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TB Free India: यूपी को टीबी मुक्त बनाने के लिए तीन हफ्ते में होगी तीन लाख सैंपल की जांच

Updated at : 03 Apr 2022 5:05 PM (IST)
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TB Free India: यूपी को टीबी मुक्त बनाने के लिए तीन हफ्ते में होगी तीन लाख सैंपल की जांच

टीबी फ्री इंडिया अभियान के तहत यूपी के प्रत्येक हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर को क्षय रोगियों की पहचान, जांच, इलाज, निक्षय पोषण योजना के तहत सीधे खाते में पैसा, काउंसिलिंग और मनोसामाजिक सहयोग देने की जिम्मेदारी सौंपी गयी है. इसके लिए 13 अप्रैल तक 21 दिवसीय विशेष अभियान चलाया जा रहा है.

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Lucknow: TB free India अभियान के तहत यूपी को वर्ष 2025 से पहले टीबी मुक्त बनाने के तीन सप्ताह तक विशेष जांच अभियान चलाया जाएगा. 14 हजार आयुष्मान भारत-हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर के माध्यम से तीन सप्ताह में 3 लाख टीबी के सैंपल की जांच की जाएगी. इस काम में हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर के सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (सीएचओ, ग्राम प्रधान, आशा, आशा संगिनी, आंगनबाड़ी, एएनएम और क्षेत्र के टीबी चैंपियन को भी लगाया गया है.

13 अप्रैल तक चलेगा अभियान

स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकारी के अनुसार यूपी के प्रत्येक हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर को क्षय रोगियों की पहचान, जांच, इलाज, निक्षय पोषण योजना के तहत सीधे खाते में पैसा, काउंसिलिंग और मनोसामाजिक सहयोग देने की जिम्मेदारी सौंपी गयी है. इसके लिए 13 अप्रैल तक 21 दिवसीय विशेष अभियान चलाया जा रहा है.

एएनएम देंगी संभावित मरीजों की सूचना

इस अभियान में आशा कार्यकर्ता अपने क्षेत्र के संभावित मरीजों की सूची एएनएम को देंगी. एएनएम सैंपल लेकर नजदीकी जांच केंद्र को भेजेंगी. अगर कोई व्यक्ति केंद्र पर जाकर सैंपल देना चाहता है तो उसमें भी मदद करेंगी. सीएचओ दैनिक आधार पर इन मरीजों की सूचना को इकठ्ठा करेंगे और सैंपल की रिपोर्ट को अपडेट करेंगे. टीबी की पुष्टि जिन मरीजों में होगी उनको इलाज के लिए सीएचओ प्रेरित करेंगे. प्रत्येक मरीज की सूचना को सेंटर पर सुरक्षित रखा जाएगा.

जिले कीआबादी के अनुसार हैं सैंपल कलेक्शन का लक्ष्य

हर जिले को आबादी के अनुपात में सैंपल कलेक्शन का लक्ष्य तय किया गया है. इस तरह पूरे प्रदेश में तीन हफ्ते में तीन लाख सैंपल की जांच का लक्ष्य है. सीएमओ स्तर से जनपद को आवंटित लक्ष्य को जिले के सभी चिकित्सालयों जैसे-जिला/संयुक्त चिकित्सालय, सामुदायिक व प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और आयुष्मान भारत-हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर के माध्यम से आवंटित किया जाएगा.

पॉजिटिव मरीजों को मिलेगी फर्स्ट लाइन ड्रग

माइक्रोस्कोपी जांच में पॉजिटिव पाए गए मरीजों का सैंपल सेंसटीविटी जांच के लिए सीएचओ नजदीकी केंद्र पर भेजेंगे. इसके साथ ही पॉजिटिव पाए गए मरीजों को सीएचओ फर्स्ट लाइन इलाज की दवा भी मुहैया कराएंगे. यह सूचनाएं दैनिक आधार पर ब्लॉक से लेकर राज्यस्तर को मुहैया करायी जायेंगी. सीएचओ अपने क्षेत्र के तीन उच्च प्राथमिकता वाले क्षेत्रों का चयन करेंगे.

दूरस्थ क्षेत्रों में लगेंगे  कैंप

उच्च प्राथमिकता में वह क्षेत्र शामिल होंगे, जहां पिछले दो साल में सर्वाधिक टीबी रोगी या कोविड संक्रमित चिन्हित हुए हों. या जो क्षेत्र हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर से दूरस्थ हैं. ऐसे क्षेत्रों में कैंप भी लगाये जायेंगे, जिसकी सूचना आशा कार्यकर्ता घर-घर जाकर तीन दिन पहले देंगी. ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग कैंप में पहुंच सकें. आशा और एएनएम उन लोगों को कैम्प तक लाने में भी सहयोग करेंगी, जिन्हें दो हफ्ते से अधिक समय से खांसी आ रही हो.

इसके अलावा मरीज को बुखार बना रहता हो, वजन में कमी आ रही हो, रात में पसीना आता हो . ऐसे चिन्हित लोगों का कैंप स्थल पर दो सैंपल एक घंटे के अंतराल पर लिये जायेंगे. सैंपल की रिपोर्ट के बारे में 24 घंटे में सीएचओ और आशा को जानकारी दी जायेगी. जांच के बाद चिन्हित क्षय रोगियों को समीप के सीएचसी-पीएचसी के डॉक्टर से परीक्षण के बाद तय रेजिमेन के अनुसार इलाज शुरू किया जा रहा है.

मरीजों को पहले सात दिन की दवाएं सीएचसी-पीएचसी से देते हुए शेष औषधियां संबंधित हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर को सौंप दी जाएगी । सीएचओ क्षेत्र की आशा को हर माह की दवाएं सौंपेंगे और ट्रीटमेंट, एडहेरेंस और एडवर्स इवेंट की मानिटरिंग की जाएगी.

पोषण के लिए हर माह मिलेंगे 500 रुपये

टीबी मरीजों को इलाज के दौरान पोषण के लिए 500 रुपये निक्षय पोषण योजना के तहत सीधे बैंक खाते में दिये जायेंगे. इसके लिए टीबी मरीजों के बैंक खाते का विवरण एवं पहचान पत्र सीएचओ/आशा संबंधित अधिकारी को उपलब्ध कराया जायेगा. टीबी को मात देकर स्वस्थ हुए लोगों में से चयनित टीबी चैम्पियन लोगों को अपने अनुभव के आधार पर बताएंगे कि टीबी के लक्षण नजर आयें तो जांच जरूर कराएं.

समय से जांच और इलाज से टीबी को मात देना आसान

समय से जांच और उपचार से टीबी को बहुत जल्दी मात दिया जा सकता है. बस ध्यान यह रखना है कि दवा का पूरा कोर्स करना है, क्योंकि बीच में दवा छोड़ने से बीमारी गंभीर रूप ले सकती है और उसका इलाज लंबा चल सकता है. इसके अलावा सीएचओ क्षेत्र के स्कूलों में हर हफ्ते टीबी रोग पर गोष्ठी और पोस्टर प्रतियोगिता से जागरूकता फ़ैलाने का भी काम करेंगे.

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Amit Yadav

लेखक के बारे में

By Amit Yadav

UP Head (Asst. Editor)

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