क्या सच में अमेठी की रियासत बचाने ब्रिटेन गए थे मोतीलाल नेहरू? इतिहास का हैरान करने वाला दावा

अपने परिवार के साथ मोतीलाल नेहरू
UP News: अमेठी का इतिहास सिर्फ राजनीति तक सीमित नहीं है. देश के पहले प्रधानमंत्री के पिता मोतीलाल नेहरू की एक अनसुनी कानूनी लड़ाई ने रियासत की संपत्ति बचाने में अहम भूमिका निभाई थी. जानिए पूरी कहानी.
UP News: कहते हैं...इतिहास की दीवारें कभी झूठ नहीं बोलतीं. समय भले ही आगे बढ़ जाए, लेकिन कुछ किस्से ऐसे होते हैं जो पीढ़ियों तक लोगों की यादों में जिंदा रहते हैं. उत्तर प्रदेश का अमेठी जिला सिर्फ राजघराने और राजनीति के लिए ही नहीं... बल्कि ऐसे ऐतिहासिक प्रसंगों के लिए भी जाना जाता है... जिनके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं. इन्हीं में एक कहानी देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के पिता और मशहूर वकील मोतीलाल नेहरू से जुड़ी है. कहा जाता है कि उन्होंने कभी अमेठी रियासत की ओर से एक अहम कानूनी लड़ाई लड़ी थी. आज भी इस घटना का जिक्र होते ही स्थानीय लोग अपने इतिहास पर गर्व महसूस करते हैं.
उत्तराधिकारी न होने पर अंग्रेजों ने जब्त कर ली थी अमेठी रियासत
इतिहास के जानकार बताते हैं कि अंग्रेजों के शासन के दौरान एक ऐसा नियम लागू था... जिसके अनुसार यदि किसी राजा का कोई उत्तराधिकारी नहीं होता था.. तो उसकी रियासत और संपत्ति पर ब्रिटिश सरकार अपना अधिकार कर लेती थी. इसी कानून की वजह से अमेठी राजपरिवार भी मुश्किल में पड़ गया. उत्तराधिकारी न होने के कारण रियासत की कई संपत्तियां अंग्रेजी हुकूमत के कब्जे में चली गईं.
मोतीलाल नेहरू ने लड़ी कानूनी लड़ाई, वापस दिलाई रियासत की संपत्ति
बताया जाता है कि इस चुनौती से बाहर निकलने के लिए अमेठी के तत्कालीन शासक राजा रणंजय सिंह और उनके परिवार ने मोतीलाल नेहरू से कानूनी मदद मांगी. उस समय मोतीलाल नेहरू देश के जाने-माने वकीलों में गिने जाते थे. उन्होंने इस मामले की पैरवी की और कानूनी प्रक्रिया के तहत ब्रिटेन तक जाकर अमेठी रियासत का पक्ष रखा. कहा जाता है कि उनकी कोशिशों के बाद जब्त की गई संपत्तियों को दोबारा रियासत को वापस दिलाने में सफलता मिली.
आज भी बुजुर्गों के बीच जिंदा है अमेठी की यह ऐतिहासिक कहानी
यह घटना अमेठी के इतिहास का एक महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती है. हालांकि इससे जुड़े कई दस्तावेज समय के साथ कम मिलते हैं, लेकिन स्थानीय लोगों के बीच यह किस्सा आज भी सुनाया जाता है. बुजुर्ग पीढ़ी इसे अमेठी के गौरवशाली अतीत की एक बड़ी उपलब्धि मानती है.
क्या आनंद भवन के निर्माण में था अमेठी रियासत का योगदान?
इतिहास से जुड़ी एक और चर्चा भी लंबे समय से लोगों के बीच होती रही है. कुछ लोग मानते हैं कि प्रयागराज स्थित आनंद भवन के निर्माण में अमेठी रियासत के खजाने का योगदान रहा था. हालांकि इस दावे की पुष्टि करने वाला कोई आधिकारिक दस्तावेज उपलब्ध नहीं है. इसलिए इतिहासकार इसे एक लोकचर्चा मानते हैं... न कि स्थापित तथ्य.
इतिहास के पन्नों में दर्ज हैं अमेठी से जुड़े कई अनसुने किस्से
भले ही इस कहानी के कुछ हिस्सों पर अलग-अलग राय हो, लेकिन इतना तय है कि अमेठी का इतिहास केवल राजाओं और महलों तक सीमित नहीं है. यहां ऐसे कई प्रसंग जुड़े हैं, जिनमें देश की बड़ी हस्तियों की भूमिका भी देखने को मिलती है. यही वजह है कि अमेठी की ऐतिहासिक विरासत आज भी लोगों को अपने अतीत से जोड़ती है और नई पीढ़ी में इसे जानने की उत्सुकता पैदा करती है.
Input: Lucky Kumari
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