150 मजदूरों ने छोड़े गांव

Published at :08 Dec 2013 5:16 AM (IST)
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150 मजदूरों ने छोड़े गांव

– शीन अनवर – चक्रधरपुर : बालू ट्रकों का परिचालन बंद होने से आसनतलिया आदिवासी टोला के 150 से अधिक मजदूरों का पलायन हो चुका है. शेष मजदूर भी पलायन करने की तैयारी में हैं. चक्रधरपुर से करीब चार किलोमीटर दूर और अनुमंडल कार्यालय से मात्र एक किलोमीटर की दूरी पर आसनतलिया आदिवासी टोला है. […]

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– शीन अनवर –

चक्रधरपुर : बालू ट्रकों का परिचालन बंद होने से आसनतलिया आदिवासी टोला के 150 से अधिक मजदूरों का पलायन हो चुका है. शेष मजदूर भी पलायन करने की तैयारी में हैं. चक्रधरपुर से करीब चार किलोमीटर दूर और अनुमंडल कार्यालय से मात्र एक किलोमीटर की दूरी पर आसनतलिया आदिवासी टोला है.

इसमें सबसे अधिक लोग बालू ट्रकों में काम करते हैं. गांव में ट्रक चालक, खलासी, कुली, कामिन, राजमिस्त्री, रेजा सभी हैं. विभिन्न पंद्रह ट्रकों में गांव के लोग काम करते हैं. पिछले चार माह से बालू ट्रकों का परिचालन बंद है. बालू घाटों की नीलामी नहीं होने के कारण बालू का उठाव नहीं हो रहा है.

जिस कारण बालू ट्रक नहीं चल रहे हैं. बालू ट्रकों का नहीं चलने का सबसे ज्यादा कहर आसनतलिया आदिवासी टोला में पड़ा है. काम नहीं मिलने के कारण धीरे-धीरे लोग पलायन कर रहे हैं. दूसरे प्रदेशों में रोजगार की तलाश में अब तक डेढ़ सौ से अधिक लोग जा चुके हैं.

शेष बचे मजदूर भी पलायन की तैयारी में है. बताया जाता है कि ये मजदूर टाटा-यशवंतपुर एक्सप्रेस से प्रत्येक सप्ताह बेंगलुरु की ओर जाते हैं. इस संदर्भ में प्रभात खबर प्रतिनिधि ने आसनतलिया के आदिवासियों से बात किये.

ट्रक चालक विजय सिंह पाड़ेया और बाबू राम के मुताबिक पिछले चार माह से बेरोजगार हैं. कुछ काम नहीं कर रहे हैं. परिवार में 8 सदस्य हैं, जिनका पेट भरने के लिए जंगल से लकड़ी काट कर ला रहा हूं.

डेली कमा रहा हूं और परिवार का पेट भर रहा हूं. खलासी सकारी जोंको कहते हैं पिछले 15 सालों से ट्रक में खलासी का काम कर रहे थे. लेकिन पिछले चार माह से मजदूरी कर पेट भर रहा हूं. रोजगार का कोई साधन नहीं है, इसलिए बालू ट्रकों का परिचालन शुरू होना चाहिए.

खलासी जयदेव तांती कहते हैं ट्रक बंद होने के बाद खेतों में धान काटने का काम कर रहा हूं, लेकिन डरता हूं कुछ दिनों में ही धान कटाई खत्म हो जायेगी, तब मेरा क्या होगा. किस तरह से परिवार और बच्चों की परवरिश होगी.

मजदूर गणोश सुंबरुई कहते हैं बेरोजगार हो गए हैं, घर का रखा सामान खा रहा हूं. धान काटने से जो पैसे मिलते हैं, उसी से घर चल रहा है. राज्य सरकार काम दे या फिर ट्रकों का परिचालन शुरू करे.

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