खाद्य सुरक्षा के लिए सही कानून नहीं बना पाया केंद्र

कोलकाता: राज्य में खाद्य सुरक्षा कानून नहीं लागू होने के लिए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार को ही जिम्मेदार ठहराया. सोमवार को महानगर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि खाद्य सुरक्षा कानून के नियम व फंड के वितरण के संबंध में केंद्र सरकार ने कुछ स्पष्ट नहीं किया है. […]
कोलकाता: राज्य में खाद्य सुरक्षा कानून नहीं लागू होने के लिए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार को ही जिम्मेदार ठहराया. सोमवार को महानगर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि खाद्य सुरक्षा कानून के नियम व फंड के वितरण के संबंध में केंद्र सरकार ने कुछ स्पष्ट नहीं किया है.
किस प्रकार से इसे लागू किया जायेगा और कैसे इसके लिए राज्य सरकार को फंड मिलेगा, इसका नियम केंद्र सरकार सही प्रकार से तैयार नहीं कर पायी है. उन्होंने दावा किया कि अगर यह कानून यहां लागू होता है, तो राज्य के 3.2 करोड़ लोगों को दो रुपये प्रति किलो की दर से चावल मिलेगा, लेकिन केंद्र सरकार भी अब तक इसे संपूर्ण रूप से लागू नहीं कर पायी है, क्योंकि खाद्य सुरक्षा के बने नियम अधूरे हैं. इस योजना के लिए फंड कहां से आयेगा, इसकी जानकारी ही नहीं दी गयी है. गौरतलब है कि शनिवार को केंद्रीय खाद्य व सार्वजनिक वितरण विभाग के मंत्री राम विलास पासवान महानगर के दौरे पर आये थे और उन्होंने राज्य सरकार के उस आवेदन को खारिज कर दिया था, जिसमें राज्य सरकार ने खाद्य सुरक्षा कानून को लागू करने के लिए छह महीने का समय मांगा था. केंद्र सरकार ने इसके लिए मात्र तीन महीने का ही समय दिया है.
‘कन्याश्री’ योजना को मिली अंतरराष्ट्रीय पहचान
महिला विकास एवं सामाजिक कल्याण मंत्री शशि पांजा ने आज विधानसभा में कहा कि बालिकाओं के हित में ममता बनर्जी सरकार द्वारा शुरू की गयी ‘कन्याश्री’ योजना को ब्रिटेन में पहचान मिली है. इस योजना को लंदन में 22 जुलाई को आयोजित होने वाले बालिका शिखर सम्मेलन में केस स्टडी के रूप में पेश करने को कहा गया है. इस योजना में प्रावधान किया गया है कि अगर कोई लड़की 18 साल तक पढ़ाई जारी रखती है तो उसे 25 हजार रुपये का एकमुश्त अनुदान उसके बैंक खाते में जमा किया जायेगा बशर्ते वह अविवाहित हो. सरकार 13 से 18 साल की लड़कियों (आठवीं से 12वीं कक्षा तक) को 500 रुपये की सालाना छात्रवृत्ति भी मुहैया करायेगी.
बशर्ते लड़की अविवाहित हो और उसके माता पिता की सालाना आमदनी 1.20 लाख रुपये से कम हो. साथ ही उन केंद्रों में जहां बेसहारा, वंचित महिलाओं और लड़कियों को शरण दी जाती है, सरकार ने सीसीटीवी लगाये हैं और कर्मचारियों को पैनलों की निगरानी के लिए प्रशिक्षण दिया जा रहा है. ऐसे 12 केंद्रों में सीसीटीवी लगाये गये हैं. उन्होंने बताया कि आइसीडीएस के लिए 141 प्रोजेक्शन कमेटी के गठन की प्रक्रिया पूरी हो गयी है. उन्होंने बताया कि 319 नये आंगनबाड़ी केंद्र बनाये जा रहे हैं.
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