अविवाहित िकशोरी ने रोड किनारे दिया बच्ची को जन्म

Updated at : 23 Aug 2017 4:56 AM (IST)
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अविवाहित िकशोरी ने रोड किनारे दिया बच्ची को जन्म

तड़पती प्रसूता भोर तीन बजे पहुंची सीएचसी, नहीं खुला दरवाजा चांडिल : घर से निकाली जा चुकी चांडिल की नाबालिग लड़की (17) ने मंगलवार को सड़क किनारे ही बच्ची को जन्म दिया. प्रसव से पूर्व दर्द होने पर वह सीएचसी पहुंची थी, लेकिन वहां दरवाजा बंद मिला. वहां से महज 50 मीटर दूर राणी सती […]

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तड़पती प्रसूता भोर तीन बजे पहुंची सीएचसी, नहीं खुला दरवाजा

चांडिल : घर से निकाली जा चुकी चांडिल की नाबालिग लड़की (17) ने मंगलवार को सड़क किनारे ही बच्ची को जन्म दिया. प्रसव से पूर्व दर्द होने पर वह सीएचसी पहुंची थी, लेकिन वहां दरवाजा बंद मिला. वहां से महज 50 मीटर दूर राणी सती मंदिर के पास सुबह करीब छह बजे उसका प्रसव हो गया. घटना के बाद स्थानीय लोगों ने जच्चा-बच्चा को सीएचसी में भर्ती कराया. दोनों स्वस्थ हैं.
प्राप्त जानकारी के अनुसार, मानसिक रूप से बीमार नाबालिग को उसकी मां ने कुछ महीने पूर्व घर से निकाल दिया था जब उसके गर्भवती होने का पता चला था. तब से वह सड़क पर ही भटकते हुए जीवन बिता रही थी. सुबह करीब तीन बजे जब उसे प्रसव पीड़ा शुरू हुई तो वह खुद चांडिल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) पहुंची. वहां का दरवाजा बंद था. उसने दरवाजा खटखटाया और चीखने-चिल्लाने लगी. लेकिन दरवाजा नही खोला गया. तब दर्द से कराहते हुए वह स्वास्थ्य केंद्र से निकल गयी.
स्थानीय लोगों के अनुसार सुबह फूल तोड़ने निकले लोगों ने नाबालिग को नवजात के साथ बेसुध पड़ा हुआ देखा और उसकी सूचना सीएचसी को दी. इस पर वहां मौजूद कर्मियों ने गैरजिम्मेदार लहजे में कहा कि प्रसूता का कोई परिजन नही है, ऐसे में उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? इसके बाद न तो कोई चिकित्सक पहुंचा न ही एंबुलेंस या ममता वाहन भेजा गया. अस्पताल कर्मियों के फरियाद न सुनने पर स्थानीय लोगों ने चांडिल थाना जाकर मामले की जानकारी दी. पुलिसकर्मियों के पहुंचने के बाद लोगों ने एक ऑटो की व्यवस्था कर स्थानीय महिलाओं की मदद से जच्चा-बच्चा को अस्पताल पहुंचाया.
चिकित्सक बोले-एंबुलेंस का ड्राइवर नहीं था
सीएचसी के प्रभारी चिकित्सक डॉ लखींद्र हांसदा ने अस्पताल की गलती स्वीकार करते हुए सफाई में कहा कि उन्हें सुबह कुछ लोगों ने घटना की जानकारी दी थी लेकिन जब तक एंबुलेंस के ड्राइवर को खोजा गया, तब तक लोग ऑटो से प्रसूता को अस्पताल ला चुके थे. दूसरी ओर सिविल सर्जन डॉ एपी सिन्हा ने सीएचसी का दरवाजा बंद मिलने की बात से ही इनकार किया है. उनका कहना है कि नाबालिग सीएससी तक पहुंची ही नहीं थी.
एसडीओ ने जांच के बाद कार्रवाई की अनुशंसा
घटना की सूचना के बाद एसडीपीओ संदीप भगत तथा एसडीओ भगीरथ प्रसाद भी सीएचसी पहुंचे. दोनों ने वहां मामले पर कुछ भी कहने से इनकार कर दिया. बाद में एसडीओ ने डीसी को एक जांच प्रतिवेदन भेजकर चांडिल सीएचसी के प्रभारी चिकित्सक डॉ लखींद्र हांसदा तथा घटना के समय ड्यूटी पर तैनात एएनएम संगीता कुमारी एवं बीना गोस्वामी के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की अनुशंसा की है.
बच्चे के पिता की जानकारी नहीं
नाबालिग के बारे में स्थानीय लोगों ने बताया कि वह मानसिक रूप से बीमार है. उसे गर्भ कैसे ठहरा, इसके बारे में कोई जानकारी सामने नहीं आयी है. वह पहले अपनी विधवा मां के साथ रहती थी. जब बेटी के गर्भवती होने का पता चला तो मां ने उसे घर से निकाल दिया था. तब से वह सड़क किनारे ही घूमती रहती थी. नाबालिग की मां मजदूरी कर गुजारा करती है.
चांडिल
सीएचसी से 50 मीटर दूर राणी सती मंदिर के पास हुआ प्रसव
एसडीओ ने की प्रभारी चिकित्सक व एएनएम पर कार्रवाई की अनुशंसा
मानसिक रूप से बीमार है लड़की, गर्भ ठहरने पर मां ने घर से निकाल दिया था
सीएचसी का दरवाजा बंद होने की बात गलत है. वह कभी भी बंद नहीं रहता. लड़की ने भी स्वीकार किया है कि वह सीएचसी नही पहुंच पायी थी. उसकी वीडियो रिकॉर्डिंग भी है. जहां तक एंबुलेंस का सवाल है तो वह भेजा ही जा रहा था, तब तक लोग प्रसूता व नवजात को लेकर सीएचसी पहुंच गये.
डॉ एपी सिन्हा, सिविल सर्जन
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