रवि शंकर मोहांती
चक्रधरपुर : सोनुवा प्रखंड मुख्यालय से पश्चिम की दिशा में 11 किलोमीटर दूरी पर अवस्थित पनसुवां डैम सैलानियों का स्वागत के लिए तैयार है. प्रत्येक वर्ष यहां हजारों की संख्या में गोइलकेरा, सोनुवा, चक्रधरपुर, चाईबासा, जगन्नाथपुर, जमशेदपुर, झींकपानी, रांची आदि जगहों से हजारों की संख्या में लोग पिकनिक मनाने के लिए जुटते हैं. डैम पूरी तरह से तैयार है. यहां का जलस्तर काफी ऊपर है. नीले रंग का मनमोहक पानी लोगों को अपनी ओर आकर्षित करता है. दिसंबर व जनवरी माह में काफी संख्या में लोग उमड़ते हैं.
बीच में स्थित है राजा-रानी पेड़.
डैम के बीचों बीच राजा-रानी नाम से दो पेड़ है, जो आज तक सही सलामत है. कहा जाता है कि इस पेड़ की कहानियां को पोड़ाहाट के राजा वीर शहीद अर्जुन सिंह से जोड़ा जाता है. इस कारण इन दोनों पेड़ों का नाम राजा-रानी रखा गया है. डैम के भीतर सारे पेड़ पानी से नष्ट हो गये हैं, लेकिन यह दो पेड़ सुखे होने के बावजूद भी आज भी वहां जस के तस खड़े हैं. ग्रामीण आज भी इन पेड़ों का उपयोग डैम में पानी का जलस्तर को मापने के लिए करते हैं.
नौका बिहार का ले सकते हैं आनंद. सैलानियों को आनंद के लिए गांव के ग्रामीण मोटे-मोटे पेड़ों को तराश कर नौका का रूप दे कर डैम में चलाते हैं. इसकी क्षमता एक साथ आठ से 10 लोगों के बैठने की होती है.
इसके एवज में सैलानियों की ओर से उन्हें कुछ रुपये भी दिये जाते हैं. इससे ग्रामीण की भी चांदी रहती है. नौका विहार को प्रशासनिक स्वीकृति नहीं मिली है, इसी नाव के सहारे आसपास के सैकड़ों ग्रामीण अपना जीवन यापन करते हैं.
बच्चों का रखें ध्यान. डैम निर्माण पूरा हो जाने से यहां पानी की गहराई बढ़ गयी है. इससे छोटे-छोटे बच्चों के इधर-उधर छोड़ना नहीं चाहिए. नहीं, तो अप्रिय घटना घट सकती है. पिकनिक मनाने आनेवाले सैलानियों को स्वयं अपने व अपने बच्चों का ध्यान रखना होता है.
मछलियां अटखेलियां भी करती हैं. डैम में सुबह के समय यहां की मछलियां पानी में इधर-उधर विचरण करती हैं. उनकी इस अटखेलियों को भी देखने के लिए लोग सुबह पहुंचते हैं. डैम में एक किलो से लेकर 40 किलो तक की मछलियां है.
मां पाउड़ी का मंदिर लोगों की आस्था का केंद्र
डैम के दक्षिणी छोर पर स्थित मां पाउड़ी का मंदिर लोगों के आस्था का केंद्र हैं, जो सैलानी को आकर्षित करता है. लोग पिकनिक के पूर्व दर्शन के लिए मां पाउड़ी के दरबार पहुंचते हैं. कहा जाता है कि यहां से मांगी गयी हर मुराद पूरी होती है. पूर्व में यह मंदिर डैम के बीचों-बीच स्थित थी.
इसका निर्माण पोड़ाहाट के राजा द्वारा किया गया था, डैम निर्माण के समय इस मंदिर को डैम के ऊपर दक्षिणी छोर पर बनाया गया है. यहां जाने के लिए डैम के मुख्य मार्ग से संपर्क सड़क निर्माण किया गया है.
कैसे पहुंचे इस डैम तक
सोनुवा रेलवे स्टेशन व बस स्टैंड से पश्चिम की दिशा में 11 किलोमीटर की दूरी तय कर डैम पहुंचा जा सकता है. इसके लिए सोनुवा से छोटी-छोटी गाडि़यां भी प्रत्येक दिन आना-जाना करती है. हावड़ा- मुंबई रेल मार्ग पर अवस्थित सोनुवा स्टेशन डैम से नजदीक है.
