UP पंचायत चुनाव पर फिर लगा ब्रेक! प्रधान बनने का सपना देख रहे दावेदार मायूस, तारीख पर अब भी सस्पेंस

Updated:
विज्ञापन

सांकेतिक तस्वीर (AI)

UP Politics: उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनावों का इंतजार लंबा होता जा रहा है. आरक्षण, हाईकोर्ट की कार्रवाई और नई मतदाता सूची जैसी प्रक्रियाओं के बीच चुनाव की तारीख पर अब भी सस्पेंस बना हुआ है. जानिए क्या है पूरी स्थिति.

विज्ञापन

UP Politics: उत्तर प्रदेश के गांवों में पंचायत चुनाव का इंतजार अब लंबा होता जा रहा है. प्रधान से लेकर जिला पंचायत सदस्य तक चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे दावेदारों की निगाहें लखनऊ से लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट तक टिकी हैं. सोशल मीडिया पर चुनाव की अलग-अलग तारीखें जरूर तैर रही हैं, लेकिन राज्य निर्वाचन आयोग ने अभी तक मतदान कार्यक्रम की आधिकारिक घोषणा नहीं की है. ऐसे में अगस्त, सितंबर, अक्टूबर या नवंबर में चुनाव होने के दावों पर फिलहाल भरोसा करना जल्दबाजी होगी.

26 मई को खत्म हो चुका है पंचायतों का कार्यकाल

उत्तर प्रदेश की मौजूदा ग्राम पंचायतों का पांच साल का कार्यकाल 26 मई 2026 को समाप्त हो गया. इसके बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि नई पंचायतों का गठन कब होगा. चुनाव में देरी के बीच पंचायतों के संचालन की वैकल्पिक व्यवस्था भी चर्चा में है. कुछ रिपोर्टों में प्रशासकों की नियुक्ति की संभावना जतायी गयी है.

आरक्षण बना सबसे बड़ा पेच

पंचायत चुनाव की प्रक्रिया में ओबीसी आरक्षण महत्वपूर्ण कड़ी है. सरकार ने पंचायत चुनावों के लिए पिछड़ा वर्ग आरक्षण से संबंधित प्रक्रिया आगे बढ़ाने के लिए समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग की व्यवस्था की है. आयोग की रिपोर्ट और उसके आधार पर आरक्षण का निर्धारण चुनावी प्रक्रिया के लिए अहम माना जा रहा है. यही वजह है कि चुनाव की तैयारी के बावजूद अंतिम तस्वीर साफ नहीं हो पा रही है. परिसीमन, आरक्षण और मतदाता सूची जैसी प्रक्रियाओं को पूरा करना जरूरी है. राज्य निर्वाचन आयोग की वेबसाइट पर 2026 की अंतिम पंचायत मतदाता सूची डाउनलोड करने की सुविधा उपलब्ध है, जिससे यह साफ है कि चुनावी तैयारियां प्रशासनिक स्तर पर आगे बढ़ चुकी हैं.

हाईकोर्ट की निगाह में चुनाव में देरी

पंचायत चुनाव में देरी का मामला हाईकोर्ट तक पहुंच चुका है. अदालत ने सरकार से यह जानने की कोशिश की है कि पंचायतों का कार्यकाल खत्म होने से पहले चुनाव क्यों नहीं कराये जा सके. कोर्ट ने चुनाव कराने की समयसीमा और देरी के कारणों पर भी सरकार से रिकॉर्ड मांगे हैं. यही मामला अब चुनाव की अगली राह तय करने में महत्वपूर्ण माना जा रहा है. 19 अगस्त की सुनवाई को लेकर भी राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में खास नजर रही है.

नवंबर तक चुनाव कराने की चर्चा क्यों?

हाईकोर्ट की कार्यवाही से जुड़ी रिपोर्टों में चुनाव कराने की समयसीमा को लेकर नवंबर का जिक्र सामने आया है. लाइव हिंदुस्तान की रिपोर्ट के मुताबिक हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने अधिसूचना की तिथि से छह महीने के भीतर चुनाव कराने की वैधानिक अनिवार्यता पर टिप्पणी की थी और यह अवधि नवंबर में पूरी होने की बात सामने आयी. हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि नवंबर की कोई निश्चित मतदान तारीख घोषित हो चुकी है. चुनाव कार्यक्रम तभी आधिकारिक माना जाएगा जब राज्य निर्वाचन आयोग उसकी विधिवत घोषणा करेगा.

केशव मौर्य के बयान ने बढ़ाई सियासी हलचल

पंचायत चुनाव की टाइमिंग पर डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के बयान ने भी चर्चा तेज कर दी है. उन्होंने संकेत दिया कि विधानसभा चुनाव से पहले ग्रामसभा चुनाव होते नहीं दिख रहे हैं. इसके बाद यह सवाल और बड़ा हो गया है कि सरकार पंचायत चुनाव और आगामी विधानसभा चुनाव के बीच किस तरह का चुनावी कैलेंडर तैयार करती है.

दावेदारों की बेचैनी बढ़ी, गांवों में इंतजार

पंचायत चुनाव की तारीख टलने से सबसे ज्यादा बेचैनी उन संभावित उम्मीदवारों में है, जो महीनों से गांवों में अपनी जमीन तैयार कर रहे हैं. कई दावेदार पहले से ही जनसंपर्क, सामाजिक कार्यक्रमों और गांव की छोटी-बड़ी गतिविधियों में सक्रिय थे. लेकिन चुनाव की अनिश्चितता बढ़ने के साथ उनकी रणनीति भी बदल रही है. चुनावी माहौल पर नजर रखने वाले लोग मानते हैं कि तारीख स्पष्ट होते ही गांवों में राजनीतिक गतिविधियां अचानक तेज हो सकती हैं.

वायरल तारीखों पर न करें भरोसा

इस बीच सोशल मीडिया पर कभी अगस्त, कभी अक्टूबर तो कभी नवंबर में मतदान की तारीखें बतायी जा रही हैं. कुछ पोस्ट में 20, 25 और 30 अगस्त तथा चार सितंबर तक की तारीखें प्रसारित हुईं. वहीं कुछ पोस्ट अक्टूबर-नवंबर में अलग-अलग चरणों में मतदान का दावा कर रही हैं. जांच में इन तारीखों की राज्य निर्वाचन आयोग की आधिकारिक अधिसूचना के रूप में पुष्टि नहीं हुई है.

फिलहाल सबसे अहम बात यही है कि चुनाव की तैयारी जारी है, मतदाता सूची उपलब्ध है, आरक्षण की प्रक्रिया महत्वपूर्ण चरण में है और मामला हाईकोर्ट में है, लेकिन मतदान की अंतिम तारीख का इंतजार अभी खत्म नहीं हुआ है. अब निगाहें सरकार, राज्य निर्वाचन आयोग और अदालत की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं.

यह भी पढ़ें: बलिया में बसपा विधायक उमाशंकर सिंह की तेरही में पहुंचे भोजपुरी के दिग्गज, पवन सिंह और रवि किशन ने दी श्रद्धांजलि


विज्ञापन
तिलक कुमार

लेखक के बारे में

By तिलक कुमार

तिलक कुमार पिछले 14 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. उन्हें प्रिंट और डिजिटल मीडिया में रिपोर्टिंग का व्यापक अनुभव है. अमर उजाला, प्रभात खबर, जनसंदेश टाइम्स और राष्ट्रीय सहारा जैसे प्रतिष्ठित समाचार संस्थानों में क्राइम रिपोर्टर के रूप में कार्य कर चुके हैं. अपराध, राजनीति और हाइपरलोकल पत्रकारिता उनकी विशेष रुचि और विशेषज्ञता के क्षेत्र हैं. मैदानी रिपोर्टिंग के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण और प्रभावशाली खबरों को पाठकों तक पहुंचाया है. जमीनी मुद्दों की गहरी समझ और तथ्यों पर आधारित रिपोर्टिंग उनकी पहचान रही है. वर्तमान में वह प्रभात खबर की डिजिटल टीम के साथ जुड़े हुए हैं और उत्तर प्रदेश की राजनीति, अपराध तथा जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों पर लगातार लेखन और रिपोर्टिंग कर रहे हैं.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola