डिंपल ने बचाई यदुकुल कुनबे की लाज, लोकसभा में मुलायम के निधन से 'शून्य हो गया था यादव परिवार' पढ़ें

डिंपल यादव ने मैनपुरी लोकसभा सीट से चुनाव जीतकर मुलायम सिंह यादव की विरासत बचाने के साथ ही लोकसभा में यदुकुल कुनबे की शून्य की संख्या को खत्म किया है. इसका निकाय चुनाव में सपा को फायदा मिलने की उम्मीद है. मैनपुरी लोकसभा सीट पर डिंपल यादव ने रिकॉर्ड 288461 वोट से जीत हासिल की है.
Bareeilly News: सपा प्रमुख अखिलेश यादव की पत्नी डिंपल यादव ने मैनपुरी लोकसभा सीट से चुनाव जीतकर मुलायम सिंह यादव की विरासत बचाने के साथ ही लोकसभा में यदुकुल कुनबे की शून्य की संख्या को खत्म किया है. इसका निकाय चुनाव में सपा को फायदा मिलने की उम्मीद है. मैनपुरी लोकसभा सीट पर डिंपल यादव ने रिकॉर्ड 288461 वोट से जीत हासिल की है.
समाजवादी पार्टी (सपा) के संस्थापक और यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के निधन से देश का सबसे बड़ा यदुकुल सियासी कुनबा लोकसभा में शून्य हो गया था. हालांकि, कभी मुलायम सिंह यादव परिवार के आधे दर्जन सदस्य लोकसभा में हुआ करते थे, लेकिन उनके निधन के बाद लोकसभा में इस परिवार का कोई सदस्य नहीं बचा था. क्योंकि, उनके भतीजे धर्मेंद्र यादव बदायूं, और पुत्रवधू डिंपल यादव कन्नौज लोकसभा सीट से 2019 में चुनाव हार गई थीं, जबकि अखिलेश यादव ने विधानसभा चुनाव 2022 में करहल से विधायक बनने के बाद आजमगढ़ लोकसभा सीट से इस्तीफा दे दिया था.
उनके इस्तीफे के बाद पूर्व सांसद धर्मेंद्र यादव आजमगढ़ से उप चुनाव लड़े, लेकिन वह भाजपा प्रत्याशी से चुनाव हार गए. इसके बाद यदुकुल खानदान के सिर्फ मुलायम सिंह यादव लोकसभा में बचे थे, लेकिन उनका 10 अक्टूबर को गुड़गांव के मेदांता अस्पताल में निधन हो गया था. इसके बाद यदुकुल कुनबे की लोकसभा में संख्या शून्य हो गई थी. मगर, डिंपल यादव ने मैनपुरी सीट से उपचुनाव को जीतकर लोकसभा में यदुकुल कुनबे की शून्य को खत्म कर दिया है. डिंपल यादव ने गुरुवार को ही भाजपा प्रत्याशी से लंबे अंतर से जीत हासिल की है.
मैनपुरी लोकसभा सीट पर उपचुनाव के दौरान सपा प्रमुख अखिलेश यादव अपनी पत्नी डिंपल यादव के साथ प्रसपा अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव के घर पहुंचे थे. सैफई में चाचा-भतीजे के बीच डिंपल की मौजूदगी में गिले-शिकवे दूर हुए. इसके बाद शिवपाल सिंह यादव ने कड़ी मेहनत से डिंपल यादव का चुनाव लड़ाया. इसमें डिंपल यादव की जीत हुई. इसके बाद गुरुवार को ही सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने साइकिल का सिंबल शिवपाल सिंह यादव को सौंपा. उन्होंने अपनी पार्टी का सपा में विलय कर दिया है.
इसके साथ ही सोशल मीडिया के पर्सनल अकाउंट पर खुद को समाजवादी नेता लिखा है. इससे अब यूपी में सियासी समीकरण बदलने की उम्मीद जताई जा रही है. इसके साथ ही सपाइयों में भी काफी खुशी है. यूपी में कुछ दिन बाद ही निकाय चुनाव हैं. चाचा-भतीजे के साथ आने से बदलाव होना तय है. निकाय चुनाव के रिजल्ट में भी सपा के मजबूत होने की उम्मीद जताई जा रही है. क्योंकि, शिवपाल सिंह यादव संगठन के मामले में काफी काबिल हैं.
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रिपोर्ट- मुहम्मद साजिद, बरेली
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By Sohit Kumar
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