चाइना टाउन निवासियों को चुनाव से उम्मीद नहीं
राजनीतिक दलों से असंतुष्ट सुध-बुध नहीं लेने का आरोप कोलकाता : नरेंद्र मोदी हों या फिर कांग्रेस, समाजवादी पार्टी हो या फिर जनतादल (यूनाइटेड), सभी दल लोगों को इस इस आम चुनाव के बाद एक नये भारत के निर्माण का सपना दिखा रहे हैं. उनके सपने पर लोग कितना भरोस करते हैं, इसका पता तो […]
राजनीतिक दलों से असंतुष्ट
सुध-बुध नहीं लेने का आरोप
कोलकाता : नरेंद्र मोदी हों या फिर कांग्रेस, समाजवादी पार्टी हो या फिर जनतादल (यूनाइटेड), सभी दल लोगों को इस इस आम चुनाव के बाद एक नये भारत के निर्माण का सपना दिखा रहे हैं. उनके सपने पर लोग कितना भरोस करते हैं, इसका पता तो 16 मई को चल जायेगा, पर भारत में स्थित एकमात्र चाइना टाउन के लोगों को इस वादे पर जरा भी यकीन नहीं है.
नेताओं के वादे नहीं निभाने की भारतीय परंपरा के कारण महानगर में रहने वाले चीनी समुदाय के लोगों को चुनाव के बाद किसी भी प्रकार के बदलाव की कोई उम्मीद नहीं है. चीन के साथ मिट्टी का रिश्ता होने के बावजूद इन्हें अपने भारतीय नागरिक होने का गर्व है. पर दशकों से प्रशासन से किसी प्रकार का सहयोग नहीं मिलने के कारण इनके मन में असंतोष भी है. चाइना टाउन में रेस्टुरेंट चलाने वाली मारग्रेट ली ने कहा कि हमें कुछ भी बदलता हुआ नहीं दिख रहा है. हम लोग टैक्स देते हैं, हमारे पास एक भारतीय के तौर पर सभी प्रकार के कागजात है.
हर बार हम लोग वोट करते है. पर नेता कभी भी यह देखने नहीं आते हैं कि हमें किस चीज की जरूरत है. मारगेट्र ने बताया कि सात-आठ वर्ष पहले एक बार ममता बनर्जी अपने समर्थकों के साथ चाइना टाउन आयीं थीं. बस, उसके बाद से किसी ने हमारी परवाह नहीं की है. चीनी समुदाय में आज भी संयुक्त परिवार का प्रचलन जारी है. परिवार के सभी सदस्य महीने में एक बार जरूर इकट्ठा बैठते और विभिन्न मुद्दों पर चर्चा करते हैं. कोलकाता एक अहम हिस्सा होने के बावजूद चाइना टाउन आज भी निकासी, जल सप्लाई, सड़क की मरम्मत, स्ट्रीट लाइट की कमी जैसी समस्याओं से जूझ रहा है. चाइना टाउन की सड़कें आज भी टूटी-फूटी हुई हैं.
इलाके में स्ट्रीट लाइट की संख्या इतनी कम है कि शाम होने के बाद अक्सर अंधेरा छाया रहता है. निकासी व्यवस्था की स्थिति यह है कि थोड़ी सी बारिश होते ही घुटने भर पानी जम जाता है.
मारग्रेट ने आरोप लगाया कि राज्य में सरकार चाहे किसी की भी हो, हमें किसी भी तरह की सरकारी सहायता नहीं मिलती है. सड़कों की मरम्मत पर हमें अपने पैसे खर्च करने पड़ते हैं. कहने के लिए हमारे इलाके में भी एक पार्षद है, पर इलाके में काम के लिए हमें ही पैसे खर्च क रने पड़ते हैं. एक अन्य रेस्टुरेंट के युवा मालिक ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि अब हमें भी किसी की परवाह नहीं रह गयी है. हम वोट करें या नहीं, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है. इंडियन चाइनीज एसोसिएशन के अध्यक्ष पॉल चुंग का कहना है कि चीनी समुदाय के लोग स्वतंत्र हैं और आमतौर पर मदद के लिए सरकार के सामने हाथ फैलाना पसंद नहीं करते हैं. सॉल्ट लेक इलाके में रेस्टुरेंट चलाने वाले जेम्स येह का कहना है कि पिछले तीन दशक में काफी कुछ बदल गया है.
भारत में मोहभंग होने के कारण चीनी युवा अब अच्छे भविष्य के लिए विदेशों का रुख कर रहे हैं. जेम्स ने बताया कि भारत के अन्य समुदाय की तरह हम लोग भी एक स्थायी सरकार चाहते हैं. अन्य नागरिकों की तरह हम भी महंगाई व भ्रष्टाचार की समस्या से प्रभावित हैं. भारतीय राजनीति में होने वाले घटनाक्रमों पर हमारी नजर है. जेम्स ने कहा कि जब हमारे पूर्वज भारत आये थे तो चीन की तुलना में यहां अधिक शांति देख कर उन्हें अच्छा लगा था. अब हमारे बच्चों को विदेशों में अपना भविष्य अधिक सुरक्षित दिखायी दे रहा है.
कभी इस शहर में लगभग 20 हजार चीनी समुदाय के लोग रहा करते थे, अब उनकी संख्या लगभग दो हजार के करीब रह गयी है. चीनी लोग रेस्टुरेंट, सैलुन, चमड़ा, फर्नीचर इत्यादि के काम में अधिक नजर आते हैं.
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