सुभासपा लड़ेगी BMC चुनाव, ओमप्रकाश राजभर को मिला उद्धव ठाकरे का साथ, पूर्वांचल फैक्टर ने बनाया सियासी साझेदार

दरअसल मुंबई में पूर्वांचल के लोग बड़ी संख्या में रहते हैं. इसके अलावा उत्तर प्रदेश के अन्य हिस्सों के लोगों की भी वहां बड़ी आबादी है. राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक ओपी राजभर इन्हें लेकर काफी समय से सक्रिय हैं और उनके जरिए अपनी राजनीति को चमकाना चाहते हैं.
Lucknow: यूपी में अपनी राजनीति को धार देने में जुटी सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (SBSP) ने महाराष्ट्र में बीएमसी चुनाव में उतरने फैसला किया है. इसके लिए पार्टी उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाले शिवसेना के साथ मिलकर ताल ठोकेगी.
पार्टी अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर ने बताया कि उनकी शिवसेना नेता उद्धव ठाकरे से मुंबई में मुलाकात हुई है. इसमें उनके साथ मिलकर बीएमसी चुनाव लड़ने पर चर्चा हुई. राजभर ने दावा किया मुलाकात में इसकी सहमति बन गई है और अब सुभासपा उद्धव ठाकरे के गुट वाली शिवसेना के सहयोगी दल के रूप में बीएमसी चुनाव में अपनी किस्मत आजमाएगी.
दरअसल मुंबई में पूर्वांचल के लोग बड़ी संख्या में रहते हैं. इसके अलावा उत्तर प्रदेश के अन्य हिस्सों के लोगों की भी वहां बड़ी आबादी है. राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक ओपी राजभर इन्हें लेकर काफी समय से सक्रिय हैं और उनके जरिए अपनी राजनीति को चमकाना चाहते हैं. हाल ही में उन्होंने ‘राजा सुहेलदेव’ को भारत रत्न दिए जाने की मांग भी थी. महाराष्ट्र में भी राजा सुहेलदेव को मानने वालों की बड़ी संख्या है.
दूसरी ओर उद्धव ठाकरे महाराष्ट्र का मुख्यमंत्री पद गंवाने के बाद एक बार फिर जनता के बीच अपनी पैठ बनाने में जुटे हैं. उन्हें लगता है कि अगर सुभासपा को बीएमसी चुनाव में कुछ सीटें दी दे दी जाएं, तो पूर्वांचल के लोगों के बीच अपने समीकरण साधते हुए पार्टी अच्छा प्रदर्शन कर सकती है. ऐसे में जहां उनके विरोधियों के लिए मुश्किल खड़ी होगी, वहीं उद्धव ठाकरे गुट को लाभ मिलेगा.
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वहीं ओपी राजभर की बात करें तो उनके लिए यह फायदे का सौदा साबित होगा. उद्धव ठाकरे वाले गुट का साथ मिलने से सुभासपा को जहां उनके समर्थक वोट मिलेंगे, वहीं पूर्वांचल के लोगों के जरिए वह बीएमसी चुनाव में अपनी पैठ बना सकता है. ओपी राजभर यूपी में भी गठबंधन की सियासत करते रहे हैं.
यूपी में 2017 का विधानसभा चुनाव सुभासपा ने भाजपा के साथ मिलकर लड़ा था. इसके बाद भाजपा का सत्ता का वनवास खत्म होने पर जब योगी आदित्यनाथ को मुख्यमंत्री पद की कमान सौंपी गई, तो ओपी राजभर को भी कैबिनेट मंत्री बनाया गया. हालांकि ये सियासी दोस्ती ज्यादा दिन नहीं टिकी और ओपी राजभर ने भाजपा से किनारा कर लिया.
इसके बाद 2022 के विधानसभा चुनाव में राजभर ने समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन किया. चुनाव नतीजे आते आते एक बार फिर राजभर की अखिलेश यादव से नहीं बनी और उन्होंने दूरी बना ली. अब ओपी राजभर लगातार अखिलेश यादव पर हमलावर बने हुए हैं. उन्होंने सपा अध्यक्ष को दलित और पिछड़ा विरोधी करार दिया है.
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लेखक के बारे में
By Sanjay Singh
working in media since 2003. specialization in political stories, documentary script, feature writing.
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