एनओसी नहीं मिलने से पांच किलोमीटर लंबी तितलीघाट-बहदा सड़क का मामला अधर में

किरीबुरू :सारंडा की छोटानागरा पंचायत में तितलीघाट (पीडब्ल्यूडी सड़क मोड़) से बहदा गांव तक लगभग साढ़े चार किलोमीटर सड़क निर्माण को लेकर वन विभाग की टीम ने शुक्रवार को बहदा गांव में मुंडा रोया सिधु की अध्यक्षता बैठक की. यहां ग्रामीण गुणा माझी, उबगा सिधु, गणेश सिधु, बिरसा सुरीन आदि की उपस्थिति में रिपोर्ट तैयार […]
किरीबुरू :सारंडा की छोटानागरा पंचायत में तितलीघाट (पीडब्ल्यूडी सड़क मोड़) से बहदा गांव तक लगभग साढ़े चार किलोमीटर सड़क निर्माण को लेकर वन विभाग की टीम ने शुक्रवार को बहदा गांव में मुंडा रोया सिधु की अध्यक्षता बैठक की. यहां ग्रामीण गुणा माझी, उबगा सिधु, गणेश सिधु, बिरसा सुरीन आदि की उपस्थिति में रिपोर्ट तैयार की गयी.
जांच में पाया गया कि सड़क की लंबाई लगभग साढ़े चार किलोमीटर, चौड़ाई- 17 फीट, एक पुलिया की लंबाई लगभग पच्चीस फीट होगी. सड़क में मात्र तीन सौ मीटर क्षेत्र रिर्जव वन भूमि के अधीन है. रेंजर केपी सिन्हा ने बताया कि सड़क का निर्माण ग्रामीण विकास विभाग से किया जाना है. उक्त विभाग ने इस सड़क की जमीन की मापी नहीं करवाई है.
विभाग ने पूर्व में सिर्फ सारंडा डीएफओ से एक बार एनओसी की मांग की थी. इसके जवाब में डीएफओ ने दो-तीन बार उक्त विभाग को पत्र लिखा है. इसमें ग्रामीण विकास विभाग से सड़क को टोपो सीट मैप में रेखांकित कर मैप व भूमि का विवरण वन विभाग कार्यालय को समर्पित करने को कहा था.
आज तक ग्रामीण विकास विभाग समर्पित नहीं किया. इससे एनओसी नहीं दिया गया और सड़क का निर्माण कार्य अधर में लटका है. इस बाबत रेंजर ने बताया कि डीएफओ रजनीश कुमार के आदेश पर हमारी टीम उस सड़क से संबंधित जमीन की मापी आज की है. इसकी रिपोर्ट डीएफओ के पास भेजाी जायेगी. उन्होंने कहा कि उक्त सड़क ग्रामीणों के लिए हीं नहीं
बल्कि वन विभाग समेत तामम विभाग के लिए अत्यंत जरूरी है. हल्की वर्षा मात्र से वह पूरा मार्ग दलदल में तब्दील हो जाता है. वाहन आगे जा हीं नहीं सकता. उन्होंने कहा कि सड़क के निर्माण से लगभग 0.2 हेक्टेयर जमीन वन विभाग की जा सकती है. इसके लिए वन विभाग को एनओसी प्रदान करने में कहीं दिक्कत नहीं है.
वन विभाग चाहता है कि यह सड़क हर हाल में व जल्द बने इसके लिए उक्त विभाग को विशेष उर्जा के साथ कार्य करने की जरूरत है. सड़क को लेकर ग्रामीणों ने अनेकों बार आंदोलन किया. मुख्यमंत्री से लेकर तमाम सरकारी विभागों के दरवाजे खटखटाया, लेकिन समाधान नहीं निकला. तंग आकर ग्रामीण किरीबुरू-मनोहरपुर मुख्य सड़क को तितलीघाट गांव के समीप अनिश्चितकालीन जाम करने की घोषणा की. इस घोषणा के बाद एसपी के
आदेशानुसार मनोहरपुर के डीएसपी व किरीबुरू के इन्स्पेक्टर ने ग्रामीणों से बात कर ऐसा नहीं करने को कहा जिसके बाद ग्रामीण मान गये. इनसे सड़क निर्माण कराने में सहयोग करने का आग्रह किया. अगर सड़क निर्माण का रास्ता इसके बाद भी साफ नहीं हुआ तो ग्रामीण भविष्य में सड़क को जाम करने की तैयारी कर चुके हैं.
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