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Project Cheetah: जंगल में जिसके पहुंचते ही फैल जाती है दहशत, जानें रफ्तार के बादशाह का नाम कैसे पड़ा चीता

Updated at : 17 Sep 2022 11:39 AM (IST)
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Project Cheetah: जंगल में जिसके पहुंचते ही फैल जाती है दहशत, जानें रफ्तार के बादशाह का नाम कैसे पड़ा चीता

Project Cheetah in India: पीएम नरेंद्र मोदी के 72वें जन्मदिन पर हिंदुस्तान को एक बड़ी सौगात मिली है. साल 1952 से चीतों के विलुप्त देशों में शामिल भारत आज से फिर चीतों वाला देश बन गया है. पीएम मोदी आज इन चीतों को मध्य प्रदेश के कुनो राष्ट्रीय उद्यान में छोड़ा है.

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Project Cheetah: भारत में 1952 में चीता को देश में विलुप्त (Extinct) घोषित कर दिया गया था, लेकिन अब वो दौर सिर्फ इतिहास बनकर रह गया है, ऐसा इसलिए क्योंकि हिंदुस्तान की धरती पर रफ्तार भरने के लिए आज नामीबिया से 8 चीते आ चुके हैं. पीएम नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने अपने जन्मदिवस के अवसर पर इन चीतों को मध्य प्रदेश (MP) के कुनो राष्ट्रीय उद्यान (Kuno National Park) में छोड़ दिया. क्या आप जानते हैं कि ये चीता शब्द कैसे आया, अगर नहीं, तो चिंता की कोई बात नहीं चलिए हम आपको बताते हैं.

चीता शब्द की उत्पत्ति कैसे हुई

दरअसल, चीता शब्द की उत्पत्ति संस्कृत शब्द चित्रकायः से हुई है जोकि हिंदी चीता के माध्यम से आई है और जिसका अर्थ होता है बहुरंगी शरीर वाला. बिल्ली के कुल (Cat family) में आने वाला चीता (एसीनोनिक्स जुबेटस) अपनी अदभुत फूर्ती और रफ्तार के लिए पहचाना जाता है. यह एसीनोनिक्स प्रजाति (Acinonyx species) के अंतर्गत रहने वाला एकमात्र जीवित सदस्य है, जो कि अपने पंजों की बनावट के रूपांतरण के कारण पहचाने जाते हैं.

धरती पर रहने वाला सबसे तेज जानवर है चीता

दरअसल, जमीन पर रहने वाला ये सबसे तेज रफ्तार वाला जानवर है जो एक छोटी सी छलांग में 120 कि॰मी॰ प्रति घंटे तक की गति (Speed) प्राप्त कर लेता है. मात्र तीन सेकेंड के अंदर ये अपनी रफ्तार में 103 कि॰मी॰ प्रति घंटे का इजाफा कर लेता है, जोकि अधिकतर सुपरकार की रफ्तार से भी तेज है. हालिया अध्ययन (Study) से ये साबित हो चुका है कि धरती पर रहने वाला चीता सबसे तेज जानवर है.

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1952 में चीता को देश में विलुप्त घोषित कर दिया गया था

बता दें, भारत में चीतों की आबादी 19वीं शताब्दी के दौरान घट गई थी. इसकी मुख्य कारण स्थानीय राजाओं और ब्रिटिश अधिकारियों द्वारा चीतों का शिकार करना था. एक दिन ऐसा आया जब साल 1948 में अंतिम तीन एशियाई चीतों का शिकार किया गया और 1952 में चीता को देश में विलुप्त घोषित कर दिया गया था. उसके बाद से भारत में कोई चीता नहीं था, लेकिन अब पीएम के जन्मदिन के अवसर पर 8 विदेशी चीता भारत आ चुके हैं.

आठ चीतों में पांच मादा और तीन नर शामिल हैं

नामीबिया से इन चीतों को लेकर बोइंग 747-400 (Boeing 747-400) विमान भारत आया है. नामीबिया के विंडहोक से कुल आठ चीता भारत लाए गए हैं. इनमें पांच मादा और तीन नर- चीता शामिल हैं. पीएम मोदी ने चीतों को मध्य प्रदेश के कुनो राष्ट्रीय उद्यान (Kuno National Park) में छोड़ दिया है.

एक महीने तक  क्वारंटीन सेंटर में रखे जाएंगे चीता

चीतों को एक महीने तक के लिए क्वारंटीन सेंटर में रखा जाएगा. यहां नर और मादा चीतों को अलग-अलग रखा गया है. इस दौरान उनकी सेहत की निगरानी की जाएगी. अनाधिकृत व्यक्तियों को एक महीने के लिए बाड़े से प्रतिबंधित कर दिया जाएगा और संभावित संक्रमण से बचाने के लिए उस समय के लिए इसे पर्दों से ढक दिया जाएगा.

Posted By Sohit Kumar

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Sohit Kumar

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By Sohit Kumar

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