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गोरखपुर उपचुनाव : योगी की नापसंद, तो भाजपा ने क्यों बनाया उपेंद्र शुक्ला को प्रत्याशी...पढ़ें

Updated at : 19 Feb 2018 4:16 PM (IST)
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गोरखपुर उपचुनाव : योगी की नापसंद, तो भाजपा ने क्यों बनाया उपेंद्र शुक्ला को प्रत्याशी...पढ़ें

लखनऊ: भारतीय जनता पार्टी ने गोरखपुर और फूलपुर सीट के लिए होने वाले उपचुनाव के लिए आज अपने पत्ते खोलकर सबको चौंका दिया है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सीट गोरखपुर से उपेंद्र दत्त शुक्ला को और फूलपुर सीट से कौशलेंद्र सिंह पटेल को टिकट दिया है. लिहाजा अब इन दोनों सीटों पर मुकाबला दिलचस्प होने […]

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लखनऊ: भारतीय जनता पार्टी ने गोरखपुर और फूलपुर सीट के लिए होने वाले उपचुनाव के लिए आज अपने पत्ते खोलकर सबको चौंका दिया है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सीट गोरखपुर से उपेंद्र दत्त शुक्ला को और फूलपुर सीट से कौशलेंद्र सिंह पटेल को टिकट दिया है. लिहाजा अब इन दोनों सीटों पर मुकाबला दिलचस्प होने की उम्मीद है. गोरखपुर से योगी अपने किसी करीबी को टिकट दिलाना चाह रहे थे, जबकि फूलपुर से केशव प्रसाद मौर्या अपनी पत्नी के लिए पार्टी से टिकट मांग रहे थे.

कौन हैं उपेंद्र दत्त शुक्ला और कौशलेंद्र सिंह पटेल
आइए आपको इस बारे में बताते हैं. उपेंद्र दत्त शुक्ला ने अपने राजनैतिक जीवन की शुरुआत भाजपा से की और जमीनी स्तर पर अपनी मजबूत पकड़ बनायी. वह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से भी जुड़े रहे, लेकिन पार्टी ने पहले उन पर भरोसा नहीं किया है और शुक्ला ने पार्टी से लाइन से बाहर जाकर दो बार कौड़ीराम विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा. हालांकि वह विधानसभा की दहलीज तक पहुंचने में सफल नहीं हुए. उन्होंने फिर दोबारा भाजपा का दामन थामा और पार्टी ने उन्हें उनकी वफादारी का इनाम देते हुए गोरखपुर सीट से टिकट दिया.

शुक्ला राज्यसभा सांसद और वर्तमान में केंद्रीय वित्तमंत्री में मंत्री शिव प्रताप शुक्ला के बेहद करीबी बताये जाते है. पिछले विधानसभा चुनावों में सहजनवां से उनके नाम की चर्चा थी, लेकिन पार्टी ने उन्हें टिकट न देकर वर्तमान विधायक शीतल पांडेय को टिकट दिया. शुक्ला ने गोरखपुर में जिला अध्यक्ष के रूप में भी पार्टी को अपनी सेवा दी है. उन्होंने विद्यार्थी परिषद की राजनीति में भी उन्होंने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया. फिलहाल वह गोरखपुर क्षेत्र के क्षेत्रीय अध्यक्ष हैं, जिसके तहत 64 विधानसभा 12 लोकसभा क्षेत्र आते हैं और वह 2014 से इस पद पर हैं.

वहीं, फूलपुर लोकसभा पार्टी कौशलेंद्र सिंह पटेल पर भरोसा जताया है. बीएचयू से पढ़े लिखे पटेल वर्तमान में पार्टी के प्रदेश मंत्री हैं और वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की संसदीय वाराणसी से मेयर रह चुके हैं. हालांकि, पटेल चुनार के रहने वाले है. शुक्ला की तरह पटेल भी संघ से जुड़े रहे और इसके बाद उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के जरिये राजनीति की शुरुआत की. ऐसा माना जा रहा है कि पटेल को फूलपुर में बाहरी होने नुकसान उठाना पड़ सकता है.

योगी की नापसंद को उम्मीदवार बनाकर भाजपा ने दिया यह संदेश
लोकसभा उपचुनाव में भाजपा ने योगी की नापसंद को अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया है. बताया जा रहा है कि पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने इस घोषणा के साथ यह संदेश दिया है कि किसी इलाके में किसी का एकछत्र वर्चस्व मंजूर नहीं है. चर्चा है कि गोरखपुर लाेकसभा सीट के लिए उपचुनाव में यूपी के सीएम एवं गोरखपुर से6 बार सांसद रहे योगी आदित्यनाथ यहां से डॉ. धर्मेंद्र सिंह को प्रत्याशी बनाना चाहते थे. हालांकि पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व से इस बारे में हरी झंडी नहीं मिलने के बाद योगी आदित्यनाथ के वरिष्ठ अधिवक्ता हरिप्रकाश मिश्र का नाम आगे किया गया. बावजूद इसके केंद्रीय नेतृत्व ने पार्टी के क्षेत्रीय अध्यक्ष उपेंद्र दत्त शुक्ला को मैदान में उतारने का निर्णय लिया. हालांकि चर्चा है कि अमित शाह ने योगी आदित्यनाथ को विश्वास में लेने के बाद ही इस बारे में अंतिम निर्णय लिया.

उपेंद्र शुक्ला को भाजपा ने क्यों बनाया उम्मीदवार
उपेंद्र दत्त शुक्ला को उम्मीदवार बनाने के पीछे दो मुख्य कारण बताया जा रहा है. पहला उपेंद्र शुक्ला की पार्टी के प्रति निष्ठाव पहचान और दूसरा गोरखपुर क्षेत्र में ब्राह्मण मतदाताओं को पार्टी नाराज नहीं करना चाहती थी. बताया जाता है कि उपेंद्र शुक्ला को प्रत्याशी नहीं बनाये जाने पर भाजपा से कुछ ब्राह्मण निराश होकर किनारा कर सकते थे. सपा ने यहां से निषाद बिरादरी का उम्मीदवार उतारा है, ऐसे में भाजपा को मतदाताओं के जातीय संतुलन को साधने के लिए ब्राह्मण प्रत्याशी उतारना था.

गोरखपुर में मतदाताओं की स्थिति
गौर हो कि गोरखपुर लोकसभा सीट पर सबसे ज्यादा निषाद वोटर है, जिनकी संख्या करीब4 लाख बतायी जाती है. वहीं एक अनुमान के मुताबिक इस लोकसभा क्षेत्र में करीब डेढ़ लाख मुस्लिम, डेढ़ लाख ब्राह्मण, एक लाख तीस हजार राजपूत, एक लाख साठ हजार यादव, एक लाख चालीस हजार सैंथवार, और वैश्य व भूमिहार मतदाता करीब एक लाख की संख्या में हैं.

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