PM मोदी पर महंत गोपाल दास का निशाना, राममंदिर पर कोर्ट का बहाना बना रहे

Updated at : 04 Jan 2019 9:58 PM (IST)
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PM मोदी पर महंत गोपाल दास का निशाना, राममंदिर पर कोर्ट का बहाना बना रहे

मथुरा : अयोध्या स्थित रामजन्म भूमि न्यास के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर राम मंदिर निर्माण से बचने के लिए कोर्ट का बहाना करने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि वह जनता को कोर्ट के भ्रम में न डालें तथा उसकी भावना का सम्मान करते हुए राम मंदिर […]

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मथुरा : अयोध्या स्थित रामजन्म भूमि न्यास के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर राम मंदिर निर्माण से बचने के लिए कोर्ट का बहाना करने का आरोप लगाया.

उन्होंने कहा कि वह जनता को कोर्ट के भ्रम में न डालें तथा उसकी भावना का सम्मान करते हुए राम मंदिर का निर्माण करायें. वह अयोध्या संबंधी मामले की सुनवाई के लिए दिल्ली रवाना होने से पूर्व वृंदावन के चैतन्य विहार स्थित हरिहर आश्रम में संवाददाताओं से वार्ता कर रहे थे. उन्होंने केंद्र की मोदी और राज्य की योगी सरकारों को कटघरे में खड़ा करते हुए कहा, हम वहां जा रहे हैं. देखते हैं कि क्या सुनवाई होती है. दिनभर दिल्ली में ही रहेंगे. वहां अयोध्या के लिए विशिष्ट पूजन से संबंधित कार्यक्रम में शामिल होंगे और धर्माचार्यों के साथ वार्ता कर सरकार को प्रेरित करेंगे कि जहां रामलला विराजमान हैं, शीघ्रातिशीघ्र राम मंदिर का निर्माण करे.

नववर्ष के अवसर पर प्रधानमंत्री द्वारा एक साक्षात्कार में राम मंदिर के निर्माण के मुद्दे को कोर्ट में लंबित बताकर कोई अध्यादेश न लाने की बात कहे जाने पर महंत ने कहा, उन्होंने कोर्ट का सम्मान किया है. हम भी कोर्ट का सम्मान करते हैं. परंतु, यह कोर्ट का विषय नहीं है. कोर्ट तो अपने हिसाब से निर्णय लेता है. कोर्ट ने तो रामलला के स्थल को तीन हिस्सों में बांट दिया. लेकिन, केंद्र में मोदी की बहुमत की सरकार है. राज्य में योगी भी बहुमत में हैं. जनता ने इनको मंदिर निर्माण के लिए भेजा है. इसलिए इन्हें चाहिए कि कोर्ट की बात न करके सीधे मंदिर निर्माण की राह प्रशस्त करें.

उन्होंने दोनों नेताओं (मोदी एवं योगी) के लिए कहा, कोर्टों का झमेला न खड़ा करके, जनता को कोर्ट के भ्रम में न डालकर केंद्र व प्रांत की सरकारों को चाहिए कि वे सीधे अपने बहुमत का उपयोग करें और जनता की भावनाओं का सम्मान करते हुए रामलला के स्थान पर राम मंदिर निर्माण की राह निकालें. संभवतः यहां उनका इशारा अध्यादेश अथवा ऐसे ही किसी सर्वमान्य उपाय के सहारे राम मंदिर निर्माण का हल खोजने का था. जिससे कोर्ट का सम्मान भी रह जाये और जनता की भावनाओं के अनुरूप मंदिर निर्माण भी हो जाये.

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