43% युवा दंपती में प्रजनन क्षमता नहीं
कोलकाता: 31 से 40 वर्ष की उम्र के 43 फीसदी दंपती बांझपन की समस्या से जूझ रहे हैं. इनमें प्रजनन झमता का अभाव है. एक सर्वेक्षण रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है. सर्वे में यह भी सामने आया है कि बांझपन की समस्या से जूझ रहे 63 प्रतिशत दंपतियों ने इलाज के लिए परामर्श लिया. […]
कोलकाता: 31 से 40 वर्ष की उम्र के 43 फीसदी दंपती बांझपन की समस्या से जूझ रहे हैं. इनमें प्रजनन झमता का अभाव है. एक सर्वेक्षण रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है. सर्वे में यह भी सामने आया है कि बांझपन की समस्या से जूझ रहे 63 प्रतिशत दंपतियों ने इलाज के लिए परामर्श लिया.
विशेषज्ञों की राय
मर्क सरोनो के सहयोग से इंडियन सोसाइटी फार एस्सिड रिप्रोडक्शन ( आइएसएआर) द एशिया पेसिफिक ऑन रिप्रोडक्शन ने पहली बार भारत में हेलपिंग फैमिलीज नाम से प्रजनन क्षमता पर सर्वे किया गया. इसमें 2562 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया. कोलकाता, दिल्ली, मुंबई समेत देश के नौ शहरों में कराये गये इस सर्वे के आंकड़ों का 100 इंफर्टिलिटी विशेषज्ञों ने विश्लेषण किया है. डॉ रोहित गुटगुटिया का कहना है कि सर्वे के अनुसार, दिल्ली के 31 से 40 साल की उम्र के तकरीबन 43 प्रतिशत दंपती बांझपन की समस्या से जूझ रहे हैं.
इनमें तकरीबन 30 फीसदी ने आइवीएफ ( इन विट्रो फर्टिलाइजेशन) तकनीक को अपनाया और बाकी दंपती इस तकनीक को अपनाने की सोच रहे हैं. 69 प्रतिशत ने इलाज के फायदों को स्वीकार किया है और आइवीएफ जैसे इलाज को सुरिक्षत माना है. इस तकनीक के जरिये दंपतियों ने स्वस्थ बच्चों को जन्म दिया है. इंफर्टिलिटी विशेषज्ञों ने बताया कि 31 से 40 साल की उम्र के 63 प्रतिशत दंपती ने बांझपन के इलाज का परामर्श लिया है.
41 प्रतिशत पुरुषों में इंफर्टिलिटी की समस्या खराब स्पर्म कांउट की वजह से होती है. महिलाओं में 40 प्रतिशत बांझपन की समस्या पोली सायटिक ओवेरियन डिसआर्डर ( पीसीओडी) से होती है. मर्क सरोनो इंडिया के जनरल मैनेजर और कंट्री हेड लारेंस गंथी का कहना है कि भारत एक विशाल और विविधाओं से भरा देश है. बदलती व अस्वस्थ जीवनशैली, स्वास्थ्य से जुड़े दूसरे कारणों और देर से शादी की वजह से दपंती बांझपन की समस्या से जूझ रहे हैं. सही समय और सही विशेषज्ञ से परामर्श लेने पर दपंती के पास कई विकल्प मौजूद होते हैं. संतान प्राप्ति की उम्मीद रहती है.
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