अपहृत जिप सदस्य को जंगल में छोड़ा

Updated at : 08 Jan 2017 4:15 AM (IST)
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अपहृत जिप सदस्य को जंगल में छोड़ा

किरीबुरू : पांच जनवरी की शाम करीब तीन बजे रोआम क्षेत्र से अपहृत पूर्व जिप सदस्य बामिया मांझी नाटकीय तरीके से शुक्रवार की रात करीब साढ़े आठ बजे चिरिया स्थित अपने घर सकुशल पहुंच गये. उसकी तलाश में सारंडा के ग्रामीण व पुलिस लगातार प्रयासरत रहे. उनके घर पहुंचने की खबर पाकर छोटानागरा थाना प्रभारी […]

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किरीबुरू : पांच जनवरी की शाम करीब तीन बजे रोआम क्षेत्र से अपहृत पूर्व जिप सदस्य बामिया मांझी नाटकीय तरीके से शुक्रवार की रात करीब साढ़े आठ बजे चिरिया स्थित अपने घर सकुशल पहुंच गये. उसकी तलाश में सारंडा के ग्रामीण व पुलिस लगातार प्रयासरत रहे. उनके घर पहुंचने की खबर पाकर छोटानागरा थाना प्रभारी ने बामिया से दूरभाष पर संपर्क साधा, जिसमें उन्होंने पुलिस को बताया कि गुरुवार के दिन वे रोआम बाजार गये थे, उसी दौरान 10-12 अज्ञात लोग उन्हें पकड़ जंगल ले गये एवं शुक्रवार करीब साढ़े चार बजे आकाहाटा गांव के जंगल में छोड़ दिया, जहां से वे पैदल चलकर रात करीब साढ़े आठ बजे चिरिया स्थित अपने घर पहुंचे. उन्होंने बताया कि अपहरणकर्ताअों को वे पहचानते हैं. इधर, मामले की छानबीन में पुलिस पदाधिकारी लगे हुए हैं.

घटना को लेकर बामिया के विस्तृत बयान लेने को पुलिस प्रयासरत है.पुलिस के बुलाने पर नहीं आये बामिया. सुबह पुलिस के संपर्क में आने से बाद से बामिया माझी भूमिगत हो गया है. सुबह छोटानागरा थाना प्रभारी से फोन पर बात होने के बाद पुलिस ने उसे पूछताछ के लिए थाने बुलाया था. इधर, गुवा में नक्सली घटना के बाद कांबिंग ऑपरेशन पर निकले एसपी अनिश गुप्ता भी घटना की सूचना पाकर बामिया से पूछताछ करने के लिए छोटानागरा थाने पहुंचे थे, लेकिन काफी इंतजार के बावजूद बामिया थाने नहीं आये. उनका फोन भी बंद आ रहा. खबर लिखे जाने तक छोटानागरा व चिरिया पुलिस बामिया की तलाश में जुटी हुई थी.

ठेका कंपनी के वाहनों को जलाने की घटना में नक्सलियों का हाथ होने बात प्राथमिक जांच में सामने आ रही है. हालांकि घटना को अंजाम देने के बाद नक्सलियों ने पोस्टरबाजी नहीं की है. पुलिस शनिवार सुबह से ही आसपास के इलाकों में कांबिंग ऑपरेशन चला रही है. अपहृत पूर्व जिप सदस्य बामिया मांझी घर लौट आये हैं, पुलिस उससे पूछताछ करेगी. -अनिश गुप्ता, एसपी पश्चिम सिंहभूम
घटना के पीछे लेवी मुख्य वजह
सड़क निर्माण कंपनी के वाहनों को जलाने के पीछे लेवी से जुड़ा मामला बताया जा रहा है. चर्चा है कि कंपनी व नक्सलियों के बीच डेढ़-दो करोड़ रुपये लेवी के रूप में एक मध्यस्थ के जरिये डील हुई थी. पर नक्सलियों को मध्यस्थ से कुछ लाख रुपये ही मिले. इससे आक्राेशित नक्सलियों ने इस घटना को अंजाम दिया है.
कंपनी से नक्सलियों ने कोई लेवी नहीं मांगी है. पिछले बार की घटना के बाद वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के कहने पर दोबारा काम शुरू किया गया. लेकिन फॉरेस्ट से जुड़े मामले को लेकर तीन महीनों तक काम बंद रहा. पुनः काम प्रारंभ किया गया था (जंगल क्षेत्र छोड़कर). पिछले बुधवार को काम में लगे वाहनों के ऑपरेटर से नक्सलियों द्वारा काम बंद करने व चाबी छीन लेने की जानकारी हमें नहीं है, ना ही ऑपरेटर ने इसकी सूचना मुझे दी है.- राजेश सिंह, अधिकारी, आरकेएस कन्सट्रक्शन कंपनी
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