Rourkela News: वेदव्यास में नहीं बनेगा हैंगिंग ब्रिज, कंक्रीट पुल की डीपीआर तैयार

Updated at : 17 Jan 2026 1:14 AM (IST)
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Rourkela News: वेदव्यास में नहीं बनेगा हैंगिंग ब्रिज, कंक्रीट पुल की डीपीआर तैयार

Rourkela News: वेदव्यास में कंक्रीट पुल बनाने के लिए डीपीआर तैयार कर ली गयी है. अब मंत्री को इस पर अंतिम फैसला लेना है.

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Rourkela News: पवित्र वेदव्यास शैव पीठ को जोड़ने वाले कंक्रीट पुल की प्रारंभिक प्रक्रिया पूरी हो चुकी है. इस कार्य के लिए नियुक्त एसएम कंसल्टेंट्स ने पुल की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार कर निर्माण कंपनी ओबीसीसी को सौंप दी है. लेकिन यह निर्माण कब शुरू होगा, इसे लेकर गेंद राज्य के लोक निर्माण मंत्री के पाले में है.

डीपीआर में ब्राह्मणी नदी के तट का सौंदर्यीकरण, पैदल पथ और साइकिल ट्रैक भी शामिल

लोक निर्माण मंत्री की ओर से डीपीआर का अध्ययन करने के बाद इसे लोक निर्माण विभाग को भेजे जाने के बाद यह काम शुरू करने को लेकर मार्ग प्रशस्त होगा. इस डिजाइन में पुल के साथ-साथ वेदव्यास के निकट ब्राह्मणी नदी के तट के सौंदर्यीकरण को भी शामिल किया गया है. इसमें पैदल पथ और साइकिल ट्रैक भी शामिल हैं. 1200 मीटर लंबे और 8.5 मीटर चौड़े पुल और इसके आसपास के क्षेत्रों के लिए आवश्यक डिजाइन तैयार कर लिया गया है. राज्य के एक वरिष्ठ विभागीय अधिकारी के अनुसार, इसकी अनुमानित लागत 60 करोड़ रुपये है, जिसे सरकार ने मंजूरी दे दी है. इसके बाद निविदा प्रक्रिया शुरू होगी. विदित हो कि सांसद जुएल ओराम, पूर्व केंद्रीय मंत्री दिलीप राय और रघुनाथपाली विधायक दुर्गा चरण तांती समय-समय पर वेदव्यास में हैंगिंग ब्रिज की मांग करते रहे हैं. लेकिन हैंगिंग ब्रिज तो नहीं, लेकिन कंक्रीट पुल बनने के लिए डीपीआर तैयार होने से एक बार फिर उम्मीद जरूर जगी है.

लोक निर्माण मंत्री ने की थी वेदव्यास में कांच का पुल बनाने की घोषणा

मई, 2025 में राउरकेला दिवस समारोह में राज्य के लोक निर्माण एवं शहरी विकास मंत्री पृथ्वीराज हरिचंदन ने कहा था कि वेदव्यास में कांच का पुल बनेगा, जिसमें लोग पुल पर चलने के साथ नीचे नदी को भी देख पायेंगे. इस पर 35 करोड़ रुपये की राशि खर्च होगी. लेकिन अब कांच के पुल के स्थान पर कंक्रीट पुल बनने की डीपीआर तैयार होने से उनकी घोषणा महज एक जुमला साबित हुई है. यह पुल राउरकेला की ओर से पश्चिम की ओर वेदव्यास नदी को जोड़ने का एक प्रमुख साधन बनेगा. इसके साथ ही नदी तट को सुंदर बनाने के लिए भी कदम उठाये जायेंगे. जिससे उम्मीद है कि इस प्राचीन शैव स्थल और पर्यटन क्षेत्र का विकास होगा और राउरकेला तथा आसपास के क्षेत्रों का महत्व बढ़ेगा.

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BIPIN KUMAR YADAV

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