पानी के लिए भटके दो बाल हिरण, एक की मौत
Updated at : 28 Apr 2016 6:54 AM (IST)
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दूसरे बाल हिरण की भी स्थिति गंभीर, चल रहा इलाज पानी के लिए वन्यजीव भटक रहे हैं इधर-उधर पौधों के सूखने से जीव-जंतुओं के भोजन के भी लाले पटमदा : पानी की कमी के कारण दलमा के जीव-जंतुओं की जिंदगी आफत में आ गयी है. पिछले दिनों घाटशिला क्षेत्र में प्यास से हाथी के बच्चे […]
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दूसरे बाल हिरण की भी स्थिति गंभीर, चल रहा इलाज
पानी के लिए वन्यजीव भटक रहे हैं इधर-उधर
पौधों के सूखने से जीव-जंतुओं के भोजन के भी लाले
पटमदा : पानी की कमी के कारण दलमा के जीव-जंतुओं की जिंदगी आफत में आ गयी है. पिछले दिनों घाटशिला क्षेत्र में प्यास से हाथी के बच्चे की मौत का मामला अभी ठंडा भी नहीं पड़ा है कि पानी की तलाश में भटके दो हिरण के बच्चों में से एक की मौत का मामला सामने आ गया है.
भीषण गरमी के कारण दलमा क्षेत्र के ज्यादातर जलाशय तथा पेड़-पौधे सूख चुके हैं. इसके कारण दलमा वन में रहने वाले जीव-जंतुओं की जान पर बन आयी है. वे पानी की तलाश में इधर-उधर भटक जा रहे हैं. करीब एक सप्ताह पहले चांडिल के पास एक हिरण का बच्चा पानी के लिए भटकता हुआ गांव में घुस गया. लोगों ने उसे पकड़ लिया. इसकी सूचना पर चांडिल फॉरेस्टर ने उसे ग्रामीणों से मुक्त कराया और वन विभाग के हिरण पार्क (प्रजन्न केंद्र),
माकुलाकोचा (चाकुलिया) में रखवा दिया. बताया जाता है कि हिरण के बच्चे को चोट भी लगी थी. इसके कारण वह काफी कमजोर हो गया था. उसकी देखरेख हो रही थी कि दो दिनों बाद ही उसने दम तोड़ दिया. चाकुलिया चेकनाका में कार्यरत छुटु महतो ने बताया कि चांडिल फॉरेस्टर द्वारा बरामद कर लाये गये हिरण का बच्चा घायल था. उसकी गर्दन व पांव में चोट थी. हिरण के बच्चे ने दो दिन बाद ही दम तोड़ दिया.
उधर, 23 अप्रैल को पारडीह स्थित जंगल से हिरण का एक बच्चा पानी की खोज में हाइवे के किनारे स्थित नाले के पास पहुंच गया. सुबह जमशेदपुर काम के लिए आ रहे लोगों ने उसे देखा और पकड़ लिया. इसकी सूचना पर बोंटा-लाइलम के फॉरेस्टर रवींद्र कुमार तत्काल मौके पर पहुंचे और बच्चे को मुक्त कराया. उसे भी हिरण पार्क में रखा गया है. वहां उसकी हालत नाजुक बतायी जाती है. हालांकि, उसका इलाज कराया जा रहा है.
दलमा क्षेत्र में इस बार पानी की भारी कमी है. इसके कारण जीव-जंतु पानी की तलाश में इधर-उधर के गांवों तक भटक जा रहे हैं. कई बार भागने के क्रम में वे चोटिल हो जाते हैं और कई बार कुछ ग्रामीण उन्हें चोटिल कर देते हैं. ग्रामीणों से आह्वान है कि वे जंगली जंतुओं को नुकसान न पहुंचायें. जब भी कोई भटका हुआ जीव-जंतु उन्हें दिखायी दे, तो वन विभाग को सूचित करें.
रवींद्र कुमार, फॉरेस्टर
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