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सदर अस्पताल में जल्द खुलेगा पहला वन स्टॉप सेंटर

Updated at : 21 Mar 2019 5:47 AM (IST)
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सदर अस्पताल में जल्द खुलेगा पहला वन स्टॉप सेंटर

अभिषेक पीयूष, चाईबासा : पश्चिमी सिंहभूम में महिलाओं के विरुद्ध घरेलू हिंसा, अपहरण, छेड़छाड़, बलात्कार, यातनाएं, अनैतिक व्यापार, दहेज हत्या तथा यौन उत्पीड़न जैसे अापराधिक वारदातों में निरंतर वृद्धि हो रही है. इसके मद्देनजर जिला प्रशासन ने सदर अस्पतास परिसर में पीड़ित महिलाओं को चिकित्सा, कानूनी व मानसिक सहायता मुहैया कराने के लिए ‘वन स्टॉप […]

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अभिषेक पीयूष, चाईबासा : पश्चिमी सिंहभूम में महिलाओं के विरुद्ध घरेलू हिंसा, अपहरण, छेड़छाड़, बलात्कार, यातनाएं, अनैतिक व्यापार, दहेज हत्या तथा यौन उत्पीड़न जैसे अापराधिक वारदातों में निरंतर वृद्धि हो रही है. इसके मद्देनजर जिला प्रशासन ने सदर अस्पतास परिसर में पीड़ित महिलाओं को चिकित्सा, कानूनी व मानसिक सहायता मुहैया कराने के लिए ‘वन स्टॉप सेंटर’ खोलने का निर्णय लिया है.
इसके लिए सदर अस्पताल स्थित पोस्टमॉर्टम हाउस के समीप खाली पड़े भवन में फिलहाल अस्थायी तौर पर वन स्टॉप सेंटर शुरू किया जायेगा, जहां महिलाओं से संबंधित मुद्दों को जल्द सुलझाने के साथ ही उन्हें तत्काल सहायता भी मुहैया करायी जायेगी.
महिलाओं के रहने-खाने आदि की सुविधा भी : अस्पताल परिसर में पीड़िताओं की सुविधा के लिए जिला प्रशासन द्वारा जल्द ही नये भवन का निर्माण कराया जाएगा. उक्त भवन में वन स्टॉप सेंटर के साथ ही शेल्टर होम के तौर पर महिलाओं के रहने-खाने आदि की सुविधा मुहैया करायी जायेगी.
इसमें बेड आदि की सारी व्यवस्था रहेगी. फिलहाल नये भवन के निर्माण तक अस्पताल परिसर में अस्थायी तौर पर तैयार कराये गये वन स्टॉप सेंटर में पीड़िता की समस्याओं का निपटारा होगा.
पीड़िता को 24 घंटे मिलेगी सहायता
सदर अस्पताल परिसर में प्रशासन द्वारा अस्थायी तौर पर तैयार ‘वन स्टॉप सेंटर’ में पीड़िताओं को 24 घंटे मदद उपलब्ध करायी जाएगी. इसके लिए ‘वन स्टॉप सेंटर’ में पीड़ित महिलाओं के रहने की व्यवस्था की गई है, ताकि पीड़ित महिलाओं को न्याय मिलने के साथ ही सिर पर छत होने की चिंता न रहे. इसके लिए जिला प्रशासन द्वारा पदाधिकारियों, समाजसेवी संस्थाओं आदि को लेकर एक कमेटी का गठन किया है, जो इसकी निगरानी करेगी.
पीड़िता को अब भटकने की जरूरत नहीं
पीड़ित महिलाओं को न्याय के लिए पहले कई मुश्किलों का सामना करना पड़ता था. पहले थाने पहुंच कर अपनी व्यथा बताना, फिर अस्पताल में चिकित्सा सुविधा के लिए परेशान होना, अपराध दर्ज होने के बाद कोर्ट के चक्कर के साथ वकील की व्यवस्था सहित कई अन्य परेशानियां आती थीं, लेकिन अब जिले में वन स्टॉप सेंटर खुल जाने से पीड़िताओं को न्याय के लिए थाना, अस्पताल, वकील, सलाहकार के लिए अलग-अलग जगह भटकने की जरूरत नहीं पड़ेगी. महिलाओं को एक छत के नीचे न्याय से जुड़ी हर संभव मदद उपलब्ध कराने का कार्य प्रशासन करेगा.
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