सुंदरकांड हनुमान जी के पराक्रम और अद्भुत भक्ति की गाथा : आचार्य पद्मराज

सुंदरकांड पाठ व सत्संग सभा का आयोजन
सिमडेगा. शहर के टुकूपानी स्थित आचार्य पद्मराज ज्योतिष गुरुकुल में मंगलवार को सुंदरकांड पाठ व सत्संग सभा का आयोजन किया गया. मौके पर आचार्य डॉ पद्मराज स्वामी जी महाराज ने अपने प्रवचन में कहा कि सुंदरकांड हनुमान जी के पराक्रम और अद्भुत भक्ति की गाथा है. उन्होंने कहा कि हनुमान जी की अटूट भक्ति से मनुष्य के बल और बुद्धि में वृद्धि होती है. उनके पास केवल राम नाम का मंत्र था, जिसके प्रभाव से उन्होंने असंभव कार्यों को भी संभव कर दिखाया. उन्होंने बैशाख संक्रांति और नववर्ष की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि सूर्यदेव के मेष राशि में प्रवेश के साथ सौर नववर्ष का प्रारंभ होता है. सूर्य की गति के आधार पर ही समय चक्र संचालित होता है और ज्योतिष शास्त्र का आधार भी इस पर टिका है. आचार्य ने बताया कि मेष से मीन तक 12 राशियां होती हैं, जिनमें सूर्यदेव एक-एक माह निवास करते हैं और इस प्रकार 12 माह में एक वर्ष पूर्ण होता है. उन्होंने स्पष्ट किया कि जहां चैत्र नवरात्र चंद्र गणना पर आधारित विक्रम संवत का प्रतीक है, वहीं बैशाख संक्रांति सूर्य की गति के अनुसार नववर्ष का प्रतीक है. नेपाल समेत कई क्षेत्रों में इसी दिन नववर्ष मनाने की परंपरा है, जबकि पंजाब में इसे बैसाखी के रूप में मनाया जाता है. कार्यक्रम के अंतर्गत अपराह्न चार बजे से सुंदरकांड पाठ व कीर्तन का आयोजन हुआ. साध्वी वसुंधरा जी ने भजनों की प्रस्तुति दी. अंत में मंगल पाठ, आरती व प्रसाद वितरण के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ. आयोजन को सफल बनाने में राहुल प्रसाद, सूर्य प्रसाद, उत्तम कुमार सहित कई श्रद्धालुओं का सराहनीय योगदान रहा.
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By Prabhat Khabar News Desk
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