झुकीं ममता, माना आयोग का फैसला

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कोलकाता/दुर्गापुर/नयी दिल्ली: मंगलवार को तेजी से बदले घटनाक्रम के बाद मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी नरम पड़ीं और पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों के तबादले के चुनाव आयोग के आदेश का पालन करने की घोषणा की. हालांकि उन्होंने कहा कि आयोग के निर्देश पर इन अधिकारियों को भले ही उनके पद से हटाया जा […]

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कोलकाता/दुर्गापुर/नयी दिल्ली: मंगलवार को तेजी से बदले घटनाक्रम के बाद मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी नरम पड़ीं और पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों के तबादले के चुनाव आयोग के आदेश का पालन करने की घोषणा की.

हालांकि उन्होंने कहा कि आयोग के निर्देश पर इन अधिकारियों को भले ही उनके पद से हटाया जा रहा है, लेकिन इन्हें राज्य सरकार सम्मान के साथ उच्च पदों पर नियुक्त करेगी. वह यहां के आइपीएस व आइएएस अधिकारियों का सम्मान करती हैं, जो राज्य में कानून-व्यवस्था को बेहतर रखने के लिए काम कर रहे हैं.

चुनाव के बाद इन अधिकारियों को पुन: उनके पूर्व के स्थान पर बहाल किया जायेगा. इससे पहले चुनाव आयोग ने राज्य सरकार के तबादले पर पुनर्विचार के आग्रह को खारिज करते हुए बुधवार सुबह दस बजे तक एक जिला मजिस्ट्रेट, दो अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट और पांच पुलिस अधीक्षकों को स्थानांतरित करने का अल्टीमेटम दिया था. उधर, आयोग के कड़े रुख के बाद मंगलवार शाम मुख्य सचिव संजय मित्र ने राज्य सचिवालय ‘नवान्न भवन’ में गृह सचिव समेत वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की. सूत्रों के अनुसार, बैठक में तय किया गया है कि आयोग के आदेश का पालन करना होगा.

मुख्य सचिव ने मुख्यमंत्री को एक सूचना भेज दी कि चुनाव आयोग का फैसला मान लेना ही बेहतर होगा. उस समय ममता चुनाव प्रचार में व्यस्त थीं. रात साढ़े आठ बजे के करीब दुर्गापुर में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर उन्होंने आयोग का फैसला मान लेने की बात कही. हालांकि चुनाव आयोग के रुख पर उन्होंने नाराजगी भी जतायी.

क्या है मामला
गौरतलब है कि सोमवार को विवाद उस समय शुरू हुआ जब चुनाव आयोग ने मुख्य सचिव को पत्र भेज कर उत्तर 24 परगना के डीएम, दो अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट और मालदा, मुर्शिदाबाद, बर्दवान, पश्चिम मिदनापुर और झाड़ग्राम के पुलिस अधीक्षकों के तबादले का आदेश दिया और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इससे मानने से इनकार कर दिया. उन्होंने कहा था कि किसी अधिकारी का स्थानांतरण नहीं होगा. चुनाव आयोग की पूर्ण पीठ ने रविवार को कोलकाता में बैठक कर चुनाव तैयारियों का जायजा लिया था. इस दौरान विपक्षी दलों ने कुछ पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ पक्षपात करने की शिकायत की थी. इससे पहले मंगलवार सुबह मुख्य सचिव ने चुनाव आयोग को पत्र लिखकर अधिकारियों के तबादला आदेश पर पुनर्विचार करने का अनुरोध किया था. चुनाव आयोग के सूत्रों ने मुख्य सचिव के अनुरोध पर कहा, ‘हमने उनके अनुरोध पर गौर किया और इस बात को दोहराया कि सात अप्रैल के हमारे आदेश का बुधवार सुबह दस बजे तक अनुपालन होना चाहिए.’

चुनाव आयोग का अपमान नहीं करना चाहती: ममता
मुख्यमंत्री ने कहा कि वह चुनाव आयोग का अपना नहीं करना चाहतीं. जिन अधिकारियों का तबादला आदेश जारी किया गया है, उन्हें नये पदों पर भेजा जायेगा. उनकी मंशा चुनाव आयोग को अपमानित करने का नहीं है. चुनाव आयोग के नियमों का पालन होगा. लेकिन आम चुनाव बाद उनलोगों (अधिकारियों) की पोस्टिंग पुन: पूर्व स्थान पर कर दी जायेगी. उन्होंने कहा कि तबादला किये गये अधिकारियों में से कई ने काफी बेहतर काम किया है तथा उनके तबादले से काफी परेशानी हो सकती है. चुनाव आयोग के निर्देश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती नहीं दी जा सकती.

एक जिला (बर्दवान) में एक से अधिक चरणों में मतदान की घोषणा की गयी है. उन्होंने कहा कि विधि व्यवस्था बिगड़ने पर राज्य सरकार पर सारा दायित्व आ जाता है. उन अधिकारियों के तबादले के बाद क्या चुनाव आयोग इसकी जिम्मेदारी लेगा? बनर्जी ने कहा कि राज्य में कांग्रेस, माकपा व भाजपा एकजुट हो गयी है. तृणमूल की सभा में लाल झंडा लेकर कोई प्रवेश कर जाता है. इस पर चुनाव आयोग कोई कार्रवाई क्यों नहीं करता. राज्य में आइएएस व आइपीएस अधिकारियों की भारी कमी है. जिसे लेकर राज्य में पहले से ही काफी परेशानी है. उन्होंने फिर कहा कि इन अधिकारियों का तबादला राजनीतिक साजिश है. इसके पीछे राजनीतिक पार्टियां सक्रिय हैं. भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी के राज्य में इस तरह के निर्णय नहीं लिये जा रहे हैं. लेकिन जनता सब कुछ देख रही है. चुनाव परिणाम के दिन इन पार्टियों को जमीनी सच्चाई का पता लग जायेगा.

ऐसे बदले बयान
सोमवार को
चुनाव आयोग के आदेश पर ममता बनर्जी ने कहा कि जब तक वह मुख्यमंत्री हैं. तब तक किसी अधिकारी को स्थानांतरित नहीं किया जायेगा. आयोग चाहे तो कार्रवाई कर सकता है. इसके लिए वे गिरफ्तार होने और जेल जाने तक को तैयार हैं.

मंगलवार को दिन में
मैं जानती हूं कि संविधान क्या है. इसका पालन करती हूं. लेकिन किसी को भी बंगाल का अपमान करने का अधिकार नहीं है. मैं सभी को सम्मान देती हूं.

..और देर शाम
आयोग के निर्देश के मुताबिक मैं पांच अधिकारियों की नियुक्ति करूंगी. यह मेरे लिए अच्छा होगा. सभी अधिकारियों से मेरे अच्छे संबंध हैं. आयोग का सम्मान करती हूं, लेकिन वे राजनीतिक खेल कर रहे हैं. यह उनका राजनीतिक प्रतिशोध है.

किसने क्या कहा

चुनाव आयोग बिल्कुल सही है. मुख्यमंत्री ने जो कहा है कि वह उनके अधिकार क्षेत्र से बाहर की बात है. अगर कोई संवैधानिक संकट खड़ा होता है तो इसके लिए मुख्यमंत्री जिम्मेदार होंगी.

बिमान बोस , माकपा

मेरा मानना है कि ममता बनर्जी को तुरंत गिरफ्तार कर जेल भेज देना चाहिए. क्या यह मजाक है कि उन्हें जो मन में आये बोल दें. संवैधानिक नियमों का मजाक उड़ाएं.

अधीर चौधरी ,अध्यक्ष, पीसीसी

ममता अराजकता का एक विस्तारित रूप हैं. उन्होंने जो टिप्पणियां की हैं उससे साबित होता है कि वह लोकतंत्र में विश्वास नहीं करतीं. वह संवैधानिक नियमों को तोड़ने की कोशिश कर रही हैं.

सिद्धार्थनाथ सिंह , भाजपा

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