सिमडेगा : तीन घंटे तक पिता दौड़ते रहे, नहीं मिली एंबुलेंस, नवजात ने तोड़ा दम

Updated at : 11 Sep 2018 7:20 AM (IST)
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सिमडेगा : तीन घंटे तक पिता दौड़ते रहे, नहीं मिली एंबुलेंस, नवजात ने तोड़ा दम

रविकांत साहू सिमडेगा : एंबुलेंस नहीं मिलने के कारण सदर अस्पताल में नवजात की मौत हो गयी. मृत बच्चे के पिता कुरकुरा निवासी देव महली ने इसके लिए अस्पताल प्रबंधन को दोषी ठहराया है. उन्होंने कहा कि तीन घंटे तक एंबुलेंस के लिए वह अस्पताल परिसर में इधर से उधर दौड़ते रहे, पर किसी ने […]

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रविकांत साहू
सिमडेगा : एंबुलेंस नहीं मिलने के कारण सदर अस्पताल में नवजात की मौत हो गयी. मृत बच्चे के पिता कुरकुरा निवासी देव महली ने इसके लिए अस्पताल प्रबंधन को दोषी ठहराया है.
उन्होंने कहा कि तीन घंटे तक एंबुलेंस के लिए वह अस्पताल परिसर में इधर से उधर दौड़ते रहे, पर किसी ने उनकी फरियाद नहीं सुनी. वह एंबुलेंस के लिए भाड़ा देने को भी तैयार थे. अगर समय पर बच्चे का इलाज होता, तो वह बच जाता. बेबस पिता ने कहा कि अस्पताल परिसर में एक एंबुलेंस खड़ी थी. पूछने पर बताया गया कि तेल नहीं है.
दूसरी एंबुलेंस कुरडेग गयी है, फिर पूछने पर बताया गया कि कुरडेग से आने के दौरान रास्ते में एंबुलेंस का चक्का पंक्चर हो गया. इसी उधेड़बुन में तीन घंटे बीत गये और मेरे लाल की जान चली गयी. बच्चे की मौत के बाद मामले की लीपापोती के लिए अस्पताल प्रबंधन की ओर से मुफ्त में एंबुलेंस उपलब्ध करायी गयी. उसने दोषी पर कार्रवाई करने की मांग की है.
एक एंबुलेंस में नहीं था तेल, दूसरी एंबुलेंस गयी थी कुरडेग, आने में हो गयी पंक्चर
बेबस पिता ने कहा
मामले की लीपापोती के लिए बच्चे की मौत के बाद फ्री में उपलब्ध करायी गयी एंबुलेंस
दोषी पदाधिकारियों पर कार्रवाई हो
सिविल सर्जन ने कहा, नवजात पांच माह का था, बचने की उम्मीद कम थी
क्या है मामला
जानकारी के मुताबिक, कुरकुरा निवासी देव महली की पत्नी कतरीना महली ने 9 सिंतबर को बानो अस्पताल में बच्चे को जन्म दिया. नवजात पांच माह का था. उसी दिन बेहतर इलाज के लिए उसे सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया.
सोमवार सुबह करीब 11 बजे उसकी हालत गंभीर हो गयी. चिकित्सकों ने बच्चे को बेहतर इलाज के लिए बाहर ले जाने को कहा. इसके बाद बीमार बच्चे के इलाज के लिए पिता देव महली व अन्य परिजन अस्पताल में एंबुलेंस के लिए दौड़ते रहे. चिकित्सकों ने दोपहर दो बजे के करीब बच्चे को मृत घोषित कर दिया.
लोगों ने कहा : यह कैसी व्यवस्था है, जिंदा में नहीं मिली एंबुलेंस, मरने के बाद मिली
बच्चे को इलाज के लिए ले जाने के लिए एंबुलेंस नहीं मिली. इस कारण उसकी मौत हो गयी. मामले की लीपापोती के लिए अस्पताल प्रबंधन ने मौत के चंद मिनट बाद ही शव ले जाने के लिए परिजनों को एंबुलेंस उपलब्ध करा दिया. यह देख अस्पताल परिसर में मौजूद लोगों ने कहा कि वाह रे व्यवस्था जीवन बचाने के लिए एंबुलेंस नहीं मिली, किंतु शव ले जाने के लिए एंबुलेंस फ्री में उपलब्ध करा दी गयी.
अभी मामले की जानकारी मिली है. स्वयं मामले की जांच करूंगा. जांच में दोषी पाये जाने लोगों के खिलाफ कार्रवाई करूंगाा. बच्चा पांच माह था. उसका वजन सिर्फ 800 ग्राम था, ऐसे में बच्चे के बचने की उम्मीद कम रहती है.
प्रमोद कुमार सिन्हा, सिविल सर्जन, सिमडेगा
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