जानें कहां खर्च होगी हज सब्सिडी की राशि, उत्तर प्रदेश सरकार ने लिया अहम फैसला
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 03 Feb 2018 4:29 PM
मथुरा : केंद्र सरकार द्वारा हज के लिए दी जाने वाली 700 करोड़ रुपये की सब्सिडी समाप्त किये जाने के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने अपने हिस्से की सब्सिडी के बराबर 250 करोड़ रुपये की राशि मुस्लिम कन्या शिक्षा पर खर्च करने का फैसला किया है .प्रदेश के हज, वक्फ एवं अल्पसंख्यक कल्याण मामलों के […]
मथुरा : केंद्र सरकार द्वारा हज के लिए दी जाने वाली 700 करोड़ रुपये की सब्सिडी समाप्त किये जाने के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने अपने हिस्से की सब्सिडी के बराबर 250 करोड़ रुपये की राशि मुस्लिम कन्या शिक्षा पर खर्च करने का फैसला किया है .प्रदेश के हज, वक्फ एवं अल्पसंख्यक कल्याण मामलों के मंत्री चौधरी लक्ष्मीनारायण ने शनिवार को यह जानकारी दी कि सरकार का सीधा-सीधा इरादा अल्पसंख्यक कल्याण की योजनाओं को बढ़ावा देना है.उन्होंने कहा, ‘‘इस राशि से मदरसे से लेकर परास्नातक तक शिक्षा पा रहीं मुस्लिम छात्राओं को वजीफा एवं उच्च शिक्षा के लिए मेडिकल एवं इंजीनियरिंग कॉलेजों में प्रवेश का खर्च भी मुहैया कराया जायेगा. ‘
केंद्र से भी मांगी गयी है मदद
‘‘राज्य सरकार ने इसके अलावा प्रदेश में अल्पसंख्यक कल्याण के लिए जारी अन्य योजनाओं में अधिक से अधिक आबादी को लाभ पहुंचाने के लिये इन योजनाओं को लागू करने के मानकों में भी रियायत देने का प्रस्ताव केंद्र सरकार के समक्ष रखा है, जिसे सिद्धांततः मान लिया गया है. ‘ उन्होंने बताया, ‘‘अब यह केंद्र सरकार को तय करना है कि वह एक-चौथाई मुस्लिम आबादी होने पर भी जिले में अल्पसंख्यक कल्याण की योजनाएं संचालित करने के मानक में किस हद तक और क्या परिवर्तन करती है.
अल्पसंख्यकों को मिलेगा योजनाओं का लाभ
उम्मीद है कि इससे प्रदेश के कमोबेश सभी जिले इनके दायरे में आ जायेंगे.’ गौरतलब है कि केंद्र सरकार तय नियम के अनुसार अब तक उन्हीं जनपदों में अल्पसंख्यक कल्याण की योजनाओं के संचालन के लिए सब्सिडी देती रही है, जिनमें मुस्लिम आबादी का प्रतिशत एक-चौथाई से अधिक हो. इसके चलते उत्तर प्रदेश में 75 में से केवल 41 जिलों में ही यह योजनाएं संचालित हैं, जिनमें मथुरा भी शामिल है.’
अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री ने बताया, ‘‘केंद्र सरकार के प्रतिनिधियों ने भी इस प्रस्ताव पर सहमति जतायी कि इन योजनाओं को लागू करने में तहसील के स्थान पर ग्राम पंचायत को इकाई माना जाये. इससे अधिक से अधिक मुस्लिम आबादी को अल्पसंख्यकों के कल्याण के लिये चलायी जा रहीं योजनाओं का लाभ उठाने का मौका मिलेगा.’ उन्होंने बताया, ‘‘पिछले दिनों लखनऊ में संपन्न बैठक में केंद्रीय अल्पसंख्यक कल्याण मंत्रालय के मंत्री एवं सचिव सहित हरियाणा, पंजाब, दिल्ली, चंडीगढ़, बिहार, जम्मू कश्मीर, उत्तराखंड सहित नौ राज्यों के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री सम्मिलित हुए थे.
बेटियों को शिक्षित करना जरूरी
सरकार का मकसद प्रदेश में अब तक पिछड़ती चली आ रही इस अल्पसंख्यक आबादी का जीवन स्तर ऊपर उठाना है, जिसके लिए बेटियों को शिक्षित करना सबसे सही और सटीक उपाय है, क्योंकि बेटियां पढ़ेंगी तो वे सबको शिक्षित करेंगी. गांधीजी के शब्दों में – ‘बेटी पढ़ती है तो दो परिवारों को शिक्षित करती है.’ उन्होंने कहा, ‘‘इसके अलावा परंपरागत रूप से चलायी जा रही योजनाओं को नया रूप दिया जायेगा. अल्पसंख्यक बाहुल्य इलाके में कुटीर उद्योगों की स्थापना की जायेगी। विभिन्न तकनीकी प्रशिक्षण के लिये कौशल विकास योजनाओं में शामिल किया जायेगा तथा आसान ऋण सुविधा भी उपलब्ध करायी जायेगी.
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