बर्मा टीक की तस्करी के लिए सिलीगुड़ी रूट का इस्तेमाल

By Prabhat Khabar Digital Desk
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अभियान चलाकर वन विभाग ने पायी कई सफलताएं

वन अधिकारियों को तस्करों से मिलने लगी है धमकी
सिलीगुड़ी : दुनिया की बेहतरीन लकड़ियों में शामिल है बर्मा टीक. इसकी भारत के विभिन्न इलाकों में तस्करी के लिए सिलीगुड़ी को कॉरिडोर बनाया गया है. बीते छह महीनों में कई करोड़ की बर्मा टीक की लकड़ी वन विभाग ने जब्त की है. वन विभाग के अभियान में कई ट्रकों के साथ आरोपियों की भी गिरफ्तारी हुई है. बीते चार दिनों में ही चार करोड़ से अधिक की बर्मा टीक की लकड़ी जब्त की गयी है. म्यांमार (बर्मा) से सिलीगुड़ी के रास्ते लकड़ी की तस्करी पर वन विभाग ने निगरानी बढ़ायी है. इसके लिए उन्हें तस्कर गिरोह से धमकी भी मिलने लगी है.
वन विभाग सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार म्यांमार से सागवान की लकड़ी को नगालैंड के दीमापुर तक पहुंचाया जाता है. वहां से लकड़ी को ट्रक में लादकर असम से कूचबिहार होकर सिलीगुड़ी के रास्ते कोलकाता, बिहार, उत्तर प्रदेश, बेंगलुरू व देश के विभिन्न हिस्सों में तस्करी की जाती है. इसके अतिरिक्त कोलकाता व कुछ अन्य बंदरगाहों से जलमार्ग से बर्मा टीक की विदेशों में तस्करी की जानकारी वन विभाग को मिली है.
उत्तर बंगाल वन विभाग के स्पेशल टास्क फोर्स प्रमुख संजय दत्त ने बताया कि म्यांमार के जंगलों में सागवान काफी मात्रा में है. अधिक मुनाफा कमाने के लिए देश के विभिन्न हिस्सों के लकड़ी व्यापारी इसकी तस्करी को बढ़ावा दे रहे हैं. वन विभाग सिलीगुड़ी डिवीजन के डीएफओ (सोशल फॉरेस्ट्री) डीएस शेरपा ने बताया कि तस्करी की जा रही लकड़ी लदे ट्रक जब्त करने पर वन विभाग के कर्मचारियों व अधिकारियों को धमकी मिलने लगी है. लेकिन इससे डरने वाले नहीं हैं. तस्करी रोकने के निर्णय पर हम अटल हैं. उन्होंने आगे कहा कि भले ही यह लकड़ी म्यांमार के जंगलों की हो, लेकिन पर्यावरण को बचाना जरूरी है.
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