Sambalpur News: भगवान श्रीकृष्ण ने कंस वध कर अधर्म पर धर्म की जीत का दिया संदेश

Sambalpur News: कंस के वध के साथ ही 11 दिवसीय विश्व प्रसिद्ध 78वें बरगढ़ धनु यात्रा महोत्सव का समापन शनिवार शाम हो गया.
Sambalpur News: बरगढ़ (मथुरा शहर) में आयोजित 11 दिवसीय बरगढ़ धनु यात्रा महोत्सव का समापन शनिवार शाम कंस वध के साथ हो गया. भगवान कृष्ण ने अत्याचारी कंस का वध कर असत्य पर सत्य व अधर्म पर धर्म की जीत का संदेश दिया.
कंस का वध और उग्रसेन का हुआ राज्याभिषेक
बरगढ़ धनु यात्रा के आखिरी दिन कंस का वध और उग्रसेन का राज्याभिषेक हुआ, जिसका लाखों दर्शकों ने आनंद लिया. दुनिया के सबसे बड़े मुक्ताकाश रंग मंच के इस प्रसिद्ध महोत्सव की शुरुआत 24 दिसंबर 2025 को हुई थई. महाराजा कंस के राज के 11 दिनों में, कृष्ण की बाल लीलाओं से गोपुर में एक अलग ही माहौल बना. तब, अत्याचारी कंस से दुनिया के लोगों को बचाने के लिए खुद भगवान विष्णु कृष्ण के रूप में अवतरित हुए. दूसरी ओर, महाराजा कंस ने कृष्ण को मारने के लिए छल और चाल की यात्रा का आयोजन किया. धनु यात्रा के बहाने कृष्ण और बलराम को आमंत्रित किया और उन्हें मारने के लिए कई स्तर पर षड्यंत्र रचा. जब दोनों भाई मथुरा जा रहे थे, तो वे सबसे पहले हाटपाड़ा के उस चबूतरे पर पहुंचे, जहां शिव धनुष तोड़ दिया. इसके बाद, सेनापति ने भगवान कृष्ण के सामने समर्पण कर दिया और उन्हें लोक मंडप मैदान में राज दरबार में महाराजा कंस के पास ले गये. वहां मामा कंस और उनके भांजे कृष्ण-बलराम के बीच भयंकर युद्ध हुआ. कंस खुद भगवान विष्णु को कृष्ण के रूप में देखकर खड़ा हो गया और बोला कि तुमने बहुतों को मारा है, लेकिन तुम मुझे मुक्ति नहीं दोगे, अगर तुम मुझे अभी मार दोगे, तो मुझे मुक्ति मिल जायेगी. अत्याचारी कंस राज दरबार से गिर पड़ा और मारा गया. कंस की मौत के बाद, मथुरा में जश्न का माहौल था. कृष्ण ने बलराम को सत्ता की बागडोर सौंपी और उन्हें राजा बनाया. बाद में, वे मथुरा जेल गये और अपने माता-पिता, देवकी और वासुदेव को जेल से आजाद कराया.
धनु यात्रा में शिव धनुष तोड़ने का दृश्य बना आकर्षण का केंद्र
78वें बरगढ़ धनुयात्रा के अंतिम दिन शिव धनुष तोड़ने का दृश्य आकर्षण का केंद्र बना. भगवान शिव की कठोर तपस्या के पश्चात महाराज कंस को शिवधनुष की प्राप्ति हुई थी, जो उसकी शक्ति और सामर्थ्य का प्रतीक माना जाता था. शिवधनुष के बल पर कंस स्वयं को अजेय समझता था. गोपपुर से मथुरानगरी पहुंचे श्रीकृष्ण ने अनायास ही शिवधनुष को तोड़ दिया. यह समाचार मिलते ही महाराज कंस भय से कांप उठा और उसके मन में मृत्यु का डर और गहरा हो गया. बरगढ़ धनु यात्रा के अंतिम दिन हाटपाड़ा स्थित मंच पर श्रीकृष्ण के हाथों शिव धनुष तोड़ने का यह दृश्य अत्यंत प्रभावशाली और दर्शनीय रहा. सजीव अभिनय, मंच सज्जा और भावपूर्ण प्रस्तुति ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया. यह प्रसंग धनुयात्रा के सबसे आकर्षक और स्मरणीय दृश्यों में शामिल हो गया, जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे.कंस ने पुरी समुद्र में स्नान कर मांगी क्षमा
बरगढ़ धनु यात्रा में कंस की भूमिका निभाने वाले सुशील कुमार मेहर ने रविवार को समुद्र में डुबकी लगाकर अपने पापों को धोया. धनु यात्रा के अंतिम दिन सुशील मेहर श्री क्षेत्र पुरी की ओर रवाना हुए. वहीं रविवार को डुबकी लगाकर अपने जनेऊ को विसर्जित किया और सूर्य देवता को अर्घ दिया. इसके बाद वे श्री मंदिर गये और श्री जगन्नाथ के दर्शन किये. उन्होंने धनु यात्रा में कंस की भूमिका निभाते समय भगवान कृष्ण और बलराम के प्रति की गयी कठोर टिप्पणियों के लिए क्षमा मांगी. उन्होंने ऋषि-मुनियों को अपशब्द कहने के लिए भी क्षमा मांगी.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
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