हूल विद्रोह का परिणाम है संताल परगना टेनेंसी एक्ट

Updated at : 01 Jul 2016 5:16 AM (IST)
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हूल विद्रोह का परिणाम है संताल परगना टेनेंसी एक्ट

चाईबासा : चाईबासा के कांग्रेस भवन में गुरुवार को संताल विद्रोह के महानायकों को श्रद्धांजलि दी गयी. इसके बाद कांग्रेसियों ने क्रांति दिवस को लेकर परिचर्चा बैठक की. इसमें जिलाध्यक्ष सन्नी सिंकू ने कहा कि 30 जनू 1855 को अंग्रेजों के खिलाफ हुआ संताल विद्रोह से अंग्रेज डर गये थे. सिदो-कान्हू, चांद-भैरव के नेतृत्व में […]

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चाईबासा : चाईबासा के कांग्रेस भवन में गुरुवार को संताल विद्रोह के महानायकों को श्रद्धांजलि दी गयी. इसके बाद कांग्रेसियों ने क्रांति दिवस को लेकर परिचर्चा बैठक की. इसमें जिलाध्यक्ष सन्नी सिंकू ने कहा कि 30 जनू 1855 को अंग्रेजों के खिलाफ हुआ संताल विद्रोह से अंग्रेज डर गये थे. सिदो-कान्हू, चांद-भैरव के नेतृत्व में जिस तरह ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ विद्रोह हुआ, उससे यह आज के युवा आदिवासी समाज को प्रेरणा लेना होगा.

संताल विद्रोह के इन नायकों ने जल, जंगल व जमीन की रक्षा के लिए बलिदान दिया. उनके बलिदान के परिणाम स्वरूप संताल परगना टेनेंसी एक्ट बना. इससे आज भी वहां की आदिवासी की जमीन सुरक्षित है. बैठक को बुधराम लागुरी, अध्यक्ष कमल राम, लक्ष्मण सामड, बुलु दास, सूरज निषाद, मनोरंजन दास, शैलेन्द्र सिंकु, चाईबासा नगर अध्यक्ष त्रिशानु राय, शीतल कुमार पुरती, रेवती रमण प्रसाद, अवधेश कुमार पाठक, सुशील कुमार समेत कई कांग्रेसियों ने संबोधित किया.

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