वज्रपात से बच्ची समेत दो की मौत, एक घायल

Updated at : 12 May 2016 7:40 AM (IST)
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वज्रपात से बच्ची समेत दो की मौत, एक घायल

दर्दनाक. बड़बिल गांव में हुआ हादसा चाईबासा : मंझारी प्रखंड के बड़बिल गांव में मंगलवार की शाम ठनका (वज्रपात) से तीन वर्षीय बच्ची व एक किशोरी (15) की मौत हो गयी तथा एक बच्चा घायल हो गया. जानकारी के अनुसार मंगलवार की शाम बड़बिल गांव की मादे बिरुली (15) अपने पड़ोस की बच्ची रूपाली बिरुली […]

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दर्दनाक. बड़बिल गांव में हुआ हादसा

चाईबासा : मंझारी प्रखंड के बड़बिल गांव में मंगलवार की शाम ठनका (वज्रपात) से तीन वर्षीय बच्ची व एक किशोरी (15) की मौत हो गयी तथा एक बच्चा घायल हो गया.
जानकारी के अनुसार मंगलवार की शाम बड़बिल गांव की मादे बिरुली (15) अपने पड़ोस की बच्ची रूपाली बिरुली (3) को लेकर गोशाला के पास घूम रही थी. रूपाली का चचेरा भाई विकास बिरुली (5) कुछ दूरी पर खेल रहा था. तभी तेज आवाज के साथ ठनका गिरा. इसमें मादे बिरुली व रूपाली बिरुली की घटनास्थल पर ही मौत हो गयी.
पास में खेल रहा चचेरा भाई विकास घायल हो गया.
गांव पहुंचे चिकित्सक : परिजनों ने तुरंत मुखिया मंजू बिरुवा को घटना की जानकारी दी. मुखिया ने चिकित्सक को घटनास्थल पर बुलवाया. जांच के बाद चिकित्सक ने दोनों को मृत घोषित कर दिया. घायल विकास को इलाज के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भरती कराया. बुधवार को दोनों शवों का पोस्टमार्टम कराया गया.
परिजन को मिलेगी आर्थिक मदद : घटना की सूचना पर मंझारी के बीडीओ सत्येंद्र महतो बड़बिल गांव पहुंचकर मृतकों के परिजनों से मिले. इस दौरान उन्होंने पीड़ित परिवार को आपदा राहत कोष से आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की बात कही.
मंझारी का मामला
गांव में गोशाला के पास घूम रहे थे तीनों
बिजली कड़की और बच्ची तथा किशोरी की मौके पर ही हुई मौत
चाईबासा
एडमिशन हुआ 100 का, क्लास करते हैं सिर्फ 15 विद्यार्थी
समय पर नहीं आते हैं को-ऑर्डिनेटर
चाईबासा : कोल्हान विश्वविद्यालय ने निर्धन विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाअों की तैयारी कराने के उद्देश्य से वर्ष 2015-16 में नि:शुल्क कोचिंग सेंटर की शुरुआत की थी, लेकिन विवि प्रशासन की उपेक्षा और ढुलमुल रवैये से अब कोचिंग सेंटर के अस्तित्व पर संकट उत्पन्न हो गया है. इसका एक मात्र कारण नियमित कक्षाअों का नहीं होना है. नियमित कक्षा नहीं चलने से विद्यार्थी भी सेंटर आने में दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं.
सेंटर के को-ऑडिनेटर भी इसके प्रति गंभीर नहीं हैं. सुबह दस बजे कोचिंग सेंटर का समय निर्धारित है, लेकिन को-ऑडिनेटर डॉ आरएस दयाल 11 बजे के बाद ही विभाग पहुंचते हैं. कोचिंग सेंटर की शुरुआती दिनों में 100 विद्यार्थियों ने नामांकन कराया था. अब 10 से 15 विद्यार्थी ही आते हैं.
मेरिट पर हुआ था विद्यार्थियों का चयन. नि:शुल्क कोचिंग सेंटर के लिए मेरिट के आधार पर विद्यार्थियों का चयन हुआ था. नामांकन से पूर्व एक परीक्षा का आयोजन किया गया, जिसमें 200 विद्यार्थी शामिल हुए थे. इनमें से 100 विद्यार्थियों का चयन किया गया था.
समय पर शिक्षकों का भुगतान नहीं. शिक्षकों ने बताया कि जनवरी से वेतन नहीं मिला है. अंगरेजी, रीजनिंग, पॉलिटिकल साइंस, इतिहास समेत अन्य विषयों के लिए करीब सात शिक्षक व शिक्षिकाएं नियुक्त हैं, लेकिन समय पर वेतन भुगतान नहीं होने के कारण शिक्षक व शिक्षकाएं भी शिक्षादान को लेकर गंभीरता नहीं दिख रहे हैं.
इन प्रतियोगी परीक्षाअों की करायी जाती है तैयारी. कोचिंग सेंटर में रेलवे के ग्रुप डी, जेपीएससी, शिक्षक, बैंक, सचिवालय परीक्षा आदि की तैयारी करायी जाती है. इसके अलावा अन्य प्रतियोगिता परीक्षाओं के लिए शिक्षक अध्ययनरत बच्चों को टिप्स देते हैं, ताकि विश्वविद्यालय के विद्यार्थी इन प्रतियोगिता परीक्षाअों में पास हो अच्छी नौकरी पा सकें.
प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए कोल्हान विवि ने खोला था नि:शुल्क कोचिंग सेंटर
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