पिता को बेटी का इंतजार, बेटे के लिए मां ने लगायी गुहार

Updated at : 08 Jun 2016 12:01 AM (IST)
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पिता को बेटी का इंतजार, बेटे के लिए मां ने लगायी गुहार

गरीबी और अभाव के कारण कोल्हान में पलायन गंभीर समस्या मानव तस्कर व अन्य गिरोह के झांसे में आ जाते हैं बच्चे व बच्चियां पलायन का दंश. पांच वर्ष पहले प्यारी चली गयी दिल्ली, निकुल को है बेंगलुरु से लौटने का इंतजार मनोहरपुर : गरीबी और अभाव के कारण कोल्हान में पलायन एक गंभीर समस्या […]

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गरीबी और अभाव के कारण कोल्हान में पलायन गंभीर समस्या

मानव तस्कर व अन्य गिरोह के झांसे में आ जाते हैं बच्चे व बच्चियां
पलायन का दंश. पांच वर्ष पहले प्यारी चली गयी दिल्ली, निकुल को है बेंगलुरु से लौटने का इंतजार
मनोहरपुर : गरीबी और अभाव के कारण कोल्हान में पलायन एक गंभीर समस्या बन गयी है. घर की बदहाल आर्थिक दशा का लाभ उठाकर मानव तस्कर गिरोह आसानी से नाबालिग बच्चे व बच्चियों को नौकरी का झांसा देकर अपने चंगुल में फंसा ले रहे हैं. ऐसे में अपने घर की आर्थिक दशा व माता-पिता की परेशानी दूर करने के लिए बच्चे-बच्चियां मानव तस्कर के चंगुल में फंस अपने परिवार वालों को बहुत बड़ा दर्द दे जाते हैं.
ऐसे दो मामले मनोहरपुर प्रखंड में सामने आया है. इसमें पांच वर्ष से एक पिता की आंखें अपनी बेटी को देखने के लिए तरस गयी हैं. वहीं बेटे का पता जानने के बावजूद मां गरीबी के कारण अपने बेटे को बेंगलुरु से घर नहीं ला पा रही है.
पांच साल से बेटी की तलाश में भटक रहा पिता
आनंदपुर प्रखंड के चिरोमाठा के घुसड़ीकोना का निकोदिन तोपनो की 13 वर्षीय बेटी प्यारी तोपनो को पांच वर्ष पहले गांव की एक युवती बहला-फुसलाकर दिल्ली ले गयी.
उस समय प्यारी आठवीं की छात्रा थी. इसके बाद प्यारी का परिवार से संपर्क नहीं हो सका. उसे दिल्ली ले जाने वाली युवती गांव वापस आ गयी, लेकिन प्यारी दिल्ली के किसी अंधेरी गली में गुम हो गयी. पिता ने अपने स्तर से प्यारी की काफी खोजबीन की, लेकिन अब वे भी थक-हार चुके हैं.
बेंगलुरु से कैसे लाये अपने बेटे को गरीब मां
दूसरा मामला आनंदपुर प्रखंड के सालमोन टोला का है. स्व घनश्याम लुगून का 17 वर्षीय पुत्र निकुल लुगून अपनी मां को बताये बिना दलकी गांव के राम नामक युवक के साथ बीते दिनों बेंगलुरु चला गया. निकुल के साथ 6-7 युवक और थे. बेंगलुरु स्टेशन पर निकुल अपने साथियों से बिछड़ गया. निकुल को रेलवे पुलिस ने पूछताछ के के बाद नाबालिग होने के कारण उसे बोस्को चाइल्ड लाइन नामक एनजीओ के पास पहुंचा दिया.
संस्था ने निकुल को चिल्ड्रेन होम फॉर ब्यॉज में दाखिल करा दिया. चिल्ड्रेन होम की प्रोबेशनरी ऑफिसर गिरिजा ने प्रभात खबर को बताया कि निकुल के पास से कई मोबाइल नंबर मिले. इनमें एक मोबाइल नंबर पर एक महिला से बात हुई, जिसने आनंदपुर के मुखिया से बात कराने के बाद निकुल की मां बुधनी लुगून (60) से संपर्क कराया. प्रोबेशनरी ऑफिसर ने बताया कि निकुल के अभिभावक की पूरी जानकारी मिलने पर ही उसे सौंपा जायेगा.
वरना किसी चाइल्ड लाइन संस्था के मार्फत उसे झारखंड भेजा जायेगा. दूसरी ओर गरीब निकुल की मां अपने बेटे से मिलने के लिए लोगों से गुहार लगा रही है. कोई मददगार आये और उसके बेटे को बेंगलुरु से आनंदपुर ला दे.
बच्चे के अभिभावक व परिजन अगर यहां आकर बच्चे को ले जाने में असमर्थ हैं, तो विधिवत तरीके से सूचना देनी होगी. ताकि कमेटी से ऑर्डर लेकर बच्चे को पुलिस के माध्यम से भेजने की व्यवस्था की जा सके.
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