गिरफ्त में पटना का गिरोह
आसनसोल: कोयला कंपनी के शीर्षस्थ अधिकारी के मोबाइल फोन के सीम की क्लोनिंग कर कंपनी के एक निदेशक व शीर्षस्थ अधिकारी के तकनाकी सचिव से दो-दो लाख रुपये की मांग करनेवाले गिरोह तक आसनसोल पुलिस संभवत: शीघ्र पहुंच जायेगी. अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त (वेस्ट) सुब्रत गांगुली ने कहा कि पुलिस अधिकारियों की टीम इस संबंध में […]
आसनसोल: कोयला कंपनी के शीर्षस्थ अधिकारी के मोबाइल फोन के सीम की क्लोनिंग कर कंपनी के एक निदेशक व शीर्षस्थ अधिकारी के तकनाकी सचिव से दो-दो लाख रुपये की मांग करनेवाले गिरोह तक आसनसोल पुलिस संभवत: शीघ्र पहुंच जायेगी. अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त (वेस्ट) सुब्रत गांगुली ने कहा कि पुलिस अधिकारियों की टीम इस संबंध में पटना पुलिस के संपर्क में है. यदि गिरोह की संलिप्तता के प्रमाण मिले, तो पकड़ेगये अपराधियों को ट्रांजिट रिमांड पर आसनसोल लाया जायेगा.
क्या है मामला
कोयला कंपनी के शीर्षस्थ अधिकारी के मोबाइल फोन से 20 दिन पहले कंपनी के एक निदेशक तथा शीर्षस्थ अधिकारी के तकनीकी सचिव के मोबाइल फोन पर कॉल किया गया. दोनों अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि वे तत्काल दो-दो लाख रुपये उनके बताये खाता नंबर में जमा करा दें. कॉलर ने राशि जमा नहीं करने पर बुरे अंजाम की भी धमकी दी. शायद कॉलर को यह पता नहीं था कि दोनों अधिकारी रोजाना शीर्षस्थ अधिकारी के जीवंत संपर्क में रहते हैं. कॉल के बाद ही तीनों अधिकारियों के बीच इस पर चर्चा हुई. इसके बाद इसकी शिकायत स्थानीय थाने में दर्ज करा दी गयी. स्थानीय पुलिस अधिकारियों के लिए यह समझ से परे था कि आखिरकार जब शीर्षस्थ अधिकारी ने कॉल नहीं किया, तो उनका नंबर दोनों अधिकारियों के मोबाइल फोन पर कैसे आया?
उलझ गयी पुलिस जांचएडीसीपी (वेस्ट) श्री गांगुली ने बताया कि शिकायत मिलने के बाद इसकी जांच की गयी. इस संबंध में भारत संचार निगम लिमिटेड (बीएसएनएल) के वरीय अधिकारियों से संपर्क किया गया, लेकिन उन्होंने भी स्पष्ट कहा कि इस नंबर का उपयोग दूसरा कोई नहीं कर सकता है. जब इस कॉल की जांच की गयी, तो पाया गया कि उक्त दोनों कॉल पटना से किये गये हैं. इस मामले में तकनीकी जानकारी अधिक न होने के कारण जांच आगे नहीं बढ़ पा रही थी.
पटना में पक ड़ा गया गिरोह
पटना सचिवालय थाना पुलिस ने इसी तरह की ठगी के मामले में महिला समेत चार अपराधियों को दबोचा है. गिरोह ने आगरा (उत्तर प्रदेश) के आयुक्त के मोबाइल फोन के सीम का क्लोनिंग तैयार कर खैरागढ़ के अतिरिक्त जिलाशासक से 80 हजार तथा सहरसा (बिहार) के आयुक्त के मोबाइल फोन के सीम का क्लोनिंग कर निर्मली ब्लॉक के अंचलाधिकारी (सीओ) से 50 हजार की वसूली कर ली. इन दो अधिकारियों ने बताये खाते में राशि जमा कर दी. बाद में दोनों कॉल फर्जी पाये गये. इसके बाद उन दोनों की शिकायत पर जांच शुरू हुई और राशि जमा होनेवाला खाता (संख्या 32039288779) पटना निवासी अर्चना देवी का पाया गया.
पक ड़ेगये दो, सरगना फरार
पटना सचिवालय थाना पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर अर्चना देवी तथा उसके पुत्र अमित को धर दबोचा. उनकी निशानदेही पर गिरोह के दो सदस्य आशीष कुमार व गिरिजा प्रसाद को भी दबोचा गया. अर्चना ने स्वीकार किया कि उसने एक हजार रुपये की लालच में अपने बैंक खाते के उपयोग पर सहमति जतायी थी. गिरोह का सरगना फरार बताया गया है. सभी आरोपी पटना के निवासी हैं.
बिहार पुलिस से संपर्क
एडीसीपी (वेस्ट) श्री गांगुली ने कहा कि पटना पुलिस से संपर्क किया जा रहा है. यदि इस गिरोह की यहां के मामले में संलिप्तता के साक्ष्य मिले तो उन्हें ट्रांजिट रिमांड पर लाकर पूछताछ की जायेगी तथा उचित कार्रवाई की जायेगी. जांच अधिकारी इस कार्य में सक्रिय हैं.
ऐसे होती है क्लोनिंग
सूत्रों की माने तो मोबाइल फोन सीम की क्लोनिंग दो तरह से होती है.
1. किसी भी मोबाइल फोन सिम में दो तरह के सुरक्षा चक्र होते हैं-‘के आइ कोड’ और यूनिक नंबर. अगर इन दोनों को दूसरे सिम में डाल दिया जाये, तो सिम का क्लोन तैयार हो सकता है. इसकी कठिनाई यह है कि इसमें सर्विस प्रोवाइडर की संलिप्तता कहीं-न- कहीं से होगी. क्योंकि वही मोबाइल सिम को एक्टिवेट या डीएक्टिवेट करता है. अगर दो सिम गलती से भी एक्टिवेट हो गये हैं, तो इसकी जानकारी सर्विस प्रोवाइडर को हो जाती है. 2002 के पहले सिम की क्लोनिंग आसान थी, क्योंकि उसकी कॉपी करने के बाद दूसरा सिम तैयार हो जाता था. लेकिन, सभी कंपनियों ने नये टाइप का सिम लांच कर दिया. इसकी कॉपी करने पर वह काम नहीं करता है. 2. इंटरनेट पर ऐसे एप्लीकेशन उपलब्ध हैं, जिन्हें डाउनलोड कर आसानी से किसी के नंबर से बात की जा सकती है. यह एप्लीकेशन कोई भी जानकार अपने मोबाइल या लैपटॉप में आसानी से रख सकता है और इंटरनेट के माध्यम से बात कर सकता है.
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