भाई ने मारे 150 थप्पड़, 15 एंटी-वेनम से बची जान, सांप के डसते ही बिगड़ी थी 21 साल के अरुण की हालत

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15 एंटी-वेनम से बची जान (AI)

UP News: हरदोई में सांप के डसने का एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां 21 वर्षीय अरुण की हालत बिगड़ने के बाद डॉक्टरों ने तत्काल इलाज शुरू किया. भाई के अथक प्रयासों ने उसकी जान बचाने में अहम भूमिका निभाई.

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UP News: हरदोई में बोरी उठाते ही सांप ने डसा हरदोई में सांप के काटने का एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां 21 वर्षीय अरुण की हालत बिगड़ने के बाद डॉक्टरों ने तत्काल इलाज शुरू किया. देहात कोतवाली क्षेत्र के ज्योति नगर निवासी अरुण खेत में पानी लगाने गया था. बताया गया कि घास की बोरी उठाते समय उसमें छिपे जहरीले सांप ने उसे डस लिया. सांप के डसते ही अरुण चीख पड़ा और कुछ ही देर में उसकी हालत तेजी से बिगड़ने लगी. परिवार ने बिना समय गंवाए उसे अस्पताल पहुंचाने की कोशिश शुरू कर दी.

रास्ते में बिगड़ी हालत, बाइक से पहुंचाया अस्पताल

अरुण की बिगड़ती हालत देखकर उसका बड़ा भाई आकाश उसे सड़क की ओर ले जाने लगा और एंबुलेंस व पुलिस को सूचना दी. इसी दौरान प्रगति नगर निवासी मेडिकल स्टोर संचालक शिवम शर्मा वहां से गुजर रहे थे. उन्होंने दोनों भाइयों को देखा तो तुरंत अपनी बाइक से अरुण को मेडिकल कॉलेज पहुंचाया. अस्पताल पहुंचते ही इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर डॉ. शेर सिंह और उनकी पांच सदस्यीय टीम ने युवक की जांच शुरू की और गंभीर स्थिति को देखते हुए तत्काल एंटी-वेनम उपचार शुरू कर दिया.

दो घंटे में दिए 15 एंटी-वेनम इंजेक्शन

डॉक्टरों के अनुसार, अरुण के शरीर में सांप के जहर का काफी असर दिखाई दे रहा था. उसकी हालत को देखते हुए करीब दो घंटे के भीतर कुल 15 एंटी-वेनम इंजेक्शन दिए गए. चिकित्सकों ने परिजनों को मरीज की लगातार निगरानी करने और उसे होश में रखने की हिदायत दी. इसी दौरान बड़े भाई आकाश ने अरुण को जगाए रखने की कोशिश की और कथित तौर पर करीब 150 थप्पड़ लगाए. उनका उद्देश्य मरीज को लगातार जागता रखना था, ताकि उसकी स्थिति पर नजर बनी रहे.

डॉक्टरों की निगरानी में बची युवक की जान

डॉक्टर शेर सिंह ने बताया कि सांप का जहर शरीर के नर्वस सिस्टम को प्रभावित कर सकता है और गंभीर मामलों में सांस लेने की क्षमता तक प्रभावित हो सकती है. बेहोशी या उल्टी की स्थिति में सांस की नली में उल्टी जाने का खतरा भी रहता है. इसलिए ऐसे मरीज को बिना देरी अस्पताल पहुंचाना बेहद जरूरी है. अरुण के मामले में भी समय पर अस्पताल पहुंचने और चिकित्सकीय उपचार मिलने से उसकी हालत संभली और उसकी जान बचाई जा सकी.

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नटवर कुमार

लेखक के बारे में

By नटवर कुमार

नटवर कुमार पत्रकारिता के क्षेत्र में दो वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले पत्रकार हैं.वे ग्राउंड रिपोर्टिंग और जनहित से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से कवर करते हैं. राजनीतिक घटनाक्रम, स्थानीय समस्याओं, प्रशासनिक गतिविधियों, अपराध, सामाजिक मुद्दों और आम लोगों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि है. उनका प्रयास खबरों को तथ्यात्मक, स्पष्ट और पाठकों के लिए उपयोगी तरीके से प्रस्तुत करना रहता है.नटवर कुमार ने इतिहास में मास्टर ऑफ आर्ट्स (M.A. History) और मास्टर इन जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन (MJMC) की पढ़ाई पटना से की है. इतिहास और पत्रकारिता में उनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि उन्हें घटनाओं को व्यापक संदर्भ में समझने और प्रभावी तरीके से प्रस्तुत करने में मदद करती है.इस दौरान उन्होंने दूरदर्शन पटना में भी समय दिया है. नटवर कुमार मूल रूप से बिहार के दिनकर की भूमि बेगूसराय जिले के रहने वाले हैं.

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