छह वर्षों में बदला विकसित देशों के पिछलग्गू का परसेप्शन, अब दुनिया करती है भारत का अनुसरण : योगी आदित्यनाथ

Updated at :10 Dec 2020 10:19 PM
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छह वर्षों में बदला विकसित देशों के पिछलग्गू का परसेप्शन, अब दुनिया करती है भारत का अनुसरण : योगी आदित्यनाथ

लखनऊ : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को पूर्वांचल के विकास को लेकर आयोजित राष्ट्रीय वेबिनार और संगोष्ठी का उद्घाटन किया. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ''लुक ईस्ट-एक्ट ईस्ट' की बात ऐसे ही नहीं की है. सूर्योदय 'पूर्व' से ही होता है.

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लखनऊ : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को पूर्वांचल के विकास को लेकर आयोजित राष्ट्रीय वेबिनार और संगोष्ठी का उद्घाटन किया. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ”लुक ईस्ट-एक्ट ईस्ट’ की बात ऐसे ही नहीं की है. सूर्योदय ‘पूर्व’ से ही होता है.

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि साल 2014 के पहले लोगों की धारणा थी कि भारत एक पिछलग्गू देश है. नकलची है. वह यूरोप, अमेरिका और विकसित देशों की नकल करना चाहता है. स्वयं अपनी ओर से कुछ करना नहीं चाहता. लेकिन, छह वर्षों में भारत ने परसेप्शन बदली है. आज भारत दुनिया को अनुसरण करने के लिए मजबूर करता है.

उन्होंने कहा कि हमारी सोच ने उत्तर प्रदेश को पिछड़ा बनाया है. जबकि, प्रकृति और परमात्मा ने इसे सबसे समृद्ध क्षेत्र बनाया है. मेरा ये मानना है कि ये धरती का सबसे समृद्ध क्षेत्र है. क्योंकि, कौन-सी ऐसी फील्ड है, जिसमें यूपी में संभावनाएं ना हों और ना रही हों.

उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में नौ एग्रो क्लाइमेटिक जोन हैं. यह हमारे प्रदेश लिए एक उपलब्धि है. इस विशिष्टता का उपयोग करके हम देश और दुनिया की अनेक आवश्यकताओं की पूर्ति का माध्यम बन ‘आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश’ की संकल्पना को मूर्तरूप प्रदान कर सकते हैं. उत्तर प्रदेश सरकार इस दिशा में प्रयत्नशील है.

साथ ही कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने “लुक ईस्ट-एक्ट ईस्ट” की बात ऐसे ही नहीं की है. सूर्योदय ‘पूर्व’ से ही होता है. विकास के सूर्योदय से आप सभी को जोड़ने के लिए केंद्र और राज्य सरकार अत्यंत गंभीरता के साथ कार्य कर रही हैं. पूर्वांचल समृद्धि का नया मानक बनने जा रहा है.

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारा विकास हार्वर्ड और कैंब्रिज के माध्यम से नहीं, बल्कि स्थानीय मेधा के उन्नयन से होगा. उत्तर प्रदेश की समृद्धि के लिए उसकी स्थानीय सांस्कृतिक और भौगोलिक विशेषताओं और संभावनाओं को समझना आवश्यक है. उससे स्थानीय शिल्पकारों, युवाओं, किसानों और महिलाओं को जोड़ना होगा.

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