चक्रधरपुर के रौनक बने कोल्हान टॉपर

Updated at : 24 Jun 2017 2:45 AM (IST)
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चक्रधरपुर के रौनक बने कोल्हान टॉपर

चक्रधरपुर : नीट में चक्रधरपुर के रौनक भगेरिया को ऑल इंडिया में 142वां रैंक हासिल हुआ है. यह सफलता इस मायने में खास है कि रौनक एक व्यवसायी परिवार से आता है. उसके पिता राजकुमार भगेरिया बाटा रोड में बालाजी कलेक्शन नामक कपड़े की दुकान चलाते हैं, जबकि मां नीलू भगेरिया गृहिणी हैं. रौनक को […]

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चक्रधरपुर : नीट में चक्रधरपुर के रौनक भगेरिया को ऑल इंडिया में 142वां रैंक हासिल हुआ है. यह सफलता इस मायने में खास है कि रौनक एक व्यवसायी परिवार से आता है. उसके पिता राजकुमार भगेरिया बाटा रोड में बालाजी कलेक्शन नामक कपड़े की दुकान चलाते हैं, जबकि मां नीलू भगेरिया गृहिणी हैं. रौनक को नीट में उसे कुल 665 अंक मिले हैं,

जिसका प्रतिशत 99.986 है. ऑल इंडिया प्रथम रैंक लाने वाले को 697 अंक मिले हैं. इस तरह मात्र प्रथम रैंक लाने वाले से मात्र 33 अंक कम अंक रौनक को मिले हैं. रौनक ने भौतिक विज्ञान में 180 में से 151, रसायन विज्ञान में 180 में 171 तथा जीव विज्ञान में 360 में से 342 अंक हासिल किये हैं.

रौनक ने दसवीं तक की पढ़ाई संत जेवियर्स स्कूल चक्रधरपुर से की. उसके बाद संत मेरीज स्कूल जमशेदपुर में आइएससी किया. जमशेदपुर में रहते हुए उसने आकाश इंस्टीट्यूट में दो साल तक कोचिंग भी की. तत्पश्चात एल्लेन इंस्टीच्यूट कोटा राजस्थान में एक साल तक कोचिंग किया.
परिवार में ज्यादा पढ़ा लिखा कोई नहीं : रोनक भगेरिया के परिवार में कोई बहुत अधिक पढ़ा-लिखा नहीं है. ज्यादातर लोग कपड़े के व्यवसाय से ही जुड़े हुए हैं. पिता राजकुमार भगेरिया मैट्रिक तथा माता नीलू भगेरिया स्नातक हैं. हालांकि उसके दादा अर्जुन लाल भगेरिया ने बी कॉम किया हुआ है. रौनक का छोटा भाई रौशन भगेरिया कक्षा नवम में पढ़ रहा है.
छह माह की तपस्या फिर आजीवन सुख : रौनक : अपनी इस सफलता पर रौनक भगेरिया का कहना है कि मात्र छह महीने के तपस्या उसने की और अब उसे आजीवन उसका सुख मिलेगा. धैर्य और लगन को सफलता का मूल मंत्र बताते हुए उसने कहा, ‘मैंने भी अपनी तैयारी में कोई कमी नहीं छोड़ी थी. हार्ड वर्क करता था. सफलता को सामने रखता, रिजल्ट के दिन को ध्यान में रखता और तैयारी में लीन रहता. रूटीन कुछ भी नहीं बनाया था.’ रौनक कहता है कि लोग समय मिलने पर पढ़ाई करते थे लेकिन वह पढ़ाई के बाद जो समय मिलता था उसमें दूसरे काम करता था. पूरे परिवार को सफलता का श्रेय देते हुए रौनक ने बताया कि सबसे ज्यादा साथ उसकी मम्मी ने दिया. रौनक ने कहा, ‘मम्मी नहीं होती तो शायद यह सफलता नहीं मिलती. सबसे ज्यादा ध्यान मेरी पढ़ाई में मम्मी ने ही दिया. मम्मी का प्यार व पापा का स्नेह ही सफलता का कारण बना.’
हार्ट स्पेशलिस्ट बनना है : रौनक दिल्ली यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिकल साइंस से आगे की पढ़ाई करना चाहता है. अगले साढ़े पांच सालों तक वह एमबीबीएस की पढ़ाई के बाद हृदय रोग विशेषज्ञ बनना चाहता है.
छोटे शहर के व्यवसायी परिवार के छात्र को 142वां रैंक
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