खदानों में धूल-कणों से होता है सिलिकोसिस, सावधानी ही बचाव

Updated at : 30 Jul 2017 5:47 AM (IST)
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खदानों में धूल-कणों से होता है सिलिकोसिस, सावधानी ही बचाव

धूलकण के प्रभाव नियंत्रण पर कार्यशाला में बोले खान सुरक्षा निदेशक ऑस्ट्रेलियाई प्रतिनिधियों ने कम पानी खर्च कर धूलकण नियंत्रण के बताये उपाय किरीबुरू : खदानों या अन्य स्थानों में उड़ते धूलकण से फेफड़ों से संबंधित तथा सिलिकोसिस जैसी बीमारियां होने का खतरा है. विगत चार वर्षों में ओपेनकास्ट माइंस के तीन मजदूरों में सिलिकोसिस […]

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धूलकण के प्रभाव नियंत्रण पर कार्यशाला में बोले खान सुरक्षा निदेशक

ऑस्ट्रेलियाई प्रतिनिधियों ने कम पानी खर्च कर धूलकण नियंत्रण के बताये उपाय
किरीबुरू : खदानों या अन्य स्थानों में उड़ते धूलकण से फेफड़ों से संबंधित तथा सिलिकोसिस जैसी बीमारियां होने का खतरा है. विगत चार वर्षों में ओपेनकास्ट माइंस के तीन मजदूरों में सिलिकोसिस की पुष्टि हुई है. बीमारी की पुष्टि के बाद तीनों को धूलवाले स्थान से हटाकर दूसरी जगह डयूटी दी गयी, जिससे उनकी जान बच सकी. उक्त बातें रविवार को खान सुरक्षा निदेशक सतीश कुमार ने मेघा क्लब में कहीं. खदानों में धूलकण का प्रभाव नियंत्रण संबंधी वर्कशॉप को संबोधित करते हुए श्री कुमार ने कहा कि खदानों में उड़नेवाले धूलकणों से बचने का सबसे अच्छा उपाय उसकी रोकथाम और सावधानी है.
उन्होंने बताया कि धूलकण रोकने के लिए खदानों में पानी छिड़का जाता है, लेकिन पानी की कमी ने दूसरा विकल्प तलाशने पर मजबूर कर दिया है. श्री कुमार ने कहा कि छोटी खदानों में धूलकण अधिक उड़ते हैं. डीडीएमएस साकेत भारती ने बताया कि खदानों के धूलकण से सिलिकोसिस होने का अधिक खतरा है, जिसकी समय पर पहचान न होने से रोगी की जान भी जा सकती है.
पंकज सतीजा, राजेश ने खानों को धूल रहित बनाने पर दिया जोर : चेयमैन एमइएआइ पंकज सतीजा ने बताया कि खदानों व अन्य स्थानों में भी कार्य के दौरान सुरक्षा एवं उसकी प्लानिंग संबंधी कार्यशाला का आयोजन 4-5 अगस्त को टाटा स्टील, नोवामुंडी में होगा. इस दौरान श्री अरासू (बीएमएल) एवं मेघाहातुबुरू प्रबंधन ने भी डस्ट सप्रेशन पर प्रेजेंटेशन दिया. संयुक्त सचिव एमएआइ राजेश कुमार ने धूलकण के प्रभाव को कम करने के लिए सभी खान प्रबंधनों से अपने अनुभव एक-दूसरे से शेयर करने को कहा.
ऑस्ट्रेलिया से आये विशेषज्ञों ने सुझाया पानी का विकल्प : धूल-कण का दुष्प्रभाव कम करने तथा उसकी रोकथाम के लिए ऑस्ट्रेलिया से निकोलस मार्क्स तथा स्टीफन मार्टिन कार्यक्रम में पधारे थे. दोनों ने पावर प्रेजेंटेशन के जरिये धूलकण के दुष्प्रभावों तथा उनकी रोकथाम की जानकारी दी. उन्होंने खदानों की धूलकण से पर्यावरण तथा स्वास्थ्य पर बुरे प्रभाव को चिंताजनक बताते हुए कहा कि विभिन्न कारणों से उड़ती धूल पर विशेष केमिकल्स (डस्ट वर्कस) पानी में मिलाकर छिड़कने से काफी कम पानी खर्च होगा.
इंजीनियर्स एसोसिएशन के प्रायोजन में हुआ था कार्यक्रम : इंजीनियर्स एसोसिएशन के बड़ाजामदा चैप्टर के प्रायोजन व मेघाहातुबुरू खदान प्रबंधन की ओर से आयोजित कार्यक्रम में मेघाहातुबुरू के जीएम एसडी पहाड़ी, किरिबुरू की जीएम इभा राजू , कमलेश राय, डीके बर्मन, मानिक सरकार, यूएस लश्कर, (सभी उप महाप्रबंधक), मनोज कुमार, आलोक वर्मा, डॉ मनोज कुमार, उमेश साहू, अशोक कुमार (सभी वरिष्ठ प्रबंधक), मंटू दास आदि उपस्थित थे. सेल की किरीबुरू, मेघाहातुबुरू, गुवा, चिड़िया, बोलानी, बरसुआं, काल्टा, टाटा स्टील, मेस्को स्टील, रुंगटा, रोयडा आयरन माइंस, मेसर्स सिराजुद्दीन, देवका बाई बेलजी, केजेएस अहलुवालिया, सिलजोड़ा, कालीमाटी आयरन माइंस, जजांग, बिरमित्रपुर लाइम स्टोन आदि के प्रतिनिधि उपस्थित थे.
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