…तो दशहरी आम के जायके से महरूम रहेगी बाकी दुनिया

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…तो दशहरी आम के जायके से महरूम रहेगी बाकी दुनिया

कोविड-19 (COVID-19) संक्रमण (Coronavirus Lockdown) के मद्देनजर दुनिया के अनेक देशों में जारी लॉकडाउन (Coronavirus ) के कारण ये मुल्क दशहरी समेत तमाम किस्मों के आम के जायके से महरूम रह जाएंगे.

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नयी दिल्‍ली /लखनऊ : कोविड-19 संक्रमण के मद्देनजर दुनिया के अनेक देशों में जारी लॉकडाउन के कारण ये मुल्क दशहरी समेत तमाम किस्मों के आम के जायके से महरूम रह जाएंगे.

इससे परेशान हिन्दुस्तान के आम उत्पादकों को पूर्णबंदी के चलते लागू बंदिशों की वजह से फसल के बरबाद होने की आशंका भी सता रही है. लॉकडाउन के कारण प्रदूषण कम होने से मौजूदा मौसम आम की फसल के लिये साजगार तो है, लेकिन सिंचाई और दवा वगैरह के छिड़काव के लिये मजदूर न मिल पाने की वजह से फसल खराब होने की आशंका भी है.

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साथ ही आम बागवानों को यह भी डर है कि अगर लॉकडाउन लम्बा खिंचा तो आम मंडियों तक नहीं पहुंच पाएगा. तब या तो वह डाल पर ही सड़ जाएगा, या फिर कौड़ियों के भाव बिकेगा. मैंगो ग्रोवर्स एसोसिएशन आफ इंडिया के अध्यक्ष इंसराम अली ने लॉकडाउन के कारण उपजी स्थितियों पर गहरी चिंता जाहिर करते हुए बताया कि लॉकडाउन के कारण मजदूर न मिलने की वजह से आम की सिंचाई नहीं हो पा रही है.

पूर्णबंदी की वजह से आम को सुरक्षित रखने के लिये पेटियां बनाने वाली फैक्ट्रियां भी बंद हैं. ऐसे में जब एक जिले से दूसरे जिले तक में आम पहुंचाना मुमकिन नहीं है, तो दूसरे देशों में उसका निर्यात करना खामख्याली ही है. उन्होंने कहा कि इस बार पूरी आशंका है कि दुनिया के बाकी देश लखनवी दशहरी समेत आम की तमाम किस्मों के जायके से महरूम रह जाएंगे.

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दशहरी आम अमेरिका, सऊदी अरब, कुवैत, कतर, बहरीन, सिंगापुर, ब्रिटेन, बांग्लादेश, नेपाल तथा पश्चिम एशिया के लगभग सभी देशों में निर्यात होता है. पिछले साल करीब 40 हजार मीट्रिक टन आम निर्यात हुआ था. इस साल किसान सोच रहा है कि लॉकडाउन में उसका आम स्थानीय बाजार में ही पहुंचकर बिक जाए तो बड़ी बात होगी.

अली ने कहा कि इस साल प्रदेश में 30-35 लाख मीट्रिक टन आम उत्पादन होने की उम्मीद है. हालांकि अभी आम की फसल पूरी तरह तैयार होने में एक महीना बाकी है, लेकिन अगर 20-25 दिन ऐसे ही लॉक डाउन रहा तो हालात बहुत खराब हो जाएंगे. तब सड़ने से बचा आम सड़कों पर फेंकना पड़ेगा, क्योंकि यह कोई सब्जी या दवा नहीं है कि लोग उसे खरीदें ही.

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उन्होंने सरकार से मांग की कि वह आम उत्पादकों को भी किसानों की ही तरह लॉकडाउन में छूट दे, ताकि वे बागों में जाकर अपना काम कर सकें. साथ ही वह गेहूं और धान की तरह आम का भी न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित कर उसे खरीदे ताकि आम के उत्पादकों को बरबाद होने से बचाया जा सके.

मशहूर आम बागवान कलीम उल्ला ने कहा कि हालात यूं ही रहे तो आम की फसल मंडियों तक नहीं पहुंच पायेगी. तब आम बागों में ही सड़ जाएगा. अगर सरकार ने आम को मंडी में लाने की व्यवस्था की, तो भी उसे तौलने और बेचने के लिये मजदूर नहीं मिलेंगे. उन्होंने कहा कि निर्यात नहीं होने की वजह से आम स्थानीय बाजारों में कौड़ियों के दाम बिकेगा.

दोनों ही सूरत में आम उत्पादक का बरबाद होना तय है. मालूम हो कि उत्तर प्रदेश में लखनऊ स्थित मलीहाबाद, बाराबंकी, प्रतापगढ़, उन्नाव के हसनगंज, हरदोई के शाहाबाद, सहारनपुर, मेरठ तथा बुलंदशहर समेत करीब 15 मैंगो बेल्ट हैं. पूरे देश का करीब 23 प्रतिशत आम उत्पादन उत्तर प्रदेश में होता है.

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अरबिंद कुमार मिश्रा

लेखक के बारे में

By अरबिंद कुमार मिश्रा

अरबिंद कुमार मिश्रा मुख्यधारा की पत्रकारिता में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले एक वरिष्ठ पत्रकार और लेखक हैं. वर्तमान में, वह प्रभात खबर डॉट कॉम (Prabhat Khabar) में सीनियर कंटेंट राइटर के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. अरबिंद नेशनल, इंटरनेशनल और स्पोर्ट्स कैटेगरी में अपनी लेखनी के लिए जाने जाते हैं. गहरी रिसर्च पर आधारित स्पेशल स्टोरीज, रिपोर्टिंग और जटिल मुद्दों पर आसान भाषा में 'एक्सप्लेनर' लिखना उनकी मुख्य यूएसपी (USP) है.

झारखंड की समृद्ध संस्कृति और लोक परंपराओं में उनकी गहरी रुचि है. अपनी उत्कृष्ट और सरोकार से जुड़ी रिपोर्टिंग के लिए उन्हें संस्थान स्तर पर कई बार सम्मानित और पुरस्कृत भी किया जा चुका है.

करियर का सफरनामा

अरबिंद ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत देश की प्रतिष्ठित बहुभाषी न्यूज एजेंसी 'हिंदुस्थान समाचार' से बतौर रिपोर्टर की थी. इसके बाद उन्होंने प्रसार भारती के अंग दूरदर्शन और आकाशवाणी के साथ भी काम किया, जहां उन्होंने एंकरिंग, वॉइस-ओवर और रिपोर्टिंग के गुर सीखे. साल 2011 में वह 'प्रभात खबर डॉट कॉम' से जुड़े और तब से लगातार डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं.

प्रमुख उपलब्धियां और ग्राउंड रिपोर्टिंग

खेल पत्रकारिता और जमीनी रिपोर्टिंग में अरबिंद का योगदान उल्लेखनीय रहा है. उनकी कुछ सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल हैं:

34वें राष्ट्रीय खेल: झारखंड में आयोजित ऐतिहासिक 34वें नेशनल गेम्स की बेहतरीन और व्यापक ग्राउंड रिपोर्टिंग.

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट: रांची के जेएससीए (JSCA) स्टेडियम में आयोजित कई इंटरनेशनल क्रिकेट मैचों को करीब से कवर किया.

पुरुष हॉकी वर्ल्ड कप (2018): भुवनेश्वर में आयोजित वर्ल्ड कप के फाइनल मुकाबले की शानदार स्पोर्ट्स रिपोर्टिंग.

पंचायतनामा: प्रभात खबर के इस खास विंग के लिए ग्रामीण इलाकों का दौरा कर कई प्रेरक 'सक्सेस स्टोरीज' लिखीं.

शैक्षणिक योग्यता (Education & Credentials)

UGC NET: साल 2019 में यूजीसी नेट (UGC NET) की परीक्षा उत्तीर्ण की.

बैचलर ऑफ जर्नलिज्म (BJMC): रांची विश्वविद्यालय से साल 2011 में पत्रकारिता में स्नातक की डिग्री हासिल की.

एम.ए. (नागपुरी भाषा): रांची विश्वविद्यालय के 'जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग' से साल 2009 में नागपुरी भाषा में स्नातकोत्तर (MA) की डिग्री हासिल की.

लेखन शैली और विशेषज्ञता: एक्सप्लेनर, रिसर्च बेस्ड स्टोरीज, स्पोर्ट्स जर्नलिज्म, इंटरनेशनल अफेयर्स और झारखंड की लोक-संस्कृति.

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