोग के साथ बैठक के बाद संवाददाताओं को बताया कि वाम मोरचा की तरफ से माकपा ने 14वें वित्त आयोग से मुलाकात की और बैठक काफी अच्छी रही. उनकी पार्टी की ओर से राज्य के लिए 5,50,000 करोड़ रुपये की मांग की है.

राज्य का वित्त मंत्री रहते हुए श्री दासगुप्ता ने 13वें वित्त आयोग से 4,22,000 करोड़ रुपये की मांग की थी. उन्होंने कहा कि वाम मोरचा सदस्य तृणमूल कांग्रेस की छूट और बट्टे खाते में डालने की मांग का विरोध नहीं कर रहे हैं. असीम दासगुप्ता ने कहा कि 14वें वित्त आयोग से वाम मोरचा की मुख्य मांग रोजगार आधारित वृद्धि व उत्पादों की कीमत में तीव््रा वृद्धि रोकने के लिए सब्सिडी उपलब्ध कराना है. उन्होंने कहा कि केंद्रीय करों की हिस्सेदारी मौजूदा एक तिहाई से बढ़ा कर कम से कम 50 प्रतिशत की जानी चाहिए, क्योंकि राज्यों की प्रमुख जिम्मेदारी विकास है.

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