महंगाई की मार: अभी बाजार में सब्जी तीखी ही रहेगी

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कोलकाता: आलू की कीमत नियंत्रित करने में राज्य सरकार को भले ही कुछ सफलता मिल जाये, लेकिन आलू के अलावा अन्य सब्जियों की कीमत अगले 15 दिनों तक कम होनेवाली नहीं है. आलू के बाद अब सब्जियों की बढ़ती कीमत मुख्यमंत्री के लिए नया सिरदर्द बन सकती है. इस संबंध में विधान चंद्र कृषि विश्वविद्यालय […]

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कोलकाता: आलू की कीमत नियंत्रित करने में राज्य सरकार को भले ही कुछ सफलता मिल जाये, लेकिन आलू के अलावा अन्य सब्जियों की कीमत अगले 15 दिनों तक कम होनेवाली नहीं है. आलू के बाद अब सब्जियों की बढ़ती कीमत मुख्यमंत्री के लिए नया सिरदर्द बन सकती है.

इस संबंध में विधान चंद्र कृषि विश्वविद्यालय के प्रोफेसर प्रणव चटर्जी ने बताया कि कुछ दिन पहले आये बाढ़ से यहां के पांच जिलों में हजारों हेक्टेयर जमीन की खेती नष्ट हो गयी है. इसके अलावा झारखंड व ओड़िशा के सीमा से यहां प्याज, टमाटर व अन्य सब्जियां नहीं आने से समस्या और भी बढ़ सकती है.

गौरतलब है कि फिलहाल कोलकाता सहित राज्य के अन्य क्षेत्र के बाजारों में सब्जियों की कीमत 60-90 रुपये प्रति किलो के बीच है, जबकि पिछले वर्ष इनकी कीमत महज 15-20 रुपये किलो के बीच थी. यहां के बाजार में टमाटर पिछले वर्ष की तुलना में चौगुना कीमत पर बिक रहे हैं. राज्य सरकार के प्रयायों की वजह से आलू की कीमत गिर कर 14-15 रुपये प्रति किलो तक रह गयी है, लेकिन सब्जियों की कीमत में फिलहाल कोई गिरावट नहीं आयेगी. क्योंकि किसानों से फिर से सब्जियों की खेती की है और मध्य दिसंबर के पहले यहां से सब्जियां बाजार तक नहीं पहुंच पायेंगी.

जानकारी के अनुसार, चावल की कीमत भी पिछले वर्ष के 11 रुपये प्रति किलो की दर से बढ़ कर अब 15 रुपये प्रति किलो हो गयी है. इन पांच जिलों में राज्य में उत्पादित कुल चावल का करीब एक तिहाई हिस्सा नष्ट हो गया है. पिछले दिनों आयी बाढ़ से करीब एक लाख टन धान नष्ट हो गये हैं. गौरतलब है कि राज्य में 943000 हेक्टेयर जमीन पर प्रत्येक वर्ष 1.33 करोड़ टन सब्जियों का उत्पादन होता है. जुलाई व अगस्त महीने में राज्य के 19 जिलों में से नौ जिलों में बाढ़ की स्थिति पैदा हो गयी है. राज्य के धान उत्पादन करनेवाले जिले बर्दवान, हुगली, बर्दवान व नदिया में धान की खेती को काफी नुकसान हुआ था.

दूसरी ओर, दमदम कैंट के सब्जी विक्रेता राजेश साव ने बताया कि फिलहाल सब्जी की कीमत नहीं घटी है और सब्जी को लेकर लोग परेशान है, लेकिन जिस दर में उन लोगों को सब्जी मिलती है. उसी दर में ही बेचेंगे. दर कम हो जाने से हमें भी लोगों की खिचखिच से राहत मिलती है.

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