14 साल में पिता का हाथ बंटाने लगे थे जमशेदजी
Updated at : 04 Mar 2016 4:58 AM (IST)
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नोवामुंडी : टाटा डीएवी पब्लिक स्कूल नोवामुंडी में गुरुवार को जमशेदजी टाटा की 177वीं जयंती मनायी गयी. विद्यालय के प्राचार्य तरुण कुमार मिश्र ने जमशेदजी टाटा की तसवीर पर पुष्पांजलि अर्पित की. इसके बाद विद्यालय परिवार के सभी सदस्यों ने श्रद्धा सुमन अर्पित कर उन्हें नमन किया. प्राचार्य ने भारतीय उद्योग जगत के जनक जमशेदजी […]
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नोवामुंडी : टाटा डीएवी पब्लिक स्कूल नोवामुंडी में गुरुवार को जमशेदजी टाटा की 177वीं जयंती मनायी गयी. विद्यालय के प्राचार्य तरुण कुमार मिश्र ने जमशेदजी टाटा की तसवीर पर पुष्पांजलि अर्पित की. इसके बाद विद्यालय परिवार के सभी सदस्यों ने श्रद्धा सुमन अर्पित कर उन्हें नमन किया.
प्राचार्य ने भारतीय उद्योग जगत के जनक जमशेदजी टाटा की उपलब्धियां बतायी. उन्होंने कहा कि आज ही के दिन 1839 में गुजरात के नौसारी में उनका जन्म हुआ था. मुंबई के एलफिंस्टन कॉलेज से उन्होंने स्नातक की. 14 साल की उम्र से वे अपने पिता नौसरवानजी के व्यवसाय में हाथ बंटाने लगे. उनके पिताजी ने उद्योग के विस्तार के लिए पहली बार उन्हें हांगकांग भेजा. इस जिम्मेदारी को उन्होंने सफलतापूर्वक निभाया. इसके बाद उन्होंने जापान, चीन, इंग्लैड, अमेरिका आदि देशों में जाकर टाटा समूह के उद्योगों का विस्तार किया.
आज देश-विदेश में टाटा समूह के उद्योग उनके कठिन परिश्रम व लगन का प्रमाण है. इस्पात उद्योग की स्थापना उनका सपना था. कालीमाटी में टिस्को स्थापित कर सपने को पूरा किया. टाटानगर शहर उन्होंने ही बसाया. विश्व स्तरीय ख्यातिप्राप्त इस्पात का उत्पादन आज टाटानगर में हो रहा है. हम भारतीय उनके आभारी हैं, जिन्होंने आजीवन आम जनता की सेवा के लिए व देश की तरक्की के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया.
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