गाजीपुर : भाजपा और सपा-बसपा के बीच है कांटे की टक्कर, 2004 के बाद अफजाल अंसारी व मनोज सिन्हा फिर आमने-सामने
Updated at : 05 May 2019 7:02 AM (IST)
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गाजीपुर से पंकज कुमार पाठक करीब डेढ़ दशक के बाद चुनावी रणक्षेत्र में अफजाल अंसारी और केंद्रीय मंत्री मनोज सिन्हा आमने-सामने हैं. गाजीपुर लोकसभा क्षेत्र में सपा-बसपा और भाजपा के बीच मुकाबला कड़ा है. कांग्रेस ने भी इस सीट से अजीत काे टिकट दिया है. मतदाता बंटे हुए हैं. मुकाबला कड़ा है. पिछले लोकसभा चुनाव […]
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गाजीपुर से पंकज कुमार पाठक
करीब डेढ़ दशक के बाद चुनावी रणक्षेत्र में अफजाल अंसारी और केंद्रीय मंत्री मनोज सिन्हा आमने-सामने हैं. गाजीपुर लोकसभा क्षेत्र में सपा-बसपा और भाजपा के बीच मुकाबला कड़ा है. कांग्रेस ने भी इस सीट से अजीत काे टिकट दिया है. मतदाता बंटे हुए हैं. मुकाबला कड़ा है. पिछले लोकसभा चुनाव 2014 में विजयी भाजपा प्रत्याशी मनोज सिन्हा को 3,06,929 मत मिले थे. वह सिर्फ 32,452 मत से जीते थे.
पांच सालों में कितना हुआ इस क्षेत्र में काम
जमनिया ब्लॉक के बिटौसा गांव के दीपक कहते हैं, पहले ऐसी सड़क नहीं थीं. गाजीपुर रेलवे स्टेशन का काम हुआ है. ट्रेनों की संख्या बढ़ी है. स्वच्छता को लेकर काम हुआ है. गांव-गांव में शौचालय है.
मनोज सिन्हा ने काम किया है. वहीं पेशे से वकील दिनेश कहते हैं, देखिए, मैं मानता हूं कि ये सारे काम हुए हैं, लेकिन इसके अलावा भी गाजीपुर की समस्याएं हैं. उन पर सरकार ने ध्यान नहीं दिया. चीनी मिलें बंद पड़ी हैं. सरकार ने वादा किया था चालू करायेंगे. अबतक यह काम नहीं हुआ. मिल के कई मजदूरों के पास काम नहीं है. बेरोजगारी सबसे बड़ी समस्या है. गाजीपुर में 200 बेड का अस्पताल है, जिसमें सिर्फ दो डॉक्टर हैं. इमरजेंसी में बाहर जाना पड़ता है.
हिंसक था 2004 का चुनाव, नहीं याद करना चाहते लोग
गाजीपुर में लोग 2004 के चुनाव की ज्यादा चर्चा नहीं करना चाहते. इस सवाल से भागते हैं. मैंने जब चुनाव में हुई हिंसा का जिक्र किया, तो कहने लगे, गाजीपुर की छवि इसी वजह से खराब है. यहां के युवा जब बाहर काम करने जाते हैं, तो उन्हें दूसरी नजर से देखा जाता है.
साल 2004 में मतदान के दिन सरेआम दो लोगों की गोली मार कर हत्या कर दी गयी थी. उस वक्त मनोज सिन्हा गाजीपुर सांसद थे. उनका मुकाबला सपा प्रत्याशी व बाहुबली विधायक मुख्तार अंसारी के बड़े भाई अफाजल अंसारी से था. 2004 इसलिए भी याद किया जा रहा है, क्योंकि दोनों एक बार फिर चुनावी मैदान में हैं.
लगातार तीन बार जीत किसी को नहीं मिली
गाजीपुर में किसी भी दल के उम्मीवार ने लगातार तीन बार चुनाव नहीं जीता. कांग्रेस के हर प्रसाद सिंह 1952 व 1957 के बाद चुनाव मैदान से बाहर हो गये. भाकपा के सरजू पांडेय भी 1967 व 1971 के बाद संसद नहीं पहुंच सके. 1980 में इंदिरा लहर में और फिर 1984 में चुनाव जीतने वाले जैनुल बशर भी हैट्रिक नहीं लगा पाये.
बेरोजगारी है बड़ा मुद्दा
रोजगार के मामले में यहां के हालात इस कदर बिगड़े हुए हैं कि करीब डेढ़ लाख युवा दूसरे प्रदेशों को पलायन कर चुके हैं. सेवा योजन कार्यालय के अनुसार 73069 बेरोजगार पंजीकृत हैं. पांच वर्षों में 43 बार रोजगार मेले लगे, जिनमें 3087 युवाओं को रोजगार मिला. अफीम फैक्ट्री को छोड़ दें, तो यहां कोई बड़ा उद्योग नहीं है. यह क्षेत्र गन्ने की खेती पर निर्भर था, पर नंदगंज की एकमात्र चीनी मिल भी बंद है.
वोट समीकरण
18,51, 875 कुल मतदाता
1009105 पुरुष मतदाता
842670 महिला मतदाता
100 अन्य
19, 253
युवा मतदाता
जातिगत समीकरण
इस लोकसभा क्षेत्र में यादव, दलित, बिंद, मुस्लिम समेत ओबीसी बड़ी तादाद में हैं. वहीं ब्राह्मण, क्षत्रिय, भूमिहार भी निर्णायक स्थिति में हैं.
अनुमानित जातीय आंकड़े
यादव3.75 से 4 लाख
बिंद1.50 से 1.75 लाख
ब्राह्मण80 हजार से 1 लाख
दलित3.50 से 4 लाख
कुशवाहा1.50 से 1.75 लाख
राजभर75 हजार से 1 लाख
अन्य ओबीसी 3 लाख
मुस्लिम1.50 से 1.75 लाख
भूमिहार50 हजार से अधिक
क्षत्रिय1.75 से 2 लाख
वैश्य90 हजार से 1 लाख
अन्य सवर्ण जातियां50 हजार
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