आवासीय विद्यालय में शिक्षक ने निर्वस्त्र होकर किया हंगामा

Published at :19 Mar 2015 7:15 AM (IST)
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आवासीय विद्यालय में शिक्षक ने निर्वस्त्र होकर किया हंगामा

मनोहरपुर : मनोहरपुर पावर सब स्टेशन के समीप स्थित थोलकोबाद आवासीय विद्यालय के शिक्षक अमरेश कुमार पांडे का नशे में निर्वस्त्र होकर विद्यालय परिसर में उत्पात मचाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है. इतना ही नहीं अमरेश ने मामले की जानकारी लेने पहुंचे मनोहरपुर के बीडीओ, सीओ,जेई के साथ-साथ मीडियाकर्मियों से र्दुव्‍यवहार भी किया. पुलिस […]

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मनोहरपुर : मनोहरपुर पावर सब स्टेशन के समीप स्थित थोलकोबाद आवासीय विद्यालय के शिक्षक अमरेश कुमार पांडे का नशे में निर्वस्त्र होकर विद्यालय परिसर में उत्पात मचाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है. इतना ही नहीं अमरेश ने मामले की जानकारी लेने पहुंचे मनोहरपुर के बीडीओ, सीओ,जेई के साथ-साथ मीडियाकर्मियों से र्दुव्‍यवहार भी किया. पुलिस ने आरोपी शिक्षक को हिरासत में लेकर थाने भेज दिया.
निर्वस्त्र होकर रात के वक्त नशे की हालत में आवासीय विद्यालय के छात्रों के सामने उत्पात मचा रहे शिक्षक अमरेश कुमार पांडे को मनोहरपुर पुलिस ने मौके से हिरासत में लेकर रात के वक्त ही मेडिकल कराने के लिये मनोहरपुर स्थित सामुदायिक स्वास्थ केंद्र ले गये. चिकित्सकों ने आरोपी शिक्षक के मूत्र का नमूना लेकर चाईबासा भेज दिया.
लड़कियों को देखकर सीटी बजवाता है : इस आवासीय विद्यालय में 64 छात्र अध्ययनरत हैं. प्रशासनिक अधिकारियों को छात्रों ने बताया कि शिक्षक अमरेश पांडे लड़कियों को देखकर सीटी बजाने के लिये कहते हैं. वरीय अधिकारियों के सामने शिकायतें सुनाते-सुनाते छात्र रोने लगे.
बिना सूचना के गायब मिले प्रधानाध्यापक : मंगलवार की रात को घटित घटना के बाद बुधवार को प्रखंड विकास पदाधिकारी देवेंद्र कुमार ने प्रभारी कल्याण पदाधिकारी राजेंद्र बाड़ा व कनीय अभियंता पार्थ सतपथी के साथ विद्यालय का निरीक्षण किया. निरीक्षण के क्रम में विद्यालय के प्रधानाध्यापक गोविंद महतो, आदेशपाल श्रीमान सिंह चेरोवा को बिना किसी सूचना के तीन दिनों से गायब मिले. बीडीओ ने बताया कि दोनों पर कार्रवाई के लिये उच्चधिकारियों को लिखा जायेगा.
दुर्भाग्यपूर्ण है शिक्षक का व्यवहार :
कल्याण विभाग द्वारा संचालित थोलकोबाद आवासीय विद्यालय में मंगलवार की रात घटित घटना को लेकर प्रभारी कल्याण पदाधिकारी राजेंद्र बाड़ा ने इसे काफी संगीन व दुर्भाग्यपूर्ण बताया है. उन्होंने कहा कि आरोपी शिक्षक पर नियमानुकुल कार्रवाई होना तय है, उच्चधिकारीयों को इसके लिये सूचित कर दिया गया है.
जीने की राहहम किसी से कम नहीं
कौन कहता है कि लाचारी का नाम है बुढ़ापा
बुढ़ापा अभिशाप नहीं, बल्कि जिंदगी को नये सिरे से शुरू करने का एक मौका है. इस बात को सच कर दिखाया है ‘विश्रंति’ की बुजुर्ग महिलाओं ने. ये फटे-पुराने कपड़ों से आसन और चटाई बना कर बेचती हैं. उम्र के इस पड़ाव पर आत्मनिर्भर बन जाना कोई हंसी-खेल नहीं है.
और तो और, ये महिलाएं अब अपने काम के बूते लिम्का बुक में अपना नाम दर्ज होने का इंतजार कर रही हैं.
हर दोपहर ‘विश्रंति’ का माहौल देखने लायक होता है. चारों ओर बुजुर्ग महिलाएं और सबके हाथों में कुछ फटे-पुराने कपड़े, जिनसे वे सुंदर आसन और चटाई बनाती हैं. 70-80 साल के आसपास की इन महिलाओं के चेहरों पर कोई शिकन नहीं दिखती. सब अपने काम में मगन. इनके लिए यह शौक नहीं, बल्कि अतीत के जख्मों का मरहम है, जिंदगी बसर करने के लिए नियमित आमदनी का जरिया है.
विश्रंति एक वृद्धाश्रम है जो चेन्नई के बाहरी इलाके ईस्ट कोस्ट रोड पर है. यहां महिलाओं के बीच का बहनापा देखने लायक होता है. 79 वर्षीय आर राजम, जो यहां 15 सालों से हैं, चेहरे पर मुस्कान लिए कहती हैं- ‘‘मेरे लिए यहां रहना जिंदगी के सबसे अच्छे पलों में से एक है. इन कामों को करने से मुङो खुशी मिलती है लेकिन मैं चेल्लमा की तरह हुनरमंद नहीं.’’ तभी 74 वर्षीय चेल्लमा बहुत प्यार से राजम को टोकती हैं, ‘‘ये राजम तो बस ऐसे ही कहती है. मैं तो कुछ भी नहीं जानती.’’ वहीं पड़े सुंदर से टेडी बीयर को दिखाते हुए चेल्लमा कहती हैं, ‘‘ये देखो, ये राजम ने बनाया है. तिरुपति तिलक, कृष्णा के पैर ये सब इसी ने बनाये हैं.’’
दिन भर इसी तरह हंसते-बतियाते ये बुजुर्ग महिलाएं अपने काम में लगी रहती हैं. एक दिन में अमूमन ये दो चटाइयां बना डालती हैं. इसके अलावा कुछ शोपीस, खिलौने वगैरह भी बना लेती हैं. एक चटाई 60 रुपये के करीब में बिकती है. हमें भले यह रकम छोटी लगे, पर दादी-नानी की उम्र की ये औरतें सिर्फ पैसों के लिए काम नहीं करतीं.
इनके लिए काम खुद को व्यस्त और सक्रिय रखने का जरिया भी है, ताकि ये अपनों से मिले दर्द को भूल सकें. परिवार से दूर रहने का दर्द इन्हें सताता है, लेकिन अब इन महिलाओं ने एक-दूसरे को ही अपना परिवार मान लिया है. खुशी और शांति वे एक-दूसरे में ही खोजती हैं.
हर सुबह ये एक नयी उम्मीद के साथ जागती हैं. आसन और चटाइयों के लिए नये पैटर्न और डिजाइन के बारे में सोचती हैं.
उनके बनाये उत्पादों को वूमेन एंटरप्रेन्योरशिप प्रमोशनल एसोसिएशन (डब्लूइपीए) के मार्गदर्शन में आयोजित शिल्प मेले में ले जाया जाता है. इनको बेच कर जो राशि मिलती है, वे इन महिलाओं को दी जाती है. आश्रम में रहने वाली 64 वर्षीय डी सरस्वती सबसे कम उम्र की महिला हैं. उन्होंने अब तक 100 से भी ज्यादा आसन बनाये हैं. वेकहती हैं यह काम हमारे लिये संतोषजनक है. इस उद्यम ने हमें बहुत कुछ दिया है.
आश्रम की महिलाओं को इन दिनों लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्डस के संदेश का इंतजार है. इन्होंने इसमें अपना नाम दर्ज कराने के लिए एक गोलाकार चटाई बनायी है, जिसका व्यास 21 फुट है. आश्रम चलानेवाले चैरिटेबल ट्रस्ट की सचिव प्रभा श्रीदर कहती हैं, लिम्का ने हमें सूचित किया है कि 2015 के संस्करण में वे हमारी चटाई को शामिल करेंगे. इसे बनाने के लिए महिलाओं ने बहुत मेहनत की है. यह आश्रम महिलाओं का अपना घर है और यहां रहनेवाले लोग परिवार के सदस्य. यहां ऐसी कई महिलाएं हैं जिन्होंने बुढ़ापे के आगे घुटने टेक दिये थे, लेकिन अब इनमें आत्मनिर्भर होने का गर्व साफ-साफ झलकता है.
विश्रंति की संस्थापक सावित्री वैठी ने खुद भी 80 की उम्र पार कर ली है. उन्होंने ही पुराने कपड़ों की पट्टियों से आसन बनाने की शुरुआत की थी. वह कहती हैं कि यह प्रक्रिया काफी सरल है. कपड़े की पट्टियों को बालों की चोटी की तरह गूंथा जाता है. फिर उन्हें गोलाकार या अन्य आकार में लपेट कर सिल लिया जाता है. सावित्री बताती हैं कि कर्नाटक यात्र के दौरान मैंने वहां के गांवों में ऐसे आसन बनते देखे थे. विश्रंति लौट कर मैंने इसे बनाना शुरू किया. कई महिलाओं ने इसमें दिलचस्पी दिखायी और वे सीखने के लिए आगे आयीं. देखते ही देखते मेरा यह विचार काम कर गया. वे कहती हैं यह उद्यम हमारे लिए काफी सरल था क्योंकि ऐसे आसन को बनाने के लिए हमें फटे-पुराने कपड़ों की जरूरत पड़ती है, जो कहीं से भी आसानी से उपलब्ध हो जाते हैं.
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