सीरियल किलर डॉ देवेंद्र शर्मा दिल्ली से गिरफ्तार, बिहार के सिवान से ली थी BAMS की डिग्री ...पढ़ें कैसे बना सीरियल किलर
Author : Prabhat Khabar Digital Desk Published by : Prabhat Khabar Updated At : 30 Jul 2020 4:55 PM
लखनऊ / अलीगढ़ : गुरुग्राम किडनी कांड में शामिल अलीगढ़ के डॉ देवेंद्र शर्मा को दिल्ली में गिरफ्तार कर लिया गया. डॉ शर्मा पर साल 2002 से 2004 के बीच दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान में 100 से अधिक टैक्सी चालकों की हत्या करने का आरोप है. बताया जाता है कि काम को अंजाम देने के बाद डॉ शर्मा अलीगढ़ मंडल के जिला कासगंज के हजारा कैनाल में शवों को फेंक देता था. चिकित्सक की इस हरकत से पत्नी और बच्चे परेशान होकर उसे साल 2004 में ही छोड़ कर अलग हो गये थे. डॉ देवेंद्र शर्मा ने बिहार के सिवान से बीएएमएस की डिग्री हासिल की थी.
लखनऊ / अलीगढ़ : गुरुग्राम किडनी कांड में शामिल अलीगढ़ के डॉ देवेंद्र शर्मा को दिल्ली में गिरफ्तार कर लिया गया. डॉ शर्मा पर साल 2002 से 2004 के बीच दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान में 100 से अधिक टैक्सी चालकों की हत्या करने का आरोप है. बताया जाता है कि काम को अंजाम देने के बाद डॉ शर्मा अलीगढ़ मंडल के जिला कासगंज के हजारा कैनाल में शवों को फेंक देता था. चिकित्सक की इस हरकत से पत्नी और बच्चे परेशान होकर उसे साल 2004 में ही छोड़ कर अलग हो गये थे. डॉ देवेंद्र शर्मा ने बिहार के सिवान से बीएएमएस की डिग्री हासिल की थी.
जानकारी के मुताबिक, अलीगढ़ के छर्रा थाना क्षेत्र के पुरैनी गांव निवासी 62 वर्षीय देवेंद्र शर्मा बिहार के सीवान से बीएएमएस (बैचलर ऑफ आयुर्वेद मेडिसिन एंड सर्जरी) की डिग्री हासिल की थी. पेरोल पर बाहर आने के बाद पुलिस से बचने के लिए दिल्ली में एक विधवा से शादी कर प्रॉपर्टी डीलिंग का काम करने लगा. दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच के डीसीपी राकेश पावेरिया ने बताया कि सूचना मिली कि सीरियल किलिंग और हत्या के एक मामले में उम्रकैद का सजायाफ्ता देवेंद्र शर्मा जयपुर की सेंट्रल जेल से जनवरी में 20 दिन के पेरोल पर बाहर आया था. इसके बाद वह फरार हो गया था. जानकारी मिली कि वह दिल्ली में छिपा है. इसके बाद उसे दिल्ली के बपरोला की गली नंबर-10 के एक मकान से गिरफ्तार कर लिया गया है.
पूछताछ में देवेंद्र शर्मा ने बताया कि सीवान से बीएएमएस में स्नातक की डिग्री हासिल करने के बाद 1984 से 1995 तक जयपुर के बांदीकुई में जनता अस्पताल और डायग्नोस्टिक्स के नाम से क्लिनिक खोल कर काम करता रहा. साल 1982 में शादी की. वहीं, साल 1994 में थापर चैंबर में भारत फ्यूल कंपनी के कार्यालय ने गैस डीलरशिप देने की योजना चलायी. उसने इसमें 11 लाख रुपये का निवेश किया था, लेकिन कंपनी के अचानक गायब होने से उसका सारा पैसा डूब गया.
साल 1995 में अलीगढ़ के छर्रा में भारत पेट्रोलियम की एक नकली गैस एजेंसी शुरू की. इसी दौरान दलालपुर निवासी राज, उदयवीर और वेदवीर के संपर्क में आया. इसके बाद चालक की हत्या कर एलपीजी सिलिंडर ले जानेवाले ट्रकों को लूटना शुरू किया. फर्जी गैस एजेंसी में सिलिंडर उतार कर मेरठ में लूटे गये ट्रक को बेच देते थे. डेढ़ वर्ष बाद उसे नकली गैस एजेंसी चलाने के लिए गिरफ्तार किया गया. इसके बाद वर्ष 2001 में उसने फिर अमरोहा में नकली गैस एजेंसी शुरू की.
1994 में भारी नुकसान के बाद वह जयपुर, बल्लभगढ़, गुरुग्राम और अन्य जगह चल रहे अंतरराज्यीय किडनी प्रत्यारोपण गिरोह में शामिल हो गया. उसे गुरुग्राम में डॉ अमित द्वारा संचालित अनमोल नर्सिंग होम में किडनी रैकेट मामले में वर्ष 2004 में गिरफ्तार किया गया. साल 1994 से 2004 तक वह अवैध रूप से किये गये 125 से अधिक किडनी प्रत्यारोपण के लिए उसने किडनी देनेवाले लोगों की व्यवस्था की. एक प्रत्यारोपण के लिए उसे 5-7 लाख रुपये मिलते थे. इसी दौरान वह जयपुर गया और 2003 तक अपना क्लिनिक चलाता रहा.
इस दौरान उन लोग के संपर्क में आया, जो अलीगढ़ जाने के लिए टैक्सी किराये पर लेते और फिर चालक की हत्या कर टैक्सी लूट लेते थे. वे कासगंज के हजारा नहर में शव को फेंकते थे, जिसमें मगरमच्छ होते हैं, इसलिए किसी का भी शव नहीं मिलता था. लूटी हुई टैक्सी को कासगंज और मेरठ में 20-25 हजार रुपये में बेचता था. उसकी गिरफ्तारी के बाद उससे कार खरीदने वाले सभी लोगों को भी पुलिस ने गिरफ्तार किया था. उसने माना कि वह ऐसी 50 से ज्यादा हत्याओं का मास्टरमाइंड रहा है. हालांकि, वह 100 से अधिक टैक्सी चालकों की हत्याओं में शामिल रहा था. इस संबंध में दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान में मामले दर्ज किये गये थे. वर्ष 2002-2004 में हुई कई हत्या के मामलों में उसे गिरफ्तार किया गया और छह मामलों में दोषी भी ठहराया गया था.
Posted By : Kaushal Kishor
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