UP News : मुरादाबाद के थानों में करोड़ों के हथियार फांक रहे धूल, नहीं लेने आ रहे लाइसेंसधारी, जानें कारण
Published by : Sandeep kumar Updated At : 06 Feb 2024 12:30 PM
मुरादाबाद में विधानसभा, लोकसभा, नगर निकाय, ग्राम प्रधान चुनाव को शांतिपूर्ण संपन्न कराने के लिए पुलिस की ओर से अभियान चलाकर शस्त्र लाइसेंस को थानों में जमा कराए गए थे. चुनाव संपन्न होने के बाद एक हजार से ज्यादा लोग ऐसे हैं, जो दोबारा असलहा लेने नहीं पहुंचे. जानें कारण
मुरादाबाद जिले के 19 थाना क्षेत्रों में 21 हजार 277 शस्त्र लाइसेंस हैं. जिसमें एक नाली बंदूक, दो नाली बंदूक, पिस्टल, रायफल शामिल हैं. पुरुषों के साथ ही महिलाओं के नाम पर भी शस्त्र लाइसेंस जारी हुए हैं. शस्त्र लाइसेंस लेने के लिए लोगों ने अपनी जान को खतरा बताते हुए आवेदन किए थे. चौकी, थाने, डीसीआरबी, सीओ ऑफिस, एसपी ऑफिस, एलआईयू और राजस्व विभाग से रिपोर्ट लगवाने को खूब चक्कर लगाए थे. तमाम कोशिशों के बाद शस्त्र लाइसेंस हासिल भी कर लिए. लेकिन विधानसभा, लोकसभा, नगर निकाय, ग्राम प्रधान चुनाव को शांतिपूर्ण संपन्न कराने के लिए पुलिस की ओर से अभियान चलाकर शस्त्र लाइसेंस थानों में जमा कराए गए थे. जिन लोगों ने जमा नहीं किए उन्हें नोटिस भेजे गए. उनसे शस्त्र जमा न करने के ठोस कारण भी लिखित में लिए गए हैं. चुनाव संपन्न हो गए. इसके बाद पुलिस ने मालखानों को साफ कराने के लिए लाइसेंसधारियों को नोटिस भेजे लेकिन एक हजार से ज्यादा लोग ऐसे हैं, जो दोबारा असलहा लेने नहीं पहुंचे. अब वो ही असलहे थानों के मालखानों में धूल फांक रहे हैं. वर्दीधारी तो इन असलहों की सुरक्षा कर रहे हैं लेकिन लाइसेंसधारी लेने को तैयार नहीं हैं. कई बार नोटिस देने के बाद भी एक हजार शस्त्र ऐसे हैं जिन्हें उनके मालिक लेने नहीं पहुंचे. जिससे तंग आकर पुलिस ने एक हजार शस्त्र लाइसेंस निरस्त कराने के लिए डीएम को रिपोर्ट भेजी है.
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दरअसल, चुनाव समाप्त होने के बाद पुलिस थानों के मालखाने में जमा लाइसेंसी हथियारों को धारक को सौंप देती है. पुलिस की जांच में सामने आया है कि जिले में छह सौ लाइसेंस धारकों की मृत्यु हो चुकी है. कुछ ऐसे मामले हैं, जिनमें दो या अधिक बेटे होने के कारण विवाद चल रहा है. जिस कारण वह तय नहीं कर पा रहे हैं कौन सा भाई हथियार लेगा या फिर बेटों को हथियार रखने का शौक नहीं है. कुछ मामले तो ये भी सामने आया है कि बार बार चुनाव होने के कारण हथियार थानों में रखने पड़ते हैं. जिस कारण उन्हें वह थानों से नहीं उठा रहे हैं. एक दो नहीं कई चुनाव निकल गए लेकिन अब भी असलहे लेने नहीं आ रहे हैं. पुलिस की ओर से कई बार नोटिस देने के बाद भी कोई नहीं आया. एसएसपी की ओर से एक हजार असलहों के लाइसेंस निरस्त कराने के लिए डीएम को रिपोर्ट भेजी गई है. एसएसपी हेमराज मीना ने बताया कि जिन लोगों ने थानों में असलहा जमा करने के बाद सुध नहीं ली है, ऐसे लोगों की सूची तैयार कराई थी. जांच में सामने आया है कि कुछ लोग ऐसे हैं, जिन्होंने चुनाव के दौरान थाने में असलहे जमा किए थे लेकिन कुछ दिन बाद ही वह विदेश चले गए हैं. उनके परिजनों के जरिए सूचनाएं भेजी गई थीं. इसके बावजूद भी वह अपना असलहा लेने नहीं आए. इसके बाद उनका लाइसेंस रद्द के लिए रिपोर्ट जिला प्रशासन को भेज दी गई है.
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बता दें कि सिविल लाइंस, मझोला, डिलारी, मूंढापांडे, पाकबड़ा, कांठ, छजलैट, भोजपुर, ठाकुरद्वारा, कटघर समेत अन्य थानों के मालखानों में लाइसेंसी हथियार सुरक्षित रखे हैं. जनपद के बिलारी थाने क्षेत्र में 1546 शस्त्र लाइसेंस हैं. इसके अलावा भगतपुर थाने क्षेत्र में 900 शस्त्र लाइसेंस हैं. जनपद के केवल ये ही दो थाने ऐसे हैं. जिनके क्षेत्र के सभी लाइसेंसधारी अपने अपने हथियार थानों से ले जा चुके हैं. वहीं एसएसपी हेमराज मीना ने बताया कि जिले में 21277 लाइसेंसी शस्त्र हैं. चुनाव के दौरान लाइसेंसी हथियार जमा कराए जाते हैं. एक हजार से ज्यादा ऐसे हथियार हैं, जिन्हें लाइसेंस धारक लेने थाने नहीं आ रहे हैं. पहले 450 और अब 550 शस्त्र लाइसेंस निरस्त कराने के लिए जिला प्रशासन को रिपोर्ट भेजी गई है.
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