महराजगंज का रहस्यमयी विष्णु मंदिर, जहां नए कपड़े पहनकर जाने से डरते थे लोग , अब बदलेगी तस्वीर

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महाराजगंज विष्णु मंदिर

महाराजगंज विष्णु मंदिर

UP News: महराजगंज-कुशीनगर सीमा पर स्थित प्राचीन विष्णु मंदिर अपनी रहस्यमयी मान्यताओं के लिए मशहूर था. सदियों पुरानी मान्यताएं और अनोखी कथाएं आज भी चर्चा में हैं. अब 1.66 करोड़ की लागत से मंदिर का कायाकल्प किया जा रहा है.

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UP News: उत्तर प्रदेश के महराजगंज जिले में एक ऐसा प्राचीन विष्णु मंदिर है, जो सिर्फ अपनी धार्मिक आस्था ही नहीं बल्कि सदियों पुरानी रहस्यमयी मान्यताओं की वजह से भी लोगों के बीच खास पहचान रखता है. महराजगंज और कुशीनगर जिले की सीमा पर स्थित देवीयापुर का यह मंदिर कभी ऐसी मान्यता के लिए मशहूर था कि यहां से नए कपड़े पहनकर गुजरने की कोई हिम्मत नहीं करता था. आज भले ही यह मान्यता बीते समय की बात हो चुकी है, लेकिन इसकी चर्चा आज भी स्थानीय लोगों के बीच होती रहती है. अब इस ऐतिहासिक धाम का करीब 1.66 करोड़ की लागत से कायाकल्प किया जा रहा है, जिससे श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिल सकें.

महराजगंज-कुशीनगर बॉर्डर पर स्थित है प्राचीन धाम

महराजगंज जिले के सिसवा क्षेत्र के देवीयापुर में स्थित यह विष्णु मंदिर महराजगंज और कुशीनगर जिले की सीमा पर मौजूद है. यह जिले का इकलौता प्राचीन विष्णु मंदिर माना जाता है. यहां महराजगंज, कुशीनगर, गोरखपुर के अलावा पड़ोसी राज्य बिहार से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं. मंदिर अपनी धार्मिक मान्यताओं के साथ-साथ रहस्यमयी कहानियों के कारण भी लोगों के बीच खास पहचान रखता है.

नए कपड़े पहनकर आने को लेकर थी अनोखी मान्यता

मंदिर से जुड़ी एक पुरानी मान्यता के अनुसार, एक समय ऐसा था जब कोई भी व्यक्ति नए कपड़े पहनकर इस रास्ते से गुजरने की हिम्मत नहीं करता था. स्थानीय लोगों के अनुसार, इस रहस्य को लेकर लंबे समय तक इलाके में चर्चाएं होती रहीं. हालांकि अब ऐसी कोई घटना नहीं होती, लेकिन यह कहानी आज भी लोगों की स्मृतियों का हिस्सा बनी हुई है.

1.66 करोड़ की लागत से हो रहा विकास कार्य

मंदिर से जुड़े लोगों ने बताया कि इसके निर्माण के लिए करीब 18 महीने तक घर छोड़कर मंदिर निर्माण में उपयोग होने वाली सामग्री जुटाई गई थी. वर्तमान में मंदिर परिसर के पुनर्निर्माण और श्रद्धालुओं के लिए बेहतर सुविधाएं विकसित करने का काम ₹1.66 करोड़ की लागत से कराया जा रहा है. निर्माण कार्य का एक हिस्सा पूरा हो चुका है और शेष कार्य जल्द पूरा होने की उम्मीद है.

संत के अनुष्ठान के बाद खत्म हुई मान्यता

स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, जब लोग नए कपड़े पहनकर इस रास्ते से जाने से डरते थे, उसी दौरान एक संत मंदिर पहुंचे. उन्होंने पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठान किए, जिसके बाद यह समस्या समाप्त हो गई. तभी से श्रद्धालु बिना किसी भय के मंदिर आने-जाने लगे. आज भी यहां नियमित रूप से धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए जाते हैं, जिनमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं.

मनोकामनाएं पूरी होने की है मान्यता

श्रद्धालुओं का विश्वास है कि इस विष्णु मंदिर में सच्चे मन से मांगी गई हर मनोकामना पूरी होती है. विशाल परिसर में बने इस मंदिर में समय-समय पर धार्मिक आयोजन होते हैं और लोग अपने मांगलिक कार्यों के लिए भी यहां पहुंचते हैं. महराजगंज और कुशीनगर जिले की सीमा पर स्थित होने के कारण दोनों जिलों के अलावा बिहार से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां दर्शन करने आते हैं. हालांकि रहस्यमयी घटनाएं अब बीते समय की बात हो चुकी हैं, लेकिन उनसे जुड़ी कहानियां आज भी स्थानीय लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई हैं.

Input: लक्की कुमारी

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तिलक कैरी

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