Rajasthan Political Crisis: 'मैं कभी हाईकमान को चुनौती नहीं दूंगा', सोनिया गांधी से बोले अशोक गहलोत
Published by : ArbindKumar Mishra Updated At : 27 Sep 2022 8:12 PM
**EDS: FILE IMAGE** Jaipur: In this Tuesday, March 26, 2019 file photo the rebel Congress leader Sachin Pilot (R) is seen with the then Congress President Rahul Gandhi and Rajasthan Chief Minister Ashok Gehlot during a party function in Jaipur. Pilot was on Tuesday, July 14, 2020 removed from posts of Rajasthan deputy chief minister and state unit president.(PTI Photo) (PTI14-07-2020_000054B) *** Local Caption ***
कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी से फोन पर बातचीत के दौरान अशोक गहलोत ने साफ कर दिया कि हाईकमान को कभी भी चुनौती नहीं देंगे. साथ ही उन्होंने यह भी कह दिया कि हाईकमान का जो भी फैसला होगा, वो उन्हें मंजूर होगा.
राजस्थान कांग्रेस में भूचाल के बीच मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने पहली बार अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी से बात की है. फोन पर हुई बातचीत में गहलोत ने साफ कर दिया कि वो हाईकमान के प्रति अपनी निष्ठा रखते हैं, उसको कभी भी चुनौती नहीं देंगे.
हाईकमान का फैसला मंजूर : अशोक गहलोत
कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी से फोन पर बातचीत के दौरान अशोक गहलोत ने साफ कर दिया कि हाईकमान को कभी भी चुनौती नहीं देंगे. साथ ही उन्होंने यह भी कह दिया कि हाईकमान का जो भी फैसला होगा, वो उन्हें मंजूर होगा.
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अशोक गहलोत को हाईकमान से क्लीन चिट
खबर है राजस्थान कांग्रेस में बवाल मामले में सोनिया गांधी ने अशोक गहलोत को क्लीन चिट दे दी है. साथ ही गहलोत गुट के बागी विधायकों पर कार्रवाई करने का आदेश दे दिया है. टीवी रिपोर्ट के अनुसार पर्यवेक्षक अजय माकन और मल्लिकार्जुन खड़गे ने सोनिया गांधी को 9 पन्नों की रिपोर्ट सौंपी थी, जिसमें बागी विधायकों पर कार्रवाई की सिफारिश की थी.
राजस्थान कांग्रेस में बवाल के पीछे क्या है कारण
राजस्थान कांग्रेस में बवाल तब शुरू हुआ, जब मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कांग्रेस अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ने का फैसला किया. ऐसे में सवाल उठने लगा कि राजस्थान मुख्यमंत्री की कुर्सी का क्या होगा. सबकी नजरें सचिन पायलट पर जम गयीं. लेकिन गहलोत गुट के विधायकों ने पायलट का जमकर विरोध किया और अपना इस्तीफा तक दे दिया. विधायक दल की बैठक को भी रद्द करना पड़ा. गहलोत ने भी खुलकर कभी सचिन पायलट का मुख्यमंत्री पद के कभी समर्थन नहीं किया. लेकिन राहुल गांधी के एक व्यक्ति एक पद के संदेश के बाद गहलोत के तेवर नरम पड़े. इधर राजस्थान में बवाल को शांत कराने के लिए दिल्ली से पर्यवेक्षकों की टीम भेजी गयी, लेकिन विधायकों ने उनकी बात मनाने से इनकार कर दिया.
राजस्थान कांग्रेस के बागी विधायकों ने रखी तीन शर्तें
राजस्थान कांग्रेस के बागी विधायकों ने तीन शर्तें रखी. जिसमें राजस्थान के नये मुख्यमंत्री का ऐलान 19 अब्टूबर के बाद हो. दूसरा सभी विधायकों से अलग-अलग बात न कर एक साथ बात की जाए. तीसरा और आखिरी शर्त राजस्थान का नया मुख्यमंत्री गहलोत गुट का होना चाहिए.
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अरबिंद कुमार मिश्रा वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में एक अनुभवी पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. अप्रैल 2011 से संस्थान का हिस्सा रहे अरबिंद के पास पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर और डेस्क एडिटर 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वह नेशनल और इंटरनेशनल डेस्क की जिम्मेदारी संभालने के साथ-साथ एक पूरी शिफ्ट का नेतृत्व (Shift Lead) भी कर रहे हैं. विशेषज्ञता और अनुभव अरबिंद की लेखनी में खबरों की गहराई और स्पष्टता है. उनकी मुख्य विशेषज्ञता इन क्षेत्रों में है. राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मामले: वैश्विक राजनीति और देश की बड़ी घटनाओं पर पैनी नजर. खेल पत्रकारिता: झारखंड में आयोजित 34वें नेशनल गेम्स से लेकर JSCA स्टेडियम में हुए कई अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैचों की ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव. झारखंड की संस्कृति: राज्य की कला, संस्कृति और जनजातीय समुदायों की समस्याओं और उनकी जीवनशैली पर विशेष स्टोरीज. पंचायतनामा: ग्रामीण विकास और जमीनी मुद्दों पर 'पंचायतनामा' के लिए विशेष ग्राउंड रिपोर्टिंग. करियर का सफर प्रभात खबर डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत करने वाले अरबिंद ने पत्रकारिता के हर आयाम को बखूबी जिया है. डिजिटल मीडिया की बारीकियों को समझने से पहले उन्होंने आकाशवाणी (All India Radio) और दूरदर्शन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में एंकरिंग के जरिए अपनी आवाज और व्यक्तित्व की छाप छोड़ी है. शिक्षा और योग्यता UGC NET: अरबिंद मिश्रा ने यूजीसी नेट (UGC NET) उत्तीर्ण की है. मास्टर्स (MA): रांची यूनिवर्सिटी के जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग से एमए की डिग्री. ग्रेजुएशन: रांची यूनिवर्सिटी से ही मास कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म में स्नातक.
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