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बरेली के सपाइयों में रामपुर-आजमगढ़ की हार के बाद कलह, पार्टी नेतृत्व पर उठने लगे सवाल

Updated at : 27 Jun 2022 9:08 PM (IST)
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बरेली के सपाइयों में रामपुर-आजमगढ़ की हार के बाद कलह, पार्टी नेतृत्व पर उठने लगे सवाल

दोनों लोकसभा सीट पर सपा प्रत्याशियों की हार के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं में काफी गुस्सा है. जिसके चलते कार्यकर्ता और नेता सपा नेतृत्व के फैसलों पर ही सवाल खड़े करने लगे हैं. उनका कहना है कि पार्टी की लगातार हार के लिए पार्टी नेतृत्व जिम्मेदार है. पार्टी की तरफ से कोई काम नहीं किया जा रहा है.

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Bareilly News: समाजवादी पार्टी (सपा) का गढ़ रामपुर और आजमगढ़ भाजपा ने रविवार को ध्वस्त कर दिया है. दोनों लोकसभा सीट पर सपा प्रत्याशियों की हार के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं में काफी गुस्सा है. इसके चलते कार्यकर्ता और नेता सपा नेतृत्व के फैसलों पर ही सवाल खड़े करने लगे हैं. उनका कहना है कि पार्टी की लगातार हार के लिए पार्टी नेतृत्व जिम्मेदार है. पार्टी की तरफ से कोई काम नहीं किया जा रहा है.

विधानसभा चुनाव की तरह लोकसभा के उपचुनाव में किसी नेता-कार्यकर्ता की रामपुर – आजमगढ़ में ड्यूटी तक नहीं लगी थी, जबकि भाजपा की मंत्रियों से लेकर संगठन की पूरी फौज लगी थी.सीएम योगी आदित्यनाथ चुनाव प्रचार को भी गए थे.मगर, सपा प्रमुख एसी कमरों से निकले ही नहीं.इसका पार्टी को बड़ा नुकसान हो रहा है.सोशल मीडिया पर सपाइयों के बीच कलह बढ़ती जा रही है.जिसके चलते जिला महासचिव ने फेसबुक पर पार्टी के खिलाफ बोलने वालों पर कार्रवाई की चेतवानी दी है.

प्रदेश अध्यक्ष को भेजे साक्ष्य

जिला महासचिव योगेश यादव ने फेसबुक पर लिखा है कि सोशल मीडिया पर पार्टी नेतृत्व के विरुद्ध टिप्पणियां पार्टी के जिम्मेदार लोग मौखिक एवं लिखित रूप से कर रहे हैं. जिसके साक्ष्य पार्टी संगठन को दिए गए हैं. ऐसे लोगों के विरुद्ध प्रदेश नेतृत्व को अवगत कराया गया है. जल्द ही कार्रवाई करने को लिखा गया है. अनुशासनहीनता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा. क्या अनुशासन के बिना पार्टी मजबूत हो सकती है.इस पर जिला उपाध्यक्ष प्रीति मौर्या ने लिखा है भाई… हार की हताशा है. राष्ट्रीय नेतृत्व पर इस तरह की पोस्ट एवं टिप्पणियों से साथियों का मनोबल टूटता है. ऋषिपाल पहाड़िया ने लिखा है, जिन कार्यकर्ताओं ने विधानसभा चुनाव में कड़ाके की ठंड में रात के 3:00 बजे तक पार्टी का काम किया है. उन्हें नजरअंदाज किया जाए,तो बताइए क्या करें? फिर संगठन के लोग उनसे बात भी नहीं करते हैं.

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संगठन के सैयद हैदर अली ने एकदम सहमत होने की बात लिखी है, तो वही विशाल अग्रवाल ने ओपी राजभर का अखिलेश यादव पर हुए हमले की फोटो के साथ पोस्ट डाली है, और लिखा है यह कब बाहर होंगे? ह्रदेश यादव ने लिखा है कि, यदि सही और गलत का आकलन करके कार्रवाई हो जाए,तो संगठन में सुधार हो जाएगा. इसके साथ ही अरविंद आनंद, नौशाद खान समाजवादियों ने अपनी -अपने विचार लिखे हैं. मगर, यह कलह क्यों है, क्या कमी रही.इस पर पार्टी की तरफ से कोई मंथन भी नहीं है.सपा संरक्षक मुलायम सिंह की यादव और लाखों कार्यकर्ताओं की कड़ी मेहनत से बनी पार्टी के बर्बाद होने पर कार्यकर्ताओं को तकलीफ होना लाजिमी है.

रिपोर्ट : मुहम्‍मद साज‍िद

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