साइबर अपराधियों के अकाउंट हो जायेंगे फ्रीज
Updated at : 26 Oct 2019 1:42 AM (IST)
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कोलकाता पुलिस के कई अधिकारियों को दिया जा रहा प्रशिक्षण कोलकाता : देश में तेजी से बढ़ रहे बैंक फ्रॉड, एटीएम फ्रॉड जैसे साइबर अपराधों को देखते हुए केंद्र सरकार ने एक योजना के तहत काम शुरू किया गया है, जिसका नाम ‘साइबर सेफ इंडिया’ है. केंद्र सरकार ‘साइबर सेफ इंडिया’ नामक एक प्रोजेक्ट को […]
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कोलकाता पुलिस के कई अधिकारियों को दिया जा रहा प्रशिक्षण
कोलकाता : देश में तेजी से बढ़ रहे बैंक फ्रॉड, एटीएम फ्रॉड जैसे साइबर अपराधों को देखते हुए केंद्र सरकार ने एक योजना के तहत काम शुरू किया गया है, जिसका नाम ‘साइबर सेफ इंडिया’ है. केंद्र सरकार ‘साइबर सेफ इंडिया’ नामक एक प्रोजेक्ट को ला रही है. इससे बैंक फ्रॉड और एटीएम फ्रॉड से जुड़े मामलों पर तुरंत लगाम लगेगा और ऐसी घटनाओं में पीड़ित के रुपये भी तुरंत रिकवर हो जायेंगे.
इसके लिए केंद्र सरकार स्वयंसेवी संस्था के साथ मिलकर इस योजना पर काम कर रही है. इसके तहत देश के सभी राज्य की पुलिस, कमिश्नरेट, इंटरपोल, सीबीआई और सीआईडी जैसी जांच एजेंसियों को एक छत के नीचे लाया जा रहा है. कैसे इन फ्रॉड की घटनाओं में तुरंत काम होंगे, किस विधि से क्या-क्या करना होगा. इन सबके बारे में पुलिस अधिकारियों को प्रशिक्षु बनाने के लिए ट्रैनिंग भी शुरू हो गयी है, जिसमें कोलकाता पुलिस के कई साइबर सेल के अधिकारियों को भी ट्रैनिंग दी जा रही है.
इस योजना के शुरू होते ही बैंक फ्रॉड जैसे मामलों में तुरंत लगाम लग जायेगा. इसमें मूल रूप से ग्राहकों को फोन कर बैंक अधिकारी कहकर अथवा उन्हें गुमराह कर उनके अकाउंट नंबर, पासवर्ड, सीवीसी नंबर और ओटीपी समेत सारे डिटेल्स लेकर अकाउंट से पैसे उड़ाने वाले मामलों में शिकायत मिलते ही चंद मिनटों में ही एक्शन सफल होगा.
मिनटों में कैसे होंगे सारे अकाउंट फ्रीज
संयुक्त पुलिस आयुक्त (अपराध) मुरलीधर शर्मा ने बताया कि खासकर लोगों को जिस नम्बर से ठग गिरोह फोन कर सारे डिटेल्स लेते है, उस नंबर को शिकायतकर्ता पुलिस के पास देंगे और पुलिस उस नंबर को इस साइबर सेफ योजना के तहत पुलिस अधिकारी उक्त नंबर को एक साइट पर डालेंगे और फिर तुरंत उस नंबर से जुड़े सारे अकाउंट और वैलेट समेत अन्य एप्प (जिसके जरिए पैसा दूसरे अकाउंटों में ट्रांसफर होते है) जैसे सारे के सारे अधिक से अधिक दस मिनट के अंदर ही तुरंत फ्रीज हो जायेंगे, ताकि ठग गिरोह किसी भी माध्यम से उक्त पीड़ित व्यक्ति के अकाउंट से गायब किये रुपये को अपने अकाउंट, वैलेट या किसी एप्प पर लेकर किसी दूसरे को भी नहीं भेज पायेंगे और ना ही निकाल पायेंगे. फिर अकाउंट फ्रीज होते ही पुलिस उन अकाउंट से आगे की कार्रवाई करते हुए रुपये भी रिकवर कर लेगी और उक्त अकाउंट के जरिए अपराधी के बारे में भी पता चल जायेगा और वे गिरफ्त में होंगे.
अक्सर होती है इस तरह से ठगी
पुलिस का कहना है कि फोन करके खुद को बैंक मैनेजर बताकर कहते है आपका अकाउंट बंद हो जायेंगा, एटीएम बंद हो जायेंगे, तो कई बार किसी प्राइज, विनर होने, लकी ड्रा में सलेक्शन होने, तो कभीं मैसेज के जरिए भी ऐसे उपहार का झांसा देकर अकाउंट नंबर, पीन, पासवर्ड और ओटीपी बताने को कहकर अकाउंट से रुपये निकाल लेते है. महानगर समेत अधिकांश जगहों पर इस तरह के साइबर अपराध बढ़ गये हैं, जिसे देखते हुए ही इस योजना के तहत काम शुरू किया गया है.
नोडल ऑफिसर हैं डीसी साइबर क्राइम
संयुक्त पुलिस आयुक्त (अपराध) मुरलीधर शर्मा ने बताया कि इस योजना में नोडल ऑफिसर कोलकाता पुलिस की डीसी साइबर है. कोलकाता पुलिस के साइबर के कई पुलिस अधिकारी फिलहाल इस योजना के तहत होनेवाले सारे कार्यों की ट्रेनिंग ले रहे हैं.
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