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धूमकुड़िया भवनों के लिए पारंपरिक वाद्य यंत्र आपूर्ति को मिली मंजूरी

Updated at : 07 Jan 2026 10:21 PM (IST)
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धूमकुड़िया भवनों के लिए पारंपरिक वाद्य यंत्र आपूर्ति को मिली मंजूरी

धूमकुड़िया भवनों के लिए पारंपरिक वाद्य यंत्र आपूर्ति को मिली मंजूरी

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सिमडेगा. उपायुक्त कंचन सिंह की अध्यक्षता में आदिवासी संस्कृति एवं कला केंद्र धूमकुड़िया भवनों में पारंपरिक वाद्य यंत्रों की आपूर्ति के लिए जिला स्तरीय क्रय समिति की बैठक हुई. इसमें वाद्य यंत्रों की दर व क्रय प्रक्रिया पर विचार-विमर्श किया गया. बैठक में जिला कार्यक्रम प्रबंधक, पलाश झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी (जेएसएलपीएस) सिमडेगा द्वारा उरांव मांदर व उरांव नगाड़ा की दर समिति के समक्ष प्रस्तुत की गयी. समिति द्वारा उरांव मांदर की दर पांच हजार व उरांव नगाड़ा की दर आठ हजार रुपये की दर से अनुमोदन प्रदान किया गया. साथ ही इन्हीं दरों पर स्वयं सहायता समूह के माध्यम से आपूर्ति आदेश जारी करने की सहमति दी गयी. शेष आठ पारंपरिक वाद्ययंत्र ढोल, पिटा घट, करताल, घुंघरू, झुनझुना, शहनाई, बांसुरी व थेचका को जेम पोर्टल के माध्यम से क्रय करने का निर्णय लिया गया. परियोजना निदेशक, आइटीडीए ने बताया कि जिले के 111 धूमकुड़िया भवनों में तत्काल पारंपरिक वाद्य यंत्रों की आपूर्ति की जानी है. बैठक के दौरान केंद्रीय सरना समिति के अध्यक्ष हरिश्चंद्र भगत ने मांदर बजा कर उसकी ध्वनि गुणवत्ता की जांच की. इसके बाद समिति से क्रय पर सहमति बनी. बैठक में परियोजना निदेशक आइटीडीए सरोज तिर्की, जेएसएलपीएस डीपीएम शांति मार्डीं समेत अन्य संबंधित पदाधिकारी उपस्थित थे.

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