...तो दशहरी आम के जायके से महरूम रहेगी बाकी दुनिया
Author : ArbindKumar Mishra Published by : Prabhat Khabar Updated At : 16 Apr 2020 3:49 PM
कोविड-19 (COVID-19) संक्रमण (Coronavirus Lockdown) के मद्देनजर दुनिया के अनेक देशों में जारी लॉकडाउन (Coronavirus ) के कारण ये मुल्क दशहरी समेत तमाम किस्मों के आम के जायके से महरूम रह जाएंगे.
नयी दिल्ली /लखनऊ : कोविड-19 संक्रमण के मद्देनजर दुनिया के अनेक देशों में जारी लॉकडाउन के कारण ये मुल्क दशहरी समेत तमाम किस्मों के आम के जायके से महरूम रह जाएंगे.
इससे परेशान हिन्दुस्तान के आम उत्पादकों को पूर्णबंदी के चलते लागू बंदिशों की वजह से फसल के बरबाद होने की आशंका भी सता रही है. लॉकडाउन के कारण प्रदूषण कम होने से मौजूदा मौसम आम की फसल के लिये साजगार तो है, लेकिन सिंचाई और दवा वगैरह के छिड़काव के लिये मजदूर न मिल पाने की वजह से फसल खराब होने की आशंका भी है.
साथ ही आम बागवानों को यह भी डर है कि अगर लॉकडाउन लम्बा खिंचा तो आम मंडियों तक नहीं पहुंच पाएगा. तब या तो वह डाल पर ही सड़ जाएगा, या फिर कौड़ियों के भाव बिकेगा. मैंगो ग्रोवर्स एसोसिएशन आफ इंडिया के अध्यक्ष इंसराम अली ने लॉकडाउन के कारण उपजी स्थितियों पर गहरी चिंता जाहिर करते हुए बताया कि लॉकडाउन के कारण मजदूर न मिलने की वजह से आम की सिंचाई नहीं हो पा रही है.
पूर्णबंदी की वजह से आम को सुरक्षित रखने के लिये पेटियां बनाने वाली फैक्ट्रियां भी बंद हैं. ऐसे में जब एक जिले से दूसरे जिले तक में आम पहुंचाना मुमकिन नहीं है, तो दूसरे देशों में उसका निर्यात करना खामख्याली ही है. उन्होंने कहा कि इस बार पूरी आशंका है कि दुनिया के बाकी देश लखनवी दशहरी समेत आम की तमाम किस्मों के जायके से महरूम रह जाएंगे.
दशहरी आम अमेरिका, सऊदी अरब, कुवैत, कतर, बहरीन, सिंगापुर, ब्रिटेन, बांग्लादेश, नेपाल तथा पश्चिम एशिया के लगभग सभी देशों में निर्यात होता है. पिछले साल करीब 40 हजार मीट्रिक टन आम निर्यात हुआ था. इस साल किसान सोच रहा है कि लॉकडाउन में उसका आम स्थानीय बाजार में ही पहुंचकर बिक जाए तो बड़ी बात होगी.
अली ने कहा कि इस साल प्रदेश में 30-35 लाख मीट्रिक टन आम उत्पादन होने की उम्मीद है. हालांकि अभी आम की फसल पूरी तरह तैयार होने में एक महीना बाकी है, लेकिन अगर 20-25 दिन ऐसे ही लॉक डाउन रहा तो हालात बहुत खराब हो जाएंगे. तब सड़ने से बचा आम सड़कों पर फेंकना पड़ेगा, क्योंकि यह कोई सब्जी या दवा नहीं है कि लोग उसे खरीदें ही.
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उन्होंने सरकार से मांग की कि वह आम उत्पादकों को भी किसानों की ही तरह लॉकडाउन में छूट दे, ताकि वे बागों में जाकर अपना काम कर सकें. साथ ही वह गेहूं और धान की तरह आम का भी न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित कर उसे खरीदे ताकि आम के उत्पादकों को बरबाद होने से बचाया जा सके.
मशहूर आम बागवान कलीम उल्ला ने कहा कि हालात यूं ही रहे तो आम की फसल मंडियों तक नहीं पहुंच पायेगी. तब आम बागों में ही सड़ जाएगा. अगर सरकार ने आम को मंडी में लाने की व्यवस्था की, तो भी उसे तौलने और बेचने के लिये मजदूर नहीं मिलेंगे. उन्होंने कहा कि निर्यात नहीं होने की वजह से आम स्थानीय बाजारों में कौड़ियों के दाम बिकेगा.
दोनों ही सूरत में आम उत्पादक का बरबाद होना तय है. मालूम हो कि उत्तर प्रदेश में लखनऊ स्थित मलीहाबाद, बाराबंकी, प्रतापगढ़, उन्नाव के हसनगंज, हरदोई के शाहाबाद, सहारनपुर, मेरठ तथा बुलंदशहर समेत करीब 15 मैंगो बेल्ट हैं. पूरे देश का करीब 23 प्रतिशत आम उत्पादन उत्तर प्रदेश में होता है.
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अरबिंद कुमार मिश्रा वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में एक अनुभवी पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. अप्रैल 2011 से संस्थान का हिस्सा रहे अरबिंद के पास पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर और डेस्क एडिटर 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वह नेशनल और इंटरनेशनल डेस्क की जिम्मेदारी संभालने के साथ-साथ एक पूरी शिफ्ट का नेतृत्व (Shift Lead) भी कर रहे हैं. विशेषज्ञता और अनुभव अरबिंद की लेखनी में खबरों की गहराई और स्पष्टता है. उनकी मुख्य विशेषज्ञता इन क्षेत्रों में है. राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मामले: वैश्विक राजनीति और देश की बड़ी घटनाओं पर पैनी नजर. खेल पत्रकारिता: झारखंड में आयोजित 34वें नेशनल गेम्स से लेकर JSCA स्टेडियम में हुए कई अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैचों की ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव. झारखंड की संस्कृति: राज्य की कला, संस्कृति और जनजातीय समुदायों की समस्याओं और उनकी जीवनशैली पर विशेष स्टोरीज. पंचायतनामा: ग्रामीण विकास और जमीनी मुद्दों पर 'पंचायतनामा' के लिए विशेष ग्राउंड रिपोर्टिंग. करियर का सफर प्रभात खबर डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत करने वाले अरबिंद ने पत्रकारिता के हर आयाम को बखूबी जिया है. डिजिटल मीडिया की बारीकियों को समझने से पहले उन्होंने आकाशवाणी (All India Radio) और दूरदर्शन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में एंकरिंग के जरिए अपनी आवाज और व्यक्तित्व की छाप छोड़ी है. शिक्षा और योग्यता UGC NET: अरबिंद मिश्रा ने यूजीसी नेट (UGC NET) उत्तीर्ण की है. मास्टर्स (MA): रांची यूनिवर्सिटी के जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग से एमए की डिग्री. ग्रेजुएशन: रांची यूनिवर्सिटी से ही मास कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म में स्नातक.
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