पत्नी व बच्चे दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :19 Feb 2015 1:50 AM (IST)
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चक्रधरपुर : छह मई 2011 को बंदगांव प्रखंड के जलासर पंचायत अंतर्गत झारखंडी गांव निवासी ाितोचीत होरो को चर्च समारोह के दौरान माओवादियों ने गोली मार कर हत्या कर दी थी. पति की हत्या के बाद पत्नी नामलेन होरो व उसके दो बच्चे आशा होरो व अल्का होरो को जीविका चलाने में काफी दिक्कतों का […]
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चक्रधरपुर : छह मई 2011 को बंदगांव प्रखंड के जलासर पंचायत अंतर्गत झारखंडी गांव निवासी ाितोचीत होरो को चर्च समारोह के दौरान माओवादियों ने गोली मार कर हत्या कर दी थी.
पति की हत्या के बाद पत्नी नामलेन होरो व उसके दो बच्चे आशा होरो व अल्का होरो को जीविका चलाने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. नामलेन होरो सरकारी नौकरी व मुआवजा के लिए कई बार उपायुक्त को पत्र भी दी. नामलेन को 2014 में सरकार द्वारा मिलने वाली मुआवजा राशि तीन लाख में केवल एक लाख रुपये ही दिया गया. उसके बाद उसे सरकार द्वारा किसी प्रकार का सहयोग नहीं मिला है.
इससेनामलेन होरो को अपने दो बच्चों की पढ़ाई व पालन पोषण करने में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है. नामलेन ने कहा कि मेरे पति ाितचीत होरो चर्च समारोह में शामिल होने के लिए गये थे. अहले सुबह उन्हें चार की संख्या में आये माओवादियों ने सिर, छाती व हाथों में गोली मार कर हत्या कर दी थी. हत्या के चार साल बाद भी मुआवजा नहीं मिल पाया है.
मुआवजा के लिए दो बार जिला स्थापना समिति द्वारा सत्यापन कर गृह विभाग को भेजा गया है, परंतु गृह विभाग द्वारा किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं की जा रही है.
मुआवजा नहीं मिलने के कारण नामलेन अपने दो बच्चों को लेकर दर-दर की ठोकर खा रही है. नामलेन ने कहा कि वीडियो कॉन्फ्रंेस में भी डीजीपी को इस संबंध में सारी जानकारी दी गयी है. झारखंड सरकार के गृह विभाग के ज्ञापन-34, रांची दिनांक-2 जनवरी 2008 एवं पत्र संख्या 12 नौ0 मु0 09/2010-6543 दिनांक 29 अक्तूबर 2010 के आलोक में दिनांक 19 अगस्त 2014 को पश्चिम सिंहभूम समाहरणालय के सभा कक्ष में उग्रवादी हिंसा में मृत नागरिकों के आश्रितों को अनुग्रह अनुदान/अनुकंपा के आधार पर नौकरी देने के लिए विचार किया है.
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