बाल अधिकारों के प्रति पार्टियों को जवाबदेह बनाने की कवायद
कोलकाता: भारत की आबादी लगभग 120 करोड़ है, जिसमें से 34 करोड़ अर्थात कुल आबादी का 40 प्रतिशत बच्चे हैं. इतनी बड़ी संख्या होने के बावजूद देश का भविष्य कहलाने वाले यह बच्चे अपने अधिकारों से वंचित है. आज भी बीच में ही अपनी पढ़ाई छोड़नेवाले बच्चों की संख्या 40 प्रतिशत है. बच्चों को उनका […]
कोलकाता: भारत की आबादी लगभग 120 करोड़ है, जिसमें से 34 करोड़ अर्थात कुल आबादी का 40 प्रतिशत बच्चे हैं. इतनी बड़ी संख्या होने के बावजूद देश का भविष्य कहलाने वाले यह बच्चे अपने अधिकारों से वंचित है. आज भी बीच में ही अपनी पढ़ाई छोड़नेवाले बच्चों की संख्या 40 प्रतिशत है. बच्चों को उनका उचित अधिकार दिलाने व उनके समूचित विकास के लिए स्वयंसेवी संस्था चाइल्ड राइट्स एंड यू (क्राइ) ने बुधवार से देश के पांच बड़े शहरों कोलकाता, दिल्ली, मुंबई, चेन्नई एवं बेंगलुरु में एक अभियान शुरू किया है. वोट फॉर चाइल्ड राइट्स नामक यह अभियान जल्द ही देश के 23 राज्यों में शुरू किया जायेगा.
क्राइ के क्षेत्रीय निदेशक (पूर्व) अतिंद्रनाथ दास ने बताया कि लोकसभा चुनाव 2014 में होने वाला है. इस देशव्यापी अभियान के तहत हम लोग सभी राजनीतिक दलों के पास जायेंगे और उन्हें अपनी चुनावी घोषणापत्र में बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा एवं उनके समुचित विकास के मुद्दे को शामिल करने का आह्वान करेंगे. इस अभियान के तहत एक हस्ताक्षर अभियान भी चलाया जायेगा, जिसे बाद में राष्ट्रपति को सौंपा जायेगा.
श्री दास ने बताया कि आजादी के 67 साल गुजरने के बावजूद आज भी बाल श्रमिकों की संख्या 11.8 प्रतिशत है. बच्चों के खिलाफ अपराध में 24 प्रतिशत का इजाफा हुआ है. लिंग अनुपात घट कर 914 तक जा पहुंचा है. कुल आबादी का 34 प्रतिशत होने के बावजूद बजट में बच्चों के लिए केवल 3.9 प्रतिशत मंजूर किया जाता है. जो काफी कम है. पश्चिम बंगाल में बच्चों की तस्करी की स्थिति खतरनाक रुप धारण कर चुकी है.
इस स्थिति को बदलने के लिए राजनीतिक सोच की जरूरत है. आम चुनाव सामने है. ऐसे में हम लोग इस अभियान के द्वारा राजनीतिक दलों पर बच्चों के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित बनाने के लिए दबाव डालेंगे.
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