यूपी की सियासत में जेन-जी वोटर्स पर नजर, प्रदेश के 99 सीटों पर था जीत-हार का अंतर 10 हजार से कम

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यूपी विधानसभा चुनाव 2027

UP Politics 2027: यूपी विधानसभा चुनाव से पहले उत्तर प्रदेश की सभी राजनीतिक पार्टियां युवा वोटरों पर अपनी नजरें गड़ाए हुए हैं. कई सीटों पर जीत-हार का अंतर बदलने की क्षमता रखने वाले इस युवा वोट बैंक को साधने के लिए पार्टियां युवा उद्यमिता, रोजगार और सरकारी नौकरियों जैसे मुद्दों पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं.

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लखनऊ: यूपी की सियासत में जेन-जी वोटर्स पर नजर है. 2027 विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक दलों की निगाहें उस युवा वोट बैंक पर टिक गई हैं, जो कई सीटों पर जीत-हार का अंतर बदलने की ताकत रखता है. पिछले विधानसभा चुनाव में प्रदेश की 99 सीटों पर जीत और हार का अंतर 10 हजार से कम रहा था. ऐसे में युवाओं के एक छोटे हिस्से का रुख भी कई सीटों के नतीजे पर असर डाल सकता है. 2027 में करीब 15 फीसदी युवा वोटर निर्णायक भूमिका में आ सकते हैं, इसलिए बीजेपी, सपा, बसपा समेत क्षेत्रीय दल युवाओं के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने में जुटे हैं. रोजगार, सरकारी नौकरी, प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता, पेपर लीक और महंगाई जैसे मुद्दे जेन-जी मतदाताओं के लिए अहम हो सकते हैं.

2027 में जेन-जी तय करेंगे यूपी का सियासी समीकरण?

युवाओं को साधने की कोशिश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार रोजगार और स्वरोजगार पर जोर दे रही है. मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान के तहत 21 से 40 वर्ष के युवाओं को उद्योग और सेवा क्षेत्र में काम शुरू करने के लिए 5 लाख रुपये तक का 100 फीसदी ब्याज मुक्त और बिना गारंटी का ऋण देने की व्यवस्था है. सरकार का लक्ष्य हर साल एक लाख युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ना और 10 साल में 10 लाख युवाओं को अवसर उपलब्ध कराना है. इसके अलावा सरकारी भर्तियों और रोजगार के मुद्दे को भी योगी सरकार लगातार अपनी प्राथमिकताओं में रखती रही है. चुनाव से पहले सरकार के लिए चुनौती यह होगी कि इन योजनाओं और भर्तियों का संदेश युवाओं के उस वर्ग तक कितनी मजबूती से पहुंचे, जो नौकरी के साथ बेहतर भविष्य और आर्थिक स्थिरता चाहता है.

यूपी में 99 सीटों पर बदल सकता है चुनावी गणित

वहीं विपक्ष भी युवाओं के मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने की कोशिश में है. अखिलेश यादव रोजगार, नौकरी और युवाओं से जुड़े सवालों को अपने राजनीतिक एजेंडे में प्रमुखता दे रहे हैं और पीडीए के जरिए युवा वर्ग तक पहुंच बनाने की कोशिश में हैं. बसपा प्रमुख मायावती भी हाल के दिनों में सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए पेपर लीक, बेरोजगारी, शिक्षा व्यवस्था और भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ी जैसे मुद्दे उठा रही हैं. उन्होंने युवाओं की समस्याओं के समाधान और रोजगार के अवसर बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया है. वहीं ओम प्रकाश राजभर और उनके दल की नजर भी युवा और पिछड़े वर्ग के मतदाताओं पर है. ऐसे में 2027 का चुनाव केवल जातीय समीकरणों तक सीमित नहीं रहने वाला, बल्कि रोजगार, नौकरी और भविष्य को लेकर युवाओं की नाराजगी या संतुष्टि भी कई सीटों पर सत्ता का समीकरण बदल सकती है.

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राधेश्याम कुशवाहा

लेखक के बारे में

By राधेश्याम कुशवाहा

राधेश्याम कुशवाहा को पत्रकारिता की क्षेत्र में 13 साल का अनुभव है. इस सफर की शुरुआत उन्होंने राज एक्सप्रेस न्यूज पेपर भोपाल से की. यहां से आगे बढ़ते हुए समय जगत, राजस्थान पत्रिका, हिंदुस्तान न्यूज पेपर के बाद वर्तमान में प्रभात खबर के डिजिटल विभाग में यूपी डेस्क का नेतृत्व कर रहे हैं. इन्हें धर्म-अध्यात्म, ज्योतिष, राजनीति, अपराध और सकारात्मक खबरों की रिपोर्टिंग व लेखन में विशेष रुचि रखते हैं.

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