Rourkela News: घर और दफ्तर पर सीबीआइ का छापा, आरपीएफ प्रभारी फरार
Published by : BIPIN KUMAR YADAV Updated At : 06 Jun 2026 11:31 PM
Rourkela News: राउरकेला आरपीएफ के आवास और दफ्तार पर सीबीआइ की टीम ने छापा मारा. इस दौरान कई महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद हुए.
Rourkela News: राउरकेला रेलवे स्टेशन में वेंडरों को अवैध रूप से सामान बेचने की अनुमति देने और इसके एवज में लाखों रुपये की वसूली के लगातार लग रहे आरोपों के बीच शुक्रवार देर शाम सीबीआइ की टीम ने राउरकेला रेल सुरक्षा बल (आरपीएफ) प्रभारी के दफ्तर और रेलवे कॉलोनी स्थित आवास में छापेमारी की.
सरकारी क्वार्टर में छापेमारी के दौरान आधे घंटे तक चला हाइ वोल्टेज ड्रामा
सीबीआइ की टीम आरपीएफ प्रभारी कमलेश समादार के दफ्तर में जांच कर कई अहम दस्तावेज अपने साथ ले गयी. वहीं आवास में छापेमारी करने पहुंची टीम को थोड़ी मशक्कत करनी पड़ी. आरपीएफ प्रभारी के परिजनों ने सीबीआइ टीम को करीब आधे घंटे तक क्वार्टर के अंदर घुसने से रोके रखा. क्वार्टर का दरवाजा बंद कर सीबीआइ को रोकने की कोशिश हुई, लेकिन शीर्ष अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद दरवाजा खुला और सीबीआइ की टीम ने घंटों जांच की. जांच के दौरान कई सुराग सीबीआइ के हाथ लगने की बात कही जा रही है.
एक दलाल की गिरफ्तारी के बाद सीबीआइ ने की कार्रवाई
सीबीआइ को पुख्ता साक्ष्य मिले हैं कि आरपीएफ प्रभारी दलालों के माध्यम से राउरकेला रेलवे स्टेशन में अवैध वेंडरों से ना केवल काम करा रहे थे, बल्कि अवैध वसूली भी कर रहे थे. सीबीआइ ने एक दलाल को गिरफ्तार किया है. इसकी पहचान अजय मिश्र के रूप में हुई है. उससे कई जानकारी भी सीबीआइ ने जुटायी है, जिसकी अभी जांच चल रही है.आरपीएफ प्रभारी फरार
हालांकि आरपीएफ प्रभारी सीबीआइ के हत्थे नहीं चढ़ पाये. छापेमारी और कार्रवाई की सूचना संभवत: पहले से मिल जाने के कारण वे फरार हो गये. सीबीआइ अब सभी जांच कर रही है और साक्ष्य जुटा रही है.
आरपीएफ प्रभारी को किया गया अटैच
सीबीआइ की कार्रवाई के बीच छह जून को चक्रधरपुर रेल मंडल कार्यालय ने आरपीएफ प्रभारी कमलेश समादार को अटैच कर दिया है. इसके लिए जारी आदेश में प्रभारी को तत्काल चक्रधरपुर रिपोर्ट करने को कहा गया है.कैसे चल रहा था धंधा
दरअसल राउरकेला रेलवे स्टेशन में अवैध वेंडरों के जरिये सामान की बिक्री की जाती थी. इसके एवज में उनसे एक तय रकम वसूली जा रही थी. जिसके लिए अजय मिश्र सहित बिट्टू को लगाया गया था. लगातार वसूली से परेशान वेंडरों के साथ समय-समय पर किसी न किसी बात को लेकर विवाद भी होता रहता था. जिसके बाद परेशान वेंडरों ने इस बारे में सीबीआइ को जानकारी दी थी. सभी तथ्य जुटाने के बाद सीबीआइ ने यह कार्रवाई की.
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